भारत

Black Fungus symptoms in hindi:ऐम्स निदेशक का दावा, छूने से नही फैलता ब्लैक फंगस

ऐम्स निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने यह स्पष्ट किया कि, ब्लैक फंगस छूने से नहीं फैलता

- Black Fungus symptoms in hindi:कोरोना की महामारी के बाद देश पर ब्लैक फंगस नाम के इन्फेक्शन का खतरा मंडरा रहा हैं। ब्लैक फंगस इन्फेक्शन अब अलग – अलग रंग में देखने को मिल रहा हैं। कहीं किसी मरीज में सफेद रंग तो कहीं किसी और मरीज में पीले रंग का इन्फेक्शन देखने को मिल रहा हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जानकारी देते हुए ऐम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि, इस फंगल इन्फेक्शन को नाम से बुलाना ठीक नहीं हैं, क्योंकि इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती हैं। डॉ. गुलेरिया के अनुसार, फंगल इन्फेक्शन जिस जगह होता हैं उसके हिसाब से रंग बदलता हैं। डॉ. गुलेरिया ने यह स्पष्ट किया कि, ब्लैक फंगस छूने से नहीं फैलता।

डॉ. गुलेरिया के अनुसार, ब्लैक फंगस (Black Fungus symptoms in hindi) एक अलग फैमिली हैं। इसमें सफेद रंग की फंगल कॉलोनी के साथ ब्लैक कलर की डॉट दिखने के कारण इसका नाम म्यूकर माइकोसिस के साथ जुड़ा हैं। इसी कारण आमतौर पर इसे ब्लैक फंगस बोला जाता हैं। गुलेरिया के अनुसार हाल में जो फंगल इन्फेक्शन पाए जा रहे हैं, वो म्युकर माइकोसिस, एस्परजिलस और कैंडिडा हैं। इन सब में मुकर माइकोसिस ज्यादा देखने को मिल रहा हैं, कम इम्युनिटी वाले लोगों में म्युकर माइकोसिस, एस्परजिलस और कैंडिडा पाया जाता हैं।

जानें क्या हैं ब्लैक फंगस के लक्षण!(Black Fungus symptoms in hindi)

ऐम्स डायरेक्टर डॉक्टर गुलेरिया के मुताबिक, फंगल इन्फेक्शन (Black Fungus symptoms in hindi) के ज्यादा मामले दयबिटिक और स्टेरॉयड का इस्तेमाल करने वाले मरीजों में देखने को मिल रहे हैं। बाकी मरीजों में ये काफी कम देखने को मिल रहा हैं। डॉ. गुलेरिया का कहना हैं कि, म्युकर माइकोसिस कोरोना के अर्ली स्टेज के मरीजों में ज्यादा देखने को मिल रहा हैं, जो की एक बड़ी चुनौती हैं। क्योंकि म्युकर माइकोसिस का इलाज काफी लंबे समय तक चलता हैं। अस्पतालों के लिए म्युकर माइकोसिस के मरीजों के लिए अलग – अलग वार्ड बनाना चुनौती का काम हैं, क्योंकि उन्हें एक वार्ड कोरोना से संक्रमित मरीजों के लिए बनाना हैं और एक वार्ड उन मरीजों के लिए जिन्हें करना नहीं हैं।

इसके अलावा डॉ. गुलेरिया का कहना हैं कि देश में कोरॉना रिकवरी रेट बढ़ने पर पोस्ट कोरोना की चुनौतियों से निपटने की तैयारी करनी चाहिए। उनके मुताबिक, देश में कोरोना से रिकवरी रेट बढ़ी हैं। 3 मई को रिकवरी 81.8 प्रतिशत थी, जो अब 88.7 प्रतिशत हो गई हैं। डॉ. गुलेरिया के अनुसार जैसे – जैसे रिकवरी रेट बढ़ेगा, उसके साथ पोस्ट कॉविड मरीज भी बढ़ेंगे, जिनके लिए हमें पहले से तैयारियां करनी होगी।

डॉ. गुलेरिया के अनुसार कोरोना की पहली लहर के दौरान ये हम समझ नही पाए थे कि, कोरोना से ठीक होने के बाद भी मरीजों में उसके लक्षण लगभग 12 हफ्तों या कई मामलों में इससे ज्यादा भी रहते हैं। उनके अनुसार कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई मरीजों में सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, खांसी या पल्स रेट बढ़ी हुई रहने के लक्षण हो सकते है। इसके अलावा थकान, सर दर्द, जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण भी कई हफ्तों तक रह सकते हैं, जिनका लक्षणों के हिसाब से इलाज करना जरूरी हैं।

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker