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Corona Symptoms in children in Hindi: ऐसे पहचाने बच्चों में कोरोना के लक्षण, देखें सरकारी गाइड्लाइन

कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए सरकार ने बच्चों मे कोरोना के लक्षणों और उनकी देखभाल के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं

- Corona Symptoms in children in Hindi: कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश में खूब तबाही मचा रखी है.  प्रतिदिन लाखों लोग इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं, और हजारों लोग जान गंवा रहे हैं. फिलहाल राहत की बात ये है कि मौजूदा लहर की रफ्तार अब कम हो रही हैं. लेकिन खतरा अभी टला नहीं हैं.  एक्सपर्ट्स अनुसार, देश में कोरोना की तीसरी लहर भी दस्तक दे सकती है. जानकारों का मानना हैं कि तीसरी में सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे (Children) बन सकते हैं.  कई बच्चों में कोरोना के लक्षण दिखाई भी नहीं देते.  फिलहाल देश में बच्चों को कोरोना का टीका लगाने की अनुमति नहीं दी गई हैं.  ऐसे में आपको अपने बच्चों का खास ख्याल रखने की आवश्यकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है.  अधिकतर मामलों में बच्चों में लक्षण (Corona Symptoms in children in Hindi) नहीं नजर आते हैं.  बच्चों में लक्षण सामने आने पर क्या करना चाहिए, इसे लेकर सरकार ने दिशानिर्देश जारी किए है.  सरकार ने गाइडलाइन में कोरोना पीड़ित बच्चों को चार कैटेगरी में बांटा गया है.  पहली कैटेगरी में इसे हैं बच्चे जिनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं हैं.  दूसरी कैटेगरी में कोरोना के हल्के लक्षण वाले बच्चों को रखा गया हैं.  इनमें बुखार, खांसी, सांस में परेशानी, थकान, बदन दर्द, नाक बहना और गले में खराश जैसी शिकायतें रहती है.  तीसरी कैटेगरी में मध्यम लक्षण वाले बच्चों को रखा हैं.  चौथी और आखिरी कैटेगरी में गंभीर लक्षण (Corona Symptoms in children in Hindi) वाले बच्चों को रखा गया हैं.

क्या हैं बच्चों में कोरोना के लक्षण?

(Corona Symptoms in children in Hindi)

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, खांसी, बुखार, सांस में परेशानी, थकावट, जोड़ों और गले में दर्द, नाक से बलग़म. इसके अलावा स्वाद और गंध खत्म होना.  ये बच्चों में पाए जाने वाले कोरोना के लक्षण हैं.  कुछ मामलों में बच्चों के पाचनतंत्र में भी समस्या पाई जाती है.  वहीं अब शरीर के अलग-अलग अंगों में जलन का एक नया लक्षण भी देखा जा रहा है.  जिससे लगातार बुखार बना रहता है.

जिन बच्चों में लक्षण (Corona Symptoms in children in Hindi) नहीं दिखते उन्हें घर पर रखा जा सकता है. अगर परिवार के कोई सदस्य कोरोना से संक्रमित हैं तो, स्क्रीनिंग करके इन बच्चों को पहचान जा सकता हैं. आगे दिखने वाले लक्षणों और इलाज के लिए इन बच्चों पर लगातार निगरानी रखना जरूरी हैं.

वहीं केवल बुखार, सांस की परेशानी, खराब गले से जूझ रहे बच्चों को जांच की आवश्यकता नहीं है. ऐसे लक्षण वाले बच्चों को घर में ही अलग रखकर इलाज किया जा सकता है. मंत्रालय के अनुसार दिल या फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित बच्चों को भी घर पर ही इलाज दिया जाए. इसे बच्चे जिनमे मध्यम लक्षण हैं, उनकी देखभाल नजदीकी हॉस्पिटल में कराएं. कोरोना से संक्रमित बच्चों को लिक्विड डायट दिया जाना चाहिए. छोटे बच्चों के लिए मां का दूध ही सर्वश्रेष्ट हैं. इसके साथ बुखार के लिए पैरासिटामॉल देते रहें.

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