नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने जहांगीरपुरी हिंसा मामले के एक आरोपी को मानवीय आधार पर जमानत दे दी है, क्योंकि उसकी पत्नी की देखभाल के लिए परिवार में कोई नहीं है। पतनी गर्भवती है।
आरोपी गुलाम रसूल के वकील ने गुहार लगाई, आरोपी का एक नाबालिग बेटा है। आरोपी/आवेदक के माता-पिता अलग रह रहे हैं क्योंकि आवेदक ने अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ शादी की थी। इसलिए, आरोपी/आवेदक को अंतरिम जमानत देने की गुहार लगाई जाती है।
प्राथमिकी के अनुसार, उन पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 186, 353, 332, 307, 323, 427, 436, 109, 120 बी, 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27 के तहत आरोप लगाए गए थे।
राज्य के लोक अभियोजक ने प्रस्तुत किया है कि यद्यपि चिकित्सा दस्तावेजों के साथ-साथ अपेक्षित डिलीवरी की तारीख सत्यापित और सही पाई गई है, वे वर्तमान आवेदन का विरोध कर रहे थे क्योंकि रसूल पर दंगा आदि के गंभीर अपराधों का मामला दर्ज किया गया है।
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया, वह कानून की प्रक्रिया से दूर भाग सकता है। क्षेत्र में स्थिति अभी भी ठीक नहीं है और आवेदक की रिहाई से स्थिति फिर से भड़क सकती है।
प्रस्तुतियों के बाद अदालत ने कहा, इस संबंध में दस्तावेजों का सत्यापन किया गया है और वास्तविक पाया गया है। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा दायर रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पत्नी एक नाबालिग बेटे के साथ अकेली रहती है और आरोपी के माता-पिता अलग रहते हैं।
अदालत ने कहा कि तदनुसार, मानवीय ²ष्टिकोण रखते हुए, आरोपी गुलाम रसूल ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर एक सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत स्वीकार की।
अदालत ने उसे बिना पूर्व सूचना के दिल्ली नहीं छोड़ने और जांच अधिकारी के संपर्क में रहने के लिए भी कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि अपने आवासीय पते में परिवर्तन के मामले में, वह अदालत को उसी के बारे में सूचित करेगा।
आईएएनएस
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