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NASA: मंगल पर एक नहीं दर्जनों है झीलें, पानी ठंड की वजह से जमी हुई है झीलें

NASA के रिसर्चर्स ने दावा किया है कि मंगल पर पानी के महज 1-2 नहीं, बल्कि दर्जनों झीलें मौजूद हैं। पानी मिलने की खबर के बाद तो मंगल पर बस्तियां बसाने की भी योजनाएं बनने लगीं. अब वैज्ञानिकों की इस योजना को बल देने वाली एक और खोज सामने आई है।

NASA: मंगल पर एक नहीं दर्जनों है झीलें, पानी ठंड की वजह से जमी हुई है झीलें

नई दिल्ली. तीन साल पहले वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर पानी होने की पुष्टि कर दी थी। वैज्ञानिकों ने तीन साल पहले पुष्टि करते हुए कहा था कि मंगल ग्रह पर पानी की कई झीलें हो सकती हैं, जिनमें संभव है कि अभी भी पानी हो और अब एक नए अध्ययन से पता चलता है कि लाल ग्रह की सतह के नीचे एक मील से भी कम दूरी में दर्जनों झीलों सहित पहले की तुलना में अधिक पानी हो सकता है।

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पानी मिलने की खबर के बाद तो मंगल पर बस्तियां बसाने की भी योजनाएं बनने लगीं. अब वैज्ञानिकों की इस योजना को बल देने वाली एक और खोज सामने आई है। NASA के रिसर्चर्स ने दावा किया है कि मंगल पर पानी के महज 1-2 नहीं, बल्कि दर्जनों झीलें मौजूद हैं।

नासा के जेट प्रोपल्शन लैब (NASA’s Jet Propulsion Laboratory) ने यूरोपियन स्पेस एंजेसी (European Space Agency) के मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर के डेटा का विश्लेषण करने के बाद ये दावा किया है. मंगल ग्रह के दक्षिणी पोल (Martian south pole) से मिले रडार रेफ्लेक्शन को देखना और इस विश्लेषण को मिलाने के बाद वैज्ञानिकों का कहना है कि साउथ पोल पर ये झीलें मौजूद हैं. हालांकि इनमें पानी तरल नहीं होकर बर्फ के रूप (South Polar Layered Deposits) में जमा हुआ है. इन पर सूखे बर्फ की डस्ट है और ये पूरे इलाके पर अच्छी तरह जमी हुई है।

जबरदस्त ठंड की वजह से जमी हैं झीलें:
रडार से मिले सिग्नल को लेकर NASA JPL के रिसर्चर जेफ्री पॉल्ट (NASA JPL investigator Jeffrey Plaut) कहते हैं कि हम ये नहीं कह सकते कि ये पानी तरल है. या तो मंगल की सतह के नीचे अच्छी मात्रा में पानी है या फिर रडार से मिले सिग्नल किसी और चीज़ की ओर से इशारा करते हैं. इस पर शोध अभी जारी है. मंगल ग्रह के दक्षिणी पोल को लेकर 15 साल से रिसर्च चल रही है. एक दूसरे शोध में भी कहा जा चुका है कि मंगल ग्रह का 33 से 99 फीसदी तक का पानी इसकी कड़ी सतह के नीचे है, क्योंकि ये चट्टाने अरबों साल पुरानी हैं और यहां का तापमान माइनस 63 डिग्री सेल्सियस है. इतने कम तापमान में पानी का तरल रहना नामुमकिन है।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer

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