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हरियाणा में 11 हेल्थ प्रोजेक्ट 8 साल से लंम्बित : दीपेंद्र हुड्डा

नई दिल्ली 21 अक्टूबर, (आईएएनस)। एम्स झज्जर परिसर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) में इंफोसिस फाउंडेशन विश्राम सदन के उद्घाटन समारोह में न बुलाए जाने से नाराज कांग्रेस सांसद दिपेंद्र हुड्डा ने कहा कि प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए, कई प्रोजेक्ट के बारे में उन्हें अपनी बात तक रखने का मौका नहीं दिया गया। जबकि उन्होंने इसके लिए काम भी किया था।

एनसीआई की शुरूआत के बाद गुरुवार को कांग्रेस सांसद दिपेंद्र हुड्डा ने कहा कि लगातार इसी तरह का रवैया अपनया जा रहा है इससे पहले भी ऐसा हो चुका है। एनसीआई की शुरूआत कांग्रेस की सरकार में ही की गई ऐसे कई प्रोजेक्ट जिनकी शुरूआत कांग्रेस की सरकार में की गई, गुलाम नबी आजाद के स्वास्थ्य मंत्री रहते की गई। जिसमें नेशनल कॉर्डियो इंस्टिट्यूट, नेशलन ट्रांसप्लांटेशन इंस्टिट्यूट, नेशल इंस्टिट्यूट फॉर चाईल्ड हैल्थ जैसे तयशुदा प्रोजेक्ट शामिल थे। जिनका पिछले 8 साल में कोई काम नहीं हुआ। इनकी बात वो गुरुवार के कार्यक्रम में रखने वाले थे। जिसका मौका नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा, हमें खुशी है कि इंफोसिस कंपनी ने ये सारा काम किया है। एक विश्राम गृह बनाया गया 800 बेड्स का। आज भी प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए मुझे इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनाया गया था। पहले भी कैंसर इंस्टिट्यूट का जो फीता काटा गया था तो मुझे इसमें नहीं बुलाया गया था। मेरे प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गुरुवार को एम्स झज्जर परिसर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में इंफोसिस फाउंडेशन विश्राम सदन का उद्घाटन किया।

दीपेन्द्र हुड्डा ने देशभर में 100 करोड़ वैक्सिनेशन लगाए जाने पर कहा कि ये कोरोना महामारी और इसका कैसे सामना किया जाए। ये कोई राजनीतिक विषय नहीं था। हमने कहा था कि इस महामारी में हम सरकार के साथ हैं। सरकार को भी इस मामले पर राजनीति करने से बचना चाहिए। इसका क्रेडिट सबको मिलना चाहिए। आम जनता को हेल्थ वर्कर को क्रेडिट मिलना चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को क्रेडिट मिलना चाहिए। क्योंकि कुछ राज्यों में बीजपी है तो कुछ जगह कांग्रेस और कुछ जगहों पर तीसरे दलों की सरकार है। 100 करोड़ का लक्ष्य पूरा करने में सबका योग्दान है, इसीलिए क्रेडिट भी सबको मिलना चाहिए।

वहीं आर्यन खान के मामले पर उन्होंने कहा कि ये न्याय की प्रक्रिया है। इसमें दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। जो दोषी हो उसको सजा मिले और जो निर्दोष हो उसके साथ न्याय हो।

पीटीके/एएनएम

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