मप्र : दमोह के स्कूल में हिजाब विवाद गहराया, सरकारी अधिकारी पर स्याही से हमला

Sabal SIngh Bhati
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भोपाल, 6 जून ()। दमोह के एक निजी स्कूल में हिजाब विवाद से जुड़े एक मामले की जांच टीम में शामिल मध्य प्रदेश सरकार के एक अधिकारी पर मंगलवार को लोगों के एक समूह ने हमला कर दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना के वीडियो के अनुसार, अधिकारी जब वाहन के अंदर बैठा था, दो व्यक्ति आए और उस पर स्याही फेंकी और जय श्रीराम के नारे लगाए।

अधिकारी ने कहा कि दमोह के गंगा-जमुना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हिजाब विवाद की जांच के दौरान उन पर हमला किया गया।

अधिकारी ने कहा, मैं जानता हूं कि किन लोगों ने मुझ पर स्याही फेंकी है। मैं उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराऊंगा। वे यह सब गंगा जमुना स्कूल में हिजाब विवाद के कारण कर रहे हैं।

हिजाब विवाद ने अब एक सांप्रदायिक रूप ले लिया है, क्योंकि सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं ने दावा किया है कि इस स्कूल में हिंदू लड़कियों का धर्मातरण किया जा रहा था।

भाजपा नेताओं ने दावा किया कि कम से कम तीन हिंदू लड़कियों को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया गया, जबकि जांच के दौरान तीन शिक्षिकाओं ने इस आरोप को नकार दिया।

मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दावा किया कि यह सिर्फ एक लव जिहाद की घटना नहीं थी, बल्कि बाहर से धन प्राप्त करने वाले लोगों के एक समूह द्वारा संचालित सांठगांठ थी।

शर्मा ने सोमवार को कहा था, दमोह के गंगा-जमुना स्कूल में हिंदू लड़कियों को इस्लाम में परिवर्तित किया गया था। इस मामले में टेरर फंडिंग भी शामिल है .. मैं इस मामले की आतंकवाद के कोण से भी जांच करने की मांग कर रहा हूं।

यह स्कूल पिछले सप्ताह उस समय विवाद में आ गया था, जब उसने अपनी दीवार पर बोर्ड परीक्षा के टॉपर्स को बधाई देने के लिए एक पोस्टर चिपका दिया। उसी पोस्टर की तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए विहिप और एबीवीपी सहित विभिन्न दक्षिणपंथी संगठनों ने आरोप लगाया कि गैर-मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया गया, जैसा कि उनकी तस्वीर में देखा जा सकता है।

जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारियों की एक टीम ने स्कूल का निरीक्षण किया और मानदंडों का ठीक से पालन नहीं करने का दावा करते हुए गंगा-जमुना स्कूल की मान्यता निलंबित कर दी। हालांकि, इसने हिजाब विवाद का कोई जिक्र नहीं किया और कहा कि निरीक्षण में पाया गया कि छात्राओं के लिए कई सुविधाएं अपर्याप्त या अनुपलब्ध थीं।

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