क्या हैं कृषि विधेयक 2020 जिसके विरोध में सिरोमणि अकाली दल की मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मोदी सरकार सेड़ इस्तीफा दिया हैं
कृषि विधेयक 2020: कृषि विधेयक बिल 2020 क्या है? जिसका देशभर के किसान विरोध कर रहे हैं

कृषि विधेयक 2020: कृषि विधेयक बिल क्या है? जिसका देशभर के किसान विरोध कर रहे हैं

- विपक्षी दलों के जोरदार विरोध के बावजूद मॉनसून सत्र में कृषि से संबंधित दो कृषि विधेयक (कृषि विधेयक 2020) गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गए। इससे पहले मंगलवार को कृषि से संबन्धित एक विधेयक लोकसभा में पारित हुआ था। इस मॉनसून सत्र में तीन कृषि विधेयक लाने वाली मोदी सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा जब शिरोमणि अकाली दल की सांसद और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। हरसिमरत कौर के इस्तीफे की जानकारी उन्होने स्वयं ट्वीट कर दी। हालांकि सिरोमणि अकाली दल का मोदी सरकार को समर्थन जारी रहेगा।

भाजपा सरकार इन विधेयकों को किसानों के लिए वरदान की तरह बता रही है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सहित अन्य सभी विपक्षी दल कह रहे है कि इन विधेयकों से किसानों का ही नुकसान होगा। इन विधेयकों के विरोध में पहले भी कई किसान संगठन विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं। गुरुवार को लोकसभा में जब सरकार ने ये विधेयक पेश किया तो शिरोमणि अकाली दल के सांसद सुखबीर सिंह बादल ने इस बिल विरोध किया। फिर इस बिल के विरोध में केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मोदी सरकार में केबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

आइए आपको बताते हैं कि इन विधेयकों में ऐसा क्या हैं जो इनका इतना विरोध हो रहा हैं?
संसद के मॉनसून सत्र के चौथे दिन यानि गुरुवार को लोकसभा में दो कृषि विधेयकों (कृषि विधेयक 2020) ‘कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020’ और ‘कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020’ पर संसद में चर्चा हुई। इससे पहले आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 मंगलवार को पारित हो चुका हैं। कृषि विधेयक 2020 को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने लोकसभा में कहा कि कृषि विधेयक 2020 किसान विरोधी नहीं हैं और ये किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करेंगे। वहीं, विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को छोटे किसानों के लिए नुकसानदायक बताया और इन विधेयकों को संसद की स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की।

किसान क्यों कर रहे हैं इन विधेयकों का विरोध?
देश के कृषि प्रधान राज्यों हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में किसान कृषि विधेयक 2020 का जोरदार तरीके से विरोध कर रहे हैं। किसानों को चिंता मुख्य रूप से व्यापार क्षेत्र, व्यापारी, विवादों का हल और बाजार शुल्क को लेकर हैं। किसानों को आशंका है कि इन विधेयकों के पारित होने के बाद, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को खत्म कर दिया जाएगा और किसानों को बड़े पूंजीपतियों पर आश्रित छोड़ दिया जाएगा। वैसे तो तीनों अध्यादेशों का विरोध कर रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा आपत्ति उन्हें पहले अध्यादेश के प्रावधानों से हैं।

क्या हैं नए विधेयकों में शामिल प्रावधान?

कृषि विधेयक 2020 में शामिल प्रावधानों के मुताबिक अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। पहले फसल सिर्फ मंडी में ही खरीदी जा सकत थी। केंद्र सरकार ने दाल, आलू, प्याज, अनाज और खाद्य तेल आदि को आवश्यक वस्तु नियम से बाहर करके इसकी स्टॉक सीमा को समाप्त कर दिया है। इन सब के अलावा केंद्र ने कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग (अनुबंध कृषि) को बढ़ावा देने पर भी काम शुरू कर दिया है। इन विधेयकों का विरोध कर रहे किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून से कृषि क्षेत्र पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा जिससे किसानों को नुकसान होगा।

विधेयकों पर विपक्षी दलों कि प्रतिक्रिया।
जैसे ही सरकार ने कृषि विधेयक 2020 को लोकसभा में पेश किया उसके साथ ही विपक्षी दलों ने इन विधेयकों का जोरदार तरीके से करना विरोध शुरू कर दिया। केरल से राज्यसभा सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि इन विधेयकों को पारित करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। प्रेमचंद्रन ने कहा कि, ‘सरकार से मेरा विनम्र आग्रह है कि बिलों को जांच के लिए स्थाई समिति को भेजा दिया जाए, नहीं तो यह विधेयक भारत में कृषक समुदाय के लिए एक और आपदा साबित होगी।’ तृणमूल कॉंग्रेस (टीएमसी) सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि इससे पूरा कृषि उद्योग निजीकरण की ओर बढ़ेगा, जिससे राज्यों को राजस्व में भी नुकसान होगा।

सिरोमणि अकाली दल सांसद सुखबीर सिंह बादल ने गुरुवार को लोकसभा में बोलते हुए कहा कि सिरोमणि अकाली दल इन विधेयकों का सख्त विरोध करता हैं।उन्होने बताया कि इन विधेयकों से पंजाब के 20 लाख किसान प्रभावित होंगे। कृषि विधेयक 2020 के विरोध में मोदी सरकार में सिरोमणि अकाली दल की एकमात्र केबिनेट मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हरसिमरत ने इस्तीफे की जानकारी देते हुए ट्विटर पर लिखा कि वो किसानो के साथ उनकी बहन और बेटी बन कर खड़ी रहेगी। अकाली दल के अलावा पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने भी मोदी सरकार द्वारा लाये गए इन बिलों का विरोध किया हैं।

ये विधेयक किसान विरोधी नहीं हैं: कृषि मंत्री
केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा हैं कि नया विधेयक किसान विरोधी नहीं है, यह विधेयक किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करेगा। तोमर ने कहा कि इन विधेयकों से इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार समाप्त होगा और किसान व व्यापारी देश में कहीं भी खरीद और बिक्री के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र होंगे।
जदयू नेता संतोष कुमार ने विधेयक के समर्थन में कहा कि इस विधेयक को लेकर जताई जा रही सभी आशंकाएं निराधार हैं। उन्होने कहा कि ये विधेयक किसानों की तक़दीर बदलने वाला तोहफा हैं।

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