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निपाह वायरस: महाबलेश्वर की गुफाओं की चमगादड़ों में मिला नया निपाह वायरस, कोरोना से दोगुनी है इसकी मृत्यु दर

निपाह वायरस: निपाह वायरस काफी घातक माना जा रहा है क्योंकि इसकी कोई भी वैक्सीन और दवा नहीं है। वहीं इसकी मृत्यु दर भी काफी ज्यादा है। इस वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पैथोजन्स की सूची में शीर्ष 10 में शामिल किया है।

निपाह वायरस: महाबलेश्वर की गुफाओं की चमगादड़ों में मिला नया निपाह वायरस, कोरोना से दोगुनी है इसकी मृत्यु दर

महाबलेश्वर. महाराष्ट्र के सतारा जिले में  महाबलेश्वर की गुफा स्थित है। जहां यह घातक निपाह वायरस मिला है।

एक शोध में पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी NIV ने इस बात की जानकारी दी है। निपाह वायरस काफी घातक माना जा रहा है क्योंकि इसकी कोई भी वैक्सीन और दवा नहीं है। वहीं इसकी मृत्यु दर भी काफी ज्यादा है।
इस वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पैथोजन्स की सूची में शीर्ष 10 में शामिल किया है।

मार्च 2020 में गुफा में मौजूद चमगादड़ों की दो प्रजातियों मिली है। जिनमें Rousettus leschenaultii और Pipistrellus शामिल है। वहीं pipistrellus के खून, गले और मलाशय के स्वाब के नमूने लिए गए थे।
लैब में शोध के दौरान 33 leschenaultii और 1 Pipistrellus के सैंपल में NiV यानि निपाह के खिलाफ एंटीबॉडीज मिली हैं। NIV के शोध में मिली प्राप्तियां जर्नल ऑफ इंफेक्शन एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुई थीं।

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स्टडी की प्रमुख डॉक्टर प्रज्ञा यादव ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान बताया कि इससे पहले महाराष्ट्र में चमगादड़ों की किसी प्रजाति में निपाह नहीं मिला था।
विशेष बात यह है कि जहां कोविड में मृत्यु दर 1 से 2 फीसदी है, तो वहीं, निपाह में CFR 65 से 100 प्रतिशत तक है.
हालांकि, ऐसा नही है कि यह पहला मामला है। इससे पहले भी देश में कई बार निपाह वायरस से जुड़े मामलों की पहचान की जा चुकी है।

2001 में देश का पहली बार निपाह वायरस का मरीज मिला था जो पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी से था। इसके बाद 2007 में राज्य के नादिया जिले में इससे जुड़ा मामला सामने आया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम के डुबरी और मैनागुरी जिलों और पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में NiV की एंटीबॉडीज मिली थीं. ये दोनों स्थान बांग्लादेश सीमा के नजदीक हैं।

वहीं इसके बाद साल 2018 में इस वायरस के कारण 18 लोगों की मौत हो गई। 2019 में भी राज्य में इस वायरस निपाह के मामले देखे गए। 2018 में हुई एक स्टडी के दौरान कई दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की पहचान NiV बीमारी की हॉस्पॉट के रूप में हुई थी। इनमें कई सारे भारतीय राज्यों का नाम भी शामिल था।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer

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