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कैबिनेट एक्सपेंशन: चुनावी राज्यों का रखा गया पूरा ख्याल, सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिली यूपी को

कैबिनेट विस्तार से आप इस बात का भी अंदाजा लगा सकते हैं कि अगले एक-दो वर्षो में किन-किन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। राजनीतिक तौर पर जो राज्य....

कैबिनेट एक्सपेंशन: चुनावी राज्यों का रखा गया पूरा ख्याल, सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिली यूपी को

नई दिल्ली. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले कैबिनेट विस्तार से आप इस बात का भी अंदाजा लगा सकते हैं कि अगले एक-दो वर्षो में किन-किन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। राजनीतिक तौर पर जो राज्य जितनी अहमियत रखता है उसे उसी हिसाब से कैबिनेट में तवज्जो दी गई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार में बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की अभी तक की कम प्रतिनिधित्व की भरपाई भी की गई है। सरकार के लिए बेहद अहम राज्य उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष की शुरुआत में चुनाव होने वाला है और कैबिनेट विस्तार में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व इसी राज्य से है।

सबसे पहले बात देश की सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की. उत्तर प्रदेश में अगले सात महीने के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं. यूपी के मद्देनजर इस फेरबदल में कई चेहरे दिखाई दे रहे हैं. अब तक यूपी के किसी भी दलित सांसद को मंत्री नहीं बनाया गया था. यूपी चुनाव से ऐन पहले इस समुदाय को बड़ी हिस्सेदारी दी गयी है. पिछड़े समुदाय की ही तरह इस बात दलित समुदाय से भी तीन-तीन मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया जा रहा है।

आगरा से एसपी सिंह बघेल, जालौन से भानु प्रताप सिंह वर्मा और लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से कौशल किशोर तीनों दलित समुदाय से हैं. वहीं ब्राह्मणों की तथाकथित नाराजगी को पाटने के लिए भाजपा ने एक और ब्राह्मण चेहरे को मंत्री पद दिया है. चंदौली सांसद महेन्द्रनाथ पांडेय के साथ अब लखीमपुर खीरी के सांसद अजय मिश्रा भी मंत्री होंगे।

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इसके अलावा उत्तर प्रदेश में सहयोगी पार्टी अपना दल की नेता अनुप्रिया सिंह पटेल को भी कैबिनेट में जगह दी गई है. अनप्रिया सिंह की पार्टी अपना दल की राज्य के पटेल समुदाय में अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है. इसके अलावा पंकज चौधरी और बीएल वर्मा को भी ओबीसी मतदाताओं को साधने के लिए जगह दी गई है।

यूपी से इन सांसदों को मंत्रिमंडल में मिली जगह
उत्तर प्रदेश से महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी, मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल, आगरा के सांसद डा. सत्य पाल सिंह बघेल, जालौन के सांसद भानु प्रताप सिंह वर्मा, मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर, खीरी के सांसद अजय कुमार और राज्य सभा सांसद बी एल वर्मा ने राष्ट्रपति भवन में पद व गोपनीयता की शपथ ली। इनमें चार कुर्मी जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि दो दलित हैं और एक ब्राह्मण है। एक साथ चार कुर्मी जाति के सांसदों का शामिल करने को भाजपा की तरफ से दो दर्जन से ज्यादा संसदीय सीटों पर दावेदारी को मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है। यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि बुधवार के विस्तार के बाद मोदी सरकार के 77 मंत्रियों में से 15 उत्तर प्रदेश से हैं।

बंगाल से चार सांसदों को मंत्रिपरिषद में जगह
बंगाल से चार सांसदों को मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है जबकि सरकार में पहले से शामिल इस राज्य के दोनों मंत्रियों बाबुल सुप्रियो और देवाश्री चौधरी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। सरकार में शामिल चार नए चेहरे शांतनु ठाकुर, जान बारला, नीतिश प्रमाणिक और सुभाष सरकार हैं।

माना जा रहा है कि हाल ही में संपन्न विधान सभा चुनाव में सुप्रियो और चौधरी के लचर प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें बाहर किया गया है। इन दोनों की जगह पर जिन चार नए चेहरों को शामिल किया गया उन्हें बंगाल के लिए भाजपा की नई राजनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें एक तरफ मतुआ समुदाय के सांसद शांतनु ठाकुर को प्रतिनिधित्व दिया गया है। वे बंगाल के उत्तरी क्षेत्र में अलीपुरद्वार के सांसद हैं और उन्हें पार्टी इस क्षेत्र की राजनीति में अपना नया चेहरा बनाने की मंशा रखती है।

इसी तरह से कूचबिहार के युवा सांसद और टीएमसी नेता ममता बनर्जी के पूर्व सहयोगी नीतिश प्रमाणिक को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने टीएमसी नेता को यह संकेत दिया है कि विधान सभा हार के बाद की राजनीति शुरू हो गई है। प्रमाणिक मोदी सरकार के सबसे युवा मंत्री भी होंगे।

मंत्रिपरिषद में गुजरात के तीन नए चेहरे शामिल
गुजरात में नवंबर-दिसंबर, 2022 में चुनाव होना है और उसके पहले दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना कम ही है। यही वजह है कि राज्य का प्रतिनिधित्व केंद्र सरकार में बढ़ाया गया है। तीन नए चेहरे दर्शना विक्रम (सूरत), डा.महेंद्रभाई मुंजापारा (सुरेंद्रनगर)और चौहान देव सिंह (खेड़ा) को शामिल करने के साथ ही दो राज्य मंत्रियों मनसुख मांडविया और पुरुषोत्तम रूपाला का दर्जा बढ़ा कर उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया गया है। महाराष्ट्र में चुनाव तो अभी दूर है लेकिन वहां से चार नए लोगों नारायण राणे, भागवत कृष्णा राव कराड, डा.भारती प्रवीण और कपिल मोरेश्वर पाटिल को शामिल किया गया है। 48 लोकसभा सीटों वाले इस बड़े राज्य का प्रतिनिधित्व अभी तक मोदी सरकार में कम माना जा रहा था। चार नए लोगों के आने से अब पार्टी राज्य को पूरा प्रतिनिधित्व देने का दावा कर सकती है।

महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश, बीएमसी पर भी निगाहें:

इसके अलावा महाराष्ट्र से भी कई नेताओं को कैबिनेट में जगह दी गई है. इनमें सबसे प्रमुख नाम नारायण राणे का है. महाराष्ट्र की राजनीति में नारायण राणे कद्दावर नेता हैं. अगले साल बीएमसी का चुनाव होना है. ऐसे में पार्टी बीएमसी इलेक्शन में उनके प्रभाव का इस्तेमाल पार्टी मतदाताओं को लुभाने के लिए करेगी. साथ ही राज्य से जातीय समीकरण साधने के लिए डॉ. भारती पवार, कपिल पाटिल और भगवत करद को भी जगह दी गई है.

अब भी फोकस में है पश्चिम बंगाल:

पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव गुजर चुके हैं लेकिन कैबिनेट फेरबदल देखकर लगता है कि बीजेपी के फोकस में राज्य अब भी बना हुआ है. यही कारण है कि राज्य से चार नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. इन नेताओं में निशिथ प्रमाणिक, जॉन बराला, शांतनु ठाकुर, सुभाष सरकार हैं. शांतनु ठाकुर मटुआ समुदाय से आते हैं जो बीजेपी का वोटर माना जाता है. इनके अलावा जॉन बराला आदिवासी नेता हैं. राज्य से नेताओं को मंत्रिमंडल में मिली जगह को देखते हुए लगता है कि 2024 चुनावों की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer

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