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गंगा सप्तमी पर हरकी पैड़ी में सीएम धामी ने किया पूजन

हरिद्वार, 8 मई () गंगा सप्तमी के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरिद्वार पहुंचे और यहां गंगा पूजन व आरती में शामिल हुए। इस दौरान उनकी पत्नी गीता धामी भी मौजूद रहीं। उन्होंने देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिये मां गंगा से प्रार्थना की। कहा कि रविवार को बदरीनाथ धाम के कपाट खुल गए। बे-रोकटोक चारधाम यात्रा चलती रहे, इसके लिए गंगा मैया से प्रार्थना की।

वहीं मां गंगा का जन्म दिवस मानी जाने वाली गंगा सप्तमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे हैं। हर की पैड़ी समेत आसपास के गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। हर की पैड़ी की प्रबंध कार्यकारिणी संस्था श्रीगंगा सभा की ओर से विशेष आयोजन का इंतजाम किया गया है।

गंगा स्नान और पूजन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी हरकी पैड़ी पहुंचे। कोरोना काल के दो साल बाद यह पहला मौका है जब गंगा सप्तमी के इस महापर्व पर श्रद्धालुओं को हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड समेत सभी गंगा घाटों पर डुबकी लगाने और धर्म कर्म करने की बिना रोक-टोक अनुमति है।

गंगा सप्तमी के अवसर पर देश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मण झूला के घाटों पर गंगा में श्रद्धा की डुबकी लगाकर मां गंगा की पूजा अर्चना कर मां गंगा का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया। इस दौरान त्रिवेणी घाट पर श्री गंगा सभा ने भव्य गंगा आरती के साथ हवन पूजन भी किया। रविवार को ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर मां गंगा के जन्मोत्सव के दौरान उत्तराखंड राज्य के शहरी विकास एवं वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, नगर निगम की महापौर अनीता ममगाई, गंगा सभा के मुख्य संरक्षक महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, गंगा सभा के महामंत्री रामकृपाल गौतम, राहुल शर्मा, डा. एचआर ममगाई, दिनेश सती भी उपस्थित थे। गंगा आरती के उपरांत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में दीप प्रज्वलित किए। इस दौरान नगर में विभिन्न संस्थाओं ने मीठे शीतल जल की छबील लगाकर लोगों को मीठा शीतल जल वितरित किया।

भगवान गिरी आश्रम के पीठाधीश्वर महंत भूपद्र गिरी ने कहा कि पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, वैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग लोक से शिवशंकर की जटाओं में पहुंची थी। इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन गंगा दशहरा (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां गंगा का पूजन किया जाता है।

गंगा सप्तमी पर धर्मनगरी में विधि विधान के साथ गंगा पूजन और स्नान कर श्रद्धालु पुण्य के भागीदारी बने। वहीं प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत रविपुरी महाराज के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने पूजन कर गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। वहीं हनुमान घाट से विगत कई वर्षों से मां गंगा जन्मोत्सव संघ मोती बाजार द्वारा निकाली जाने वाली पालकी यात्रा को महंत रविपुरी महाराज ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। महंत रविपुरी महाराज ने कहा कि वैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी के दिन मां गंगा स्वर्गलोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थी। इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी या गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है। गंगा सप्तमी के अवसर पर्व पर मां गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

स्मिता/एसकेपी