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बिहार में राजद के नेता पुत्र जदयू में तलाश रहे राजनीतिक भविष्य !

पटना, 13 अप्रैल ()। देश की राजनीति में जहां एक ओर लोकतंत्र में परिवारवाद को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं बिहार की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दल जनता दल यूनाइटेड अपने कुनबे में विरोधियों खासकर राजद के बड़े नेताओं के पुत्रों को साथ में जोड़ रही है। दूसरी तरफ देखे तो राजद के नेता पुत्र जदयू में अपना राजनीतिक भविष्य देख रहे हैं।

जदयू ने राजद के कद्दावर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र सत्यप्रकाश को दल में शामिल कराया,अब दूसरे कद्दावर नेता व राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे अजीत सिंह जदयू की सदस्यता ग्रहण की है।

दोनों युवा जदयू में आने के साथ ही राजद पर निशाना भी साध रहे हैं। वर्ष 2020 में पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के उपाध्यक्ष रहे रघुवंश प्रसाद सिंह के पुत्र सत्य प्रकाश ने जदयू का दामन थाम लिया था। सत्य प्रकाश ने इस दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा था कि वे अपने पिताजी के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए राजनीति में आए हैं।

उन्होंने कहा था कि हमारी पृष्ठभूमि राजनीति रही है, लेकिन हमारे पिताजी कहते थे कि किसी भी परिवार में एक ही सदस्य को राजनीति में जाना चाहिए, यही समाजवाद है।

इधर, मंगलवार को राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे अजीत सिंह ने अपने पिता को छोड़कर नीतीश कुमार को अपना नेता मान लिया और जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। अजीत सिंह ने कहा कि जदयू में सीखने को मिलेगा।

जदयू की सदस्यता ग्रहण करने के बाद अजीत सिंह ने कहा कि बचपन से ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामकाज को देख रहे हैं, जिससे वे काफी प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि वे बिना शर्त जदयू में शामिल हुए हैं।

उन्होंने साफ लहजे में कहा कि उन्हें राजद से ज्यादा जदयू में सीखने का मौका मिलेगा। उन्होंने जदयू को समाजवादियों की पार्टी बताया।

इधर, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा कहते हैं कि लोगों की पसंद जदयू बनी है। युवा नीतीश कुमार को पसंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा जदयू में आने वाले नेताओं के पुत्र राजद के नेता रहे हैं, इसे दूसरी नजर से नहीं देखना चाहिए। कई ऐसे उदाहरण है कि पिता दूसरे दल की राजनीति करते हैं और पुत्र दूसरे दल के।

इधर, राजद के नेता इस मामले में कुछ नहीं कह रहे। कहा यह भी जा रहा है कि जदयू इसी के बहाने विरोधियों पर दबाव बनाना चाहती है।

कहा यह भी जा रहा है कि इन राजद नेता पुत्रों के बहाने जदयू को विरोधियों पर निशाना साधने में सहूलियत होगी।

बहरहाल, यह नीति जदयू के लिए कितना सफल होगी यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन यह भी देखने वाली बात होगी कि राजद पुत्रों को जदयू में सियासत कब तक पसंद आती है।

एमएनपी/एएनएम