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बुद्ध के महाप्रसाद कालानमक चावल को संबल देगा सीएफसी

लखनऊ, 13 अप्रैल ()। भगवान बुद्ध का प्रसाद कालानमक चावल देश की सीमा से बाहर निकलकर विश्व पटल पर छाने की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है। यहां के किसानों को सीएफसी से जोड़कर न सिर्फ उस प्रसाद को जन-जन तक पहुंचाने का काम होगा, बल्कि उस महाप्रसाद से किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने का भी कार्य सुनिश्चित होगा।

इस महाप्रसाद के धार्मिक और आर्थिक महत्व को बताने के लिए विज्ञान और तकनीक का सहारा लिया जाएगा, जिससे किसान फलीभूत होंगे और प्रसाद भी लोगों तक पहुंचेगा। पर्यटकों के माध्यम से देश दुनिया के बड़े भू-भाग पर रहने वालों को यह खाने का सौभाग्य मिलेगा।

यह चावल आयरन और जिंक की भरपूर मात्रा के कारण सेहत के लिए भी बेहतर है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने की वजह से सुगर के रोगियों के लिए भी मुफीद, भगवान बुद्ध का प्रसाद, कालानमक धान अब अपने नाम के उलट किसानों के लिए काला सोना बनेगा। इसमें सबसे बड़ी भूमिका योगी सरकार-1 में शुरू की गई फ्लैगशिप योजना ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) की रही है। इसमें कालानमक के लिए जिन जिलों को जीआई यानि जियोग्राफिकल इंडिकेशन मिला है, इन सभी जिलों को सिंचित करने वाली सरयू नहर और केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा कालानमक को पांच जिलों (सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर, महराजगंज और देवरिया) का ओडीओपी घोषित करने की भी उल्लेखनीय भूमिका होगी।

बात सीएफसी की करें तो सिद्धार्थनगर में शिवांश सिद्धार्थनगर एग्रीकल्चर डेवलपमेन्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के नाम से वहां का सीएफसी केंद्र बनकर तैयार है। शीघ्र ही इसका उद्घाटन भी होगा। जिस तरह कालानमक मुख्यमंत्री का पसंदीदा विषय है उसके मद्देनजर इस बात की संभावना है कि वह खुद इस केंद्र का उद्घाटन करेंगे।

कृषि वैज्ञानिक आर.सी. चौधरी के मुताबिक, अब तक चावल के लिए कालानमक धान की कुटाई परंपरागत पुरानी मशीनों से होता था। अधिक टूट निकलने से दाने एक रूप नहीं होते थे। भंडारण एवं पैकेजिंग एक बड़ी समस्या थी। सीएफसी में हर चीज की अलग व्यवस्था होगी। पहले धान को डस्टोनर मशीन से गुजारा जाएगा। इससे इसमें कंकड़-पत्थर अलग हो जाएंगे। धान से भूसी अलग करने और पॉलिशिंग की मशीनें अलग-अलग होंगी। असमान दानों के लिए शॉर्टेक्स मशीन होगी। उत्पादक की मांग के अनुसार पैकिंग की भी व्यवस्था होगी। धान के भंडारण के लिए सामान्य और तैयार चावल को लंबे समय तक इसकी खूबियों को बनाए रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था होगी। इस तरह से यहां से निकलने वाला चावल अपनी सभी खूबियों के साथ पूरी तरह शुद्ध होगा।

कालानमक धान को पूर्वांचल के 11 जिलों (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा) के लिए जीआई प्राप्त है। मसलन इन जिलों की एग्रो क्लाइमेट (कृषि जलवायु) एक जैसी है। लिहाजा इस पूरे क्षेत्र में पैदा होने वाले कालानमक की खूबियां समान होंगी। इनमें से बहराइच एवं सिद्धार्थनगर नीति आयोग के आकांक्षात्मक जिलों की सूची में शामिल हैं। कालानमक की इन संभावनाओं को सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना ने और बढ़ा दिया। अन्य फसलों की तुलना में धान की फसल को पानी की अधिक जरूरत होती है। संयोग से चार दशक बाद कुछ महीने पहले पूरी होने वाली सरयू नहर से सिंचित होने वाले जिले बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर और महराजगंज वही हैं जिनको कालानमक के लिए जीआई मिली है। इससे इसकी संभावनाएं और बढ़ जाती हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने बताया कि सीएफसी बन जाने से कालानमक चावल की बिक्री और निर्यात में करीब चार गुना तक इजाफा होगा। शुद्धता की गारंटी मिलने पर देश-विदेश में इसकी मांग बढ़ेगी। मांग बढ़ने से किसानों को वाजिब दाम मिलेंगे। इससे उनकी आय बढ़ेगी। सरकार की यही मंशा भी है।

विकेटी/एसकेपी