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नोवावैक्स कोरोना से लड़ने में दूसरी वैक्सीन के मुकाबले ज्यादा असरदार, सितंबर से दिसम्बर तक भारत में आने की उम्मीद

नोवावैक्स के मजबूत अंतरिम डेटा के आधार पर भारत सरकार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को इसकी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में जल्द काम शुरू करने के लिए कहेगी।

नोवावैक्स कोरोना से लड़ने में ज्यादा मददगार, सितंबर से दिसम्बर तक भारत में आने की उम्मीद

नई दिल्ली. नोववेक्स अमेरिकी कम्पनी की वैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल के नतीजे आ चुके है। इस वैक्सीन की इतनी क्षमता है कि हल्के, मध्यम और गम्भीर बीमारी में यह 90.4 प्रतिशत कारगर है।
नोवावैक्स के मजबूत अंतरिम डेटा के आधार पर भारत सरकार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को इसकी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में जल्द काम शुरू करने के लिए कहेगी।

एक साल में नोवावैक्स व सीरम ने कोरोना वैक्सीन के 200 करोड़ खुराक (एक महीने में 5 करोड़) तैयार करने का करार किया है। यह डील अगस्त में साइन की थी।
यह वैक्सीन सितंबर से दिसम्बर के बीच आने की उम्मीद है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नोवावैक्स कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट्स से मुकाबला करने में भी कारगर है।

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इसके बेहतर रिजल्ट को देखते हुए जल्द ही इस वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
विश्वभर में वैक्सीन की कमी की बीच कंपनी ने ये नतीजे जारी किए हैं। समझौते के मुताबिक, कम और मध्यम आय वाले देशों और भारत के लिए कम के कम 100 करोड़ खुराक का उत्पादन किया जाएगा।

नोवावैक्‍स की वैक्‍सीन का भारत में नाम ‘कोवावैक्‍स’ होगा। फिलहाल SII इस वैक्‍सीन का 18 साल से ज्‍यादा उम्र के 1600 लोगों पर ट्रायल कर रही है। SII बच्‍चों पर भी ट्रायल करना चाहती है. जिस तरह की संभावनाएं बन रही हैं, ऐसे में नोवावैक्‍स की वैक्‍सीन को सबसे पहले भारत में इमर्जेंसी अप्रूवल मिल सकता है।

डा.नागेश्वर के अनुसार इस अध्ययन के वैज्ञानिक निष्कर्षो का लाभ लेते हुए हमें जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा आबादी का टीकाकरण करना चाहिए।

 

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer

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