delhi-police-vs-lawer

रक्षक मांगे सुरक्षा: इंसाफ मांगने सड़क पर उतरी दिल्ली पुलिस

नई दिल्ली. वकीलों से हुई हिंसक कार्रवाई के विरोध में दिल्ली पुलिस के जवान मंगलवार को सड़क पर उतर आए।

देश के इतिहास में पहली बार इंसाफ की मांग को लेकर हजारों पुलिसकर्मी अपने ही मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठे और नारेबाजी की। कुछ वर्दी में थे तो कुछ सादे कपड़ों में।

नाराज प्रदर्शनकारियों ने पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक की भी नहीं सुनी। उनके साथ धक्कामुक्की तक की गई। कई वरिष्ठ अफसरों के समझाने पर भी पुलिसकर्मी नहीं माने।

जब पुलिस आयुक्त द्वारा मांगे माने जाने का ऑडियो संदेश सुनाया गया तब रात 8 बजे धरना-प्रदर्शन समाप्त हुआ। पुलिसकर्मियों की यूनियन बनाने, की गई कार्रवाई वापस लेने व आरोपित वकीलों पर कार्रवाई करने समेत प्रमुख मांगें मानी गई हैं।

नई दिल्ली स्थित अदालत में पुलिस और वकीलों के बीच हिंसक झड़प के बाद मंगलवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

‘पुलिस कमिश्नर कैसा हो किरण बेदी जैसा हो’ के लगे नारे

पुलिसकर्मियों ने आयुक्त के सामने नारे लगा दिए कि पुलिस कमिश्नर कैसा हो किरण बेदी..दीपक मिश्र जैसा हो। इन सबके बीच पुलिस कमिश्नर को वापस लौटना पड़ा।

बता दें 1988 में तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच संघर्ष हुआ था। उस समय किरन बेदी दिल्ली पुलिस में डीसीपी थीं। उन्होंने पुलिस वालों का साथ दिया था।

ऐसे चला प्रदर्शन

सुबह 9.00 बजे : पुलिसकर्मी आइटीओ स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटने शुरू हुए।

10.00 बजे : प्रदर्शन व नारेबाजी का सिलसिला शुरू हुआ।

दोपहर 12:40 बजे : पुलिस आयुक्त पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने उनकी बात नहीं मानी।

2.00 बजे : पुलिसकर्मियों के परिजन भी प्रदर्शन में शामिल।

शाम 5.00 बजे : हरियाणा पुलिस के रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों का एक जत्था दिल्ली पुलिस के समर्थन में आ गया। उत्तर प्रदेश के भी कुछ पुलिसकर्मी प्रदर्शन में शामिल हुए।

7.30 बजे : पुलिस आयुक्त का संदेश सुनाया गया। इसमें मांगे मानने के आश्वासन के बाद धरना समाप्त करने की घोषणा हुई।

इसलिए अचानक सड़कों पर उतरे पुलिसकर्मी

तीस हजारी कोर्ट परिसर में बवाल के बाद साकेत कोर्ट परिसर के बाहर पुलिसकर्मियों के साथ बदसुलूकी होने से पुलिसकर्मियों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्हें लगा कि उनका और उनके साथियों का अपमान हो रहा है, इसलिए वे एकजुट हो गए। उनका कहना था कि हमसे हर कोई अभद्र व्यवहार करता है। जब हम आला अफसरों से शिकायत करते हैं तो वे भी नहीं सुनते। तीस हजारी कोर्ट परिसर में पहले दिन वकीलों ने हम लोगों की पिटाई की, हम लोगों ने भी वकीलों की पिटाई की। अगले दिन साकेत कोर्ट परिसर के बाहर वकील ने सरेआम सिपाही की पिटाई क्यों की। बता दें, तीस हजारी कोर्ट परिसर में 2 नवंबर को लॉकअप के बाहर गाड़ी खड़ी करने को लेकर वकील और पुलिसकर्मी के बीच कहासुनी ने ¨हसक झड़प का रूप ले लिया था।

ये थीं पुलिसवालों की मांगें

  • सभी स्तर के जजों की पुलिस सुरक्षा वापस ली जाए।
  • हिंसा में शामिल सभी वकीलों पर आपराधिक मुकदमा चले।
  • हिंसा से प्रभावित अफसरों व कर्मियों की शिकायत पर केस दर्ज हो।
  • अदालतों और वकीलों से असहयोग।
  • अदालतों में पूर्ण रूप से पुलिस सुरक्षा हटाई जाए।
  • ट्रैफिक पुलिस वकीलों से कोई नरमी न बरते।
  • वकीलों और उनके स्टाफ की पुलिस कार्यालय में प्रवेश बंद हो।
  • पुलिसकर्मियों के लिए पुलिस प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो।
  • पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों के लिए संगठन बहाल हो।
  • दिल्ली की सरकार को कोई पुलिसकर्मी सहयोग न करे।
  • निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों को बहाल किया जाए।
  • पुलिसकर्मियों पर दर्ज सभी केस वापस लिए जाएं।
  • जिस वकील ने पुलिसकर्मी से मारपीट की है, उसे गिरफ्तार किया जाए।
  • मारपीट की घटना में शामिल वकीलों के लाइसेंस रद किए जाएं।
More Stories
Millions of masks produced in record time as new rules unveiled