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तीसरी लहर नही आएगी भारत मे, डरना है बेबुनियाद, जानें क्या कहते है विशेषज्ञ

तीसरी लहर: किसी नए वेरियंट के आने बाद ही यह कहा जा सकता है कि देश मे कोरोना की तीसरी लहर आएगी या नही। उन्होंने यह भी कहा कि जो वेरियंट अभी देश मे मौजूद है वह संक्रमण में वृद्धि नही कर सकता।

तीसरी लहर नही आएगी भारत मे, डरना है बेबुनियाद, जानें क्या कहते है विशेषज्ञ

नई दिल्‍ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डायरेक्‍टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने हाल ही में देश में वायरस संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि यदि कोविड के नियमो का ठीक से पालन नहीं किया गया और भीड़-भाड़ पर रोक नही लगाई गई तो कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर अगले छह से आठ हफ्ते में ही देश में दस्तक दे सकती है।
हालांकि उनके इस दावे के विपरीत कुछ शीर्ष वायरोलॉजिस्‍ट या विषाणु वैज्ञानिकों ने कहा है कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर का डर बेबुनियाद है।
उन्होंने कहा कि कोरोना का संक्रमण बढ़ने को लेकर कही भी किसी तरह का कोई वैज्ञानिक आधार उपलब्‍ध नहीं है।

वायरोलॉजिस्‍ट डॉ. टी जैकब जॉन के अनुसार,
किसी नए वेरियंट के आने बाद ही यह कहा जा सकता है कि देश मे कोरोना की तीसरी लहर आएगी या नही। उन्होंने यह भी कहा कि जो वेरियंट अभी देश मे मौजूद है वह संक्रमण में वृद्धि नही कर सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि जुलाई के अंत तक महामारी घटने लगेगी। अच्छी रणनीति के चलते कोविड 19 को हम खत्म कर सकते है।
वहीं अमेरिका में रह रहे डॉक्‍टर डॉ. रवि गोडसे ने भी कोरोना की तीसरी लहर से संबंधित मुद्दों पर बात की है।

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क्या कोरोना वायरस का अंत हो गया?

मेरा मानना है कि कोई भी भारत में संक्रमित होने से नहीं बचा है. मगर जिनमें हुआ वो ठीक भी हुए. टीके अच्छी दर से लोगों को लगे हैं. केस तो आ सकते हैं मगर लहर नहीं आएगी। वहीं 1 जुलाई को अंत हो जाएगा.
डर से प्रतिरोधात्मक क्षमता भी प्रभावित होती है।
यदि सब सही रहा तो 2 अक्टूबर तक मास्क भी उतर जाएंगे।

टीके की असर क्षमता को लेकर लोग डरे हुए हैं,
मान लीजिए 4 हफ्ते के फासले पर जिसने भी टीका लिया और उसकी असर क्षमता 55 फीसदी है मतलब है कि आपको 45 फीसदी चांस है कोविड होने का. लेकिन सीरियस होने से वो आपको बचाता है. खबर ये चलती है कि वैक्सीन के बाद भी कोविड हो गया लेकिन इसको ऐसे भी सोच सकते हैं कि कोविड के दो डोज लेकर मैं बच गया और अस्पताल नहीं गया ये सोचने की जरूरत है. अगर डोज़ का गैप बढ़ाया गया है तो यकीनन सबके हित में है।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer

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