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कार को हाई सिक्योरिटी सिस्टम के भरोसे छोड़ना हो सकता है खतरनाक, जाने क्यों

कार चलाते समय ड्राइवर असिस्ट सिस्टम का इतना आदि जो गया कि उसने सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना ही छोड़ दिया। इस तरह के कारों के सिस्टम्स पर भरोसा करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

कार को हाई सिक्योरिटी सिस्टम के भरोसे छोड़ना हो सकता है खतरनाक

नई दिल्ली. जैसे जैसे समय बढ़ रहा है दुनिया आगे बढ़ रही है।

और इसी के साथ वह तरक्की की ऊंचाइयों को भी छूने लगी है।

जहां पहले लोग पैदल चलने पर यकीन रखते थे अब वे गाड़ी, कार व हवाई जहाज का सफर करने लगे है।

जिस तरह स्मार्टफोन में नए नए फीचर आते है उसी तरह अब कारों में भी इस तरह के नए फीचर्स आने लगे है।

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इन दिनों कारें ईबीडी के साथ एबीएस, हिल असिस्ट कंट्रोल, कोलिजन वार्निंग सिस्टम,लेन असिस्ट सिस्टम, सेमी-ऑटोनॉमस ड्राइव मोड, सेल्फ-पार्किंग

जैसे कईं हाई-सिक्योरिटी फीचर्स से लैस की जा रही है। वही हाल ही में अमेरिका में किहे गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है,

कि इस तरह के कारों के सिस्टम्स पर भरोसा करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

यह हाई सेफ्टी फीचर्स पूरी तरह से भरोसा करने लायक भी नही है।

इंश्योरेंस इंस्टीट्यूट फॉर हाईवे सेफ्टी और एमआईटी के एज लैब द्वारा

अलग अलग वोलेंटियर्स पर अध्य्यन किया गया।

इस अध्ययन में यह पाया गया कि कार चलाते समय ड्राइवर असिस्ट सिस्टम का

इतना आदि जो गया कि उसने सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना ही छोड़ दिया।

यह वोलेंटियर्स इन सेफ्टी फीचर्स पर कुछ ज्यादा ही भरोसा करते दिखाई दिए जो कि बिल्कुल गलत है।

इस अध्ययन के लिए अडॉप्टिव क्रूज़ कंट्रोल से लैस रेंज रोवर इवोक और पाइलट असिस्ट से

लैस वोल्वो S90 कार का इस्तेमाल किया गया था।

वैज्ञानिकों की राय:-

अध्ययन के शुरुआत में सभी ड्राइवर सेफ्टी फीचर्स पर इतना भी ज्यादा भरोसा नही करते थे

लेकिन बाद में यह पाया गया कि वे धीरे धीरे उस सिस्टम पर निर्भर होने लगे।

IIHS के सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट इयान रीगेन ने अनुसार, ड्राइवरों में पायलट असिस्ट सिस्टम के

उपयोग करने के बाद उनका ध्यान भटकने में भी काफी कमी आई।

सेफ्टी फीचर्स पर भरोसा करना है खतरनाक:-

अध्ययन में यह बात सामने आई कि पूरी तरह से उन सेफ्टी फीचर्स पर भरोसा कर्म गलत है।

यह टेस्ला के ऑटोपायलट, कैडिलैक के सुपर क्रूज और मर्सिडीज बेंज के इंटेलिजेंट ड्राइव की ही

तरह वोल्वो के पायलट असिस्ट सिस्टम के भरोसे कार से ड्राइवर को अभी रिप्लेस नही किया जा सकता।

बताया गया है कि इन फीचर्स का इन वास्तविक दुनिया मे इस्तेमाल करने में अभी बहुत समय लग सकता है।

यह नया सिस्टम गाड़ी की स्पीड तथा गाड़ी के स्टेयरिंग को कंट्रोल करता है।

इसलिए यह कहा जा रहा है कि किस तरह ज्यादा अच्छे फीचर्स जितने ज्यादा लाभदायक होते है,

उतने ही नुकसानदेह भी हो सकते है उसी तरह आँखे मूँदकर कार के इस तरह के फीचर्स पर

भरोसा करना ठीक नही क्योंकि यहाँ बात आपकी सुरक्षा की है।

 

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer

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