पालीभारतराजस्थान

सिलोकोसिस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए कोरोना आया काल बनकर, घरों में रहने के कारण रुक गयी सांसे

सिलोकोसिस नाम की बीमारी से पीड़ित थे उन लोगो के लिए कोरोना महामारी एक काल बनकर आयी। कोरोना के समय घर मे रहने के कारण फेफड़ों में जमी धूल ने उनकी सांसें रोक दी। कस कारण प्लाई जिले के 35 मरीजो की धड़कने रुक गयी।

सिलोकोसिस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए कोरोना आया काल बनकर, घरों में रहने के कारण रुक गयी सांसे

पाली. जो लोग सिलोकोसिस नाम की बीमारी से पीड़ित थे उन लोगो के लिए कोरोना महामारी एक काल बनकर आयी। कोरोना के समय घर मे रहने के कारण फेफड़ों में जमी धूल ने उनकी सांसें रोक दी। कस कारण प्लाई जिले के 35 मरीजो की धड़कने रुक गयी। दूसरी ओर मरीजो का आंकड़ा भी बढ़ रहा है।
बेहतर उपचार के लिए अब जिला मुख्यालय के बांगड़ अस्पताल में हर सप्ताह शिविर लगाकर इनका उपचार किया जा रहा है।

कोरोना काल में शिविर नहीं लगने के कारण 35 जनों की मौत:

वर्तमान में पाली जिले में 608 मरीज सिलोकोसिस से पीड़ित है। चूंकि बांगड़ हॉस्पिटल में कोरोना काल के कारण अन्य शिविर नही लगे जिस वजह से इस बीमारी से पीड़ित मरीजो की जाने जोखिम में आ गयी।

वर्ष 2016 से अब तक पाली जिले में 102 सिलिकोसिस मरीजों की मौत हो चुकी है। अकेले कोरोना काल में 35 जनों की जान गई। इन मरीजों को लॉकडाउन व उसके बाद शिविर लगाने पर पाबंदी होने के कारण समय पर ऑक्सीजन व उपचार नहीं मिला।

उपचार के लिए लगेंगे हर सप्ताह शिविर:

हॉस्पिटल में सिलोकोसिस ल मरीजो को उपचार के लिए बुलाना शुरू किया है लेकिन अभी उनकी संख्या कम ही है।
अभी लगाए जाने वाले शिविर के लिए मरीज को ई मित्र से पंजीयन कराना होता है। इसके बाद चिकित्सालय से चयनित मरीजों को फोन कर बुलाया जाता है। जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कई मरीजों को इसकी जानकारी नहीं होने से वे शिविर में नहीं पहुंच रहे हैं।

खदानों में व पत्थरों की तुड़वाई करनेका काम करने वाले लोगो की सांस में धूल व मिट्टी के कण जाकर फेफड़े में जमा हो जाते है। जिस कारण फेफड़े काम करना बंद कर देते है जिसमे चलते सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। तथा ऐसी गम्भीर स्थिति में मरीज को ऑक्सीजन जरूरी हो जाता है।

यह भी पढ़े :मदन दिलावर ने डोटासरा को कह डाले अभद्र शब्द, तो डोटासरा ने BJP को बताया ठग, जाने पूरा मामला

जो कोरोना काल में नहीं हो सका। इसके अलावा अन्य फेफड़े की तकलीफ के कारण मरीजों को जान से हाथ धोना पड़ा। प्रदेश के भीलवाड़ा, अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, जालौर, सिरोही, राजसमंद, उदयपुर, बाड़मेर, सवाई माधोपुर और टोंक जिले सर्वाधिक संवेदनशील है। यहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

पाली में यहां सबसे अधिक प्रकोप पाली जिले के जैतारण, बर, रास, रायपुर मारवाड़, बाली, नाना, भीमाणा क्षेत्र में सिलिकोसिस के सबसे अधिक मरीज है। यहां खदानों का काम करने वाले श्रमिक लगातार चपेट में आ रहे हैं। इससे बुरा हाल है।

मरीजों को फोन पर बुला रहे सिलिकोसिस मरीजों को फोन पर बुला रहे हैं, उनका हर सप्ताह उपचार कर रहे हैं। उन्हें समय पर प्रमाण पत्र भी जारी किए जा रहे हैं, कोविड काल में 35 मरीजों की जान गई। मरीजों को लेकर चिकित्सा विभाग गंभीर है। – डॉ. ललित शर्मा, प्रभारी, सिलिकोसिस, बांगड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पाली।

आंकड़ों में सिलिकोसिस कुल मरीज-608 पांच वर्ष में मौतें-102 वर्ष 2020-21 में मौतें-35 वर्ष 2016 से 2020 तक मौतें- 67

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer