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चंद्र भेदन प्राणायाम जो तेज गर्मियो में दें ठंडक का एहसास

चंद्र भेदन त्वचा के रोगों में भी लाभकारी है। क्योंकि इसको करने से चन्द्र नाड़ी क्रियाशील हो जाती है, जिससे उच्च रक्तचाप, चिड़चिड़ेपन, अनिद्रा व तनाव को दूर किया जा सकता है।

चंद्र भेदन प्राणायाम जो तेज गर्मियो में दें ठंडक का एहसास

अगर आप बढ़ती गर्मी में इर्रिटेशन और तनाव महसूस करने लगे है तो आपको चंद्रभेदन प्राणायाम के बारे में जरूर जानना चाहिए। इस प्राणायाम को करने से पित्त रोगों में आराम मिलता है। पेट की गर्मी, खट्टी डकारें व मुंह के छाले दूर होते हैं। इसे प्रतिदिन करने से रक्त शुद्ध होता है और ये प्राणायाम त्वचा के रोगों में भी लाभकारी है। क्योंकि इसको करने से चन्द्र नाड़ी क्रियाशील हो जाती है, जिससे उच्च रक्तचाप, चिड़चिड़ेपन, अनिद्रा व तनाव को दूर किया जा सकता है।

उच्च रक्तचाप:
उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए ये प्राणायाम बहुत अच्छा है। जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि के कारण, रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाये रखने के लिये दिल को सामान्य से अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन चन्द्रभेदन प्राणायाम करने से इस समस्या को कम किया जा सकता है।

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आंखे:
चन्द्र भेदन प्राणायाम आखो की सेहत के लिए बहुत लाभदायक है। आंख कई छोटे हिस्सों से बनी एक जटिल ग्रन्थि है, जिसमें से प्रत्येक हिस्सा सामान्य दृष्टि के लिए अनिवार्य है। साफ देख पाने की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि ये सभी हिस्से परस्पर कितने बेहतर तरीके से काम करते हैं।

मानसिक तनाव:
चन्द्र भेदन प्राणायाम से मानसिक तनाव दूर होता है। और मन शान्त रहता है। तनाव मनःस्थिति से उपजा विकार है। मनःस्थिति एवं परिस्थिति के बीच असंतुलन एवं असामंजस्य के कारण तनाव उत्पन्न होता है। जबकि उचित श्वास प्राणायम से इसे संतुलित किया जा सकता है।

पित्त रोग:
पित्त एक प्रकार का पाचक रस है, लेकिन ये विष भी है। पित्त क्षारमय (पतला रस) तथा चिकनाई युक्त होता है तथा इसका रंग सुनहरा तथा गहरा पिस्तई युक्त होता है। पित्त का स्वाद कड़वा होता है। पाचनक्रिया में पित्त का कार्य महत्वपूर्ण होता है। प्रतिदिन चन्द्रभेदन प्राणायाम इसे संतुलित करने में मदद करता है।

त्वचा संक्रमण:
इस प्राणायाम को करने से गर्मियों में होने वाले त्वचा संबंधी संक्रमणों से भी बचाव होता है। त्वचा शरीर का सबसे बड़ा तंत्र है। ये सीधे बाहरी वातावरण के सम्पर्क में होता है। इसके अतिरिक्त बहुत से अन्य तन्त्रों या अंगों के रोग (जैसे बवासीर) भी त्वचा के माध्यम से ही अभिव्यक्त होते हैं। जबिक चंद्रभेदन प्राणायाम रक्त को शुद्ध कर त्वचा संक्रमणों से राहत देता है।

चन्दरभेदन प्राणायाम कैसे करे:

• सबसे पहले किसी शांत जगह पर दरी बिछाकर सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं।
• अब अपनी गर्दन, रीढ़ की हड्डी और कमर को सीधा करें।
• अब अपने बायें हाथ को बायें घुटने पर ही रखें, और दायें हाथ के उंगूठे से दाएं नाक के छेद को बंद कर दें।
• अब बाईं नाक से लंबी और गहरी सांस को भरें और हाथ की अंगुलियों से बाएं नाक के छेद को भी बंद कर दें।
• अब जितना हो सके उतनी गहरी श्वास को अंदर ही रोकें।
• बाद में दाहिनी नाक से धीरे-धीरे श्वास छोड़ दें।
अब इसी क्रिया को कम से कम 5 मिनट तक दोहराएं।

याद रखे:
• लो ब्लड प्रेशर, दमा और कफ रोगी इस प्राणायाम को न करें।
• ये प्राणायाम हमेशा खाली पेट करना चाहिए।
इस प्राणयाम की अवधि एक साथ नहीं बढ़ानी चाहिए।
• इस प्राणायाम का अभ्यास साफ-स्वच्छ हवा या अच्छी वेंटिलेशन वाली जगह पर ही करना चाहिए।
• सर्दियों में तथा कफ प्रकृति वालें लोगों को ये नहीं करना चाहिए।
• और…. एक ही दिन में सूर्य भेदन प्राणायाम और चंद्र भेदन प्राणायाम एक साथ नहीं करने चाहिए।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer

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