ओडिशा

ओडिशा ने गलत हलफनामा प्रस्तुत करने पर उम्मीदवारों को दंडित करने के लिए पंचायत कानूनों में किया संशोधन

भुवनेश्वर, 25 दिसम्बर ()। पंचायत चुनावों से पहले, ओडिशा सरकार ने ग्रामीण चुनावों के लिए दायर हलफनामे में गलत जानकारी देने वाले उम्मीदवारों को दंडित करने के लिए तीन कानूनों में संशोधन किया है।

सत्तारूढ़ बीजद सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम 1964, ओडिशा पंचायत समिति अधिनियम 1959 और ओडिशा जिला परिषद अधिनियम, 1991 में संशोधन किया है।

अध्यादेश के अनुसार, एक उम्मीदवार जो स्वयं या अपने प्रस्तावक के माध्यम से झूठी जानकारी देते हैं या अपने नामांकन पत्र या अपने हलफनामे में कोई जानकारी छुपाते हैं, उन्हें दंडित किया जाएगा।

इसी तरह, त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के किसी भी निर्वाचित सदस्य को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा, यदि उन्होंने नामांकन दाखिल करते समय अपने आपराधिक इतिहास, संपत्ति और देनदारियों और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित विवरण वाला एक हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया है।

चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने वाले राज्य ने अक्सर आपदा प्रबंधन के लिए ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (ब्लॉकों) को पावर दी है।

अब ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां ग्राम, पंचायत और पंचायत समिति स्तर पर अपनी आपदा प्रबंधन योजना तैयार कर सकती हैं। राज्य योजना और जिला योजना के अनुसार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण गतिविधियों को अंजाम दे सकती हैं और सुविधा प्रदान कर सकती हैं।

दोनों संस्थान आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक अन्य उपाय भी कर सकते हैं। हालांकि, इस प्रावधान को जिला परिषद अधिनियम में शामिल नहीं किया गया है।

इस बीच, राज्य सरकार ने 30 जिलों में जिला परिषद (जेडपी) अध्यक्ष के पद के लिए सीट आरक्षण सूची का नया मसौदा जारी किया है।

मसौदा अधिसूचना के अनुसार, 30 जिला परिषद अध्यक्ष सीटों में से 7 सीटें अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं, जबकि 5 सीटें अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।

सूत्रों ने बताया कि हालांकि, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं रखी गई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में समुदाय की उचित गणना होने तक उनके लिए सीटें आरक्षित नहीं करने का निर्देश दिया है।

एचके/एएनएम