भारत

गैस चैंबर बनी दिल्ली, बारिश के बावजूद नहीं मिली वायु प्रदूषण से राहत

दिल्ली में बारिश और तेज हवा होने के बावजूद प्रदूषण लेवल घटने के बजाय बढ़ गया, ईपीसीए ने दिल्ली-एनसीआर में जन स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा भी की है.

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली समेत एनसीआर के कई इलाकों में शनिवार रात व रविवार सुबह हल्की बारिश हुई. इसके बावजूद यहां वायु प्रदूषण से लोगों को राहत नहीं मिली है. प्रदूषण का स्तर दिल्ली-एनसीआर में ‘गंभीर श्रेणी’ में बना हुआ है. दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 500 के स्तर के करीब पहुंच गया.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार शनिवार को एक्यूआई 407 रहा जो शुक्रवार को 484 था. ध्यान हो कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार पहले ही पांच नवम्बर तक सभी स्कूलों के बंद रहने का एलान कर चुकी है. वहीं पांच नवम्बर तक सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर भी रोक लगाई गई है.

एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक

एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच ‘बेहतर’ 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है। वहीं, हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

दिल्ली की वायु में मौजूद इन जहरीली गैसों और इसके शरीर पर होने वाले इसके असर को समझें …

  1. एसपीएम : सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) को नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये बेहद खतरनाक कण अब दुनियाभर में वायु प्रदूषण का नया पैमाना बन चुके हैं क्योंकि ये शरीर के हर हिस्से पर प्रभाव डालते हैं।
  2. नाइट्रोजन ऑक्साइड : ये तीव्र प्रतिक्रियाशील गैसों का समूह है, जिसमें नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड घुली होती है। यह वातावरण में लाल-कत्थई रंग कुहरा पैदा करता है। इससे त्वचा का कैंसर हो सकता है।
  3. कार्बन मोनोऑक्साइड : यह रंगहीन और गंधहीन गैस है और वाहन के ईंधन से पैदा होती है। इससे दृश्यता घटती है, सुनने की क्षमता घट सकती है, सिर और सीने में दर्द रहता है।
  4. सल्फर डाईऑक्साइड : यह ऐसी रंगहीन गैस है जो पानी में घुलकर भाप के रूप में अम्ल बनाती है। यह औद्योगिक कार्यों से पैदा होती है, जिससे सांस उखड़ने की समस्या पैदा होती है।
  5. ओजोन : यह हल्के नीले रंग की गैस है जो वातावरण में मौजूद गैसों के सूर्य से प्रतिक्रिया करने पर पैदा होती है। कूड़ा वाली जगहों पर यह पैदा होती है। इससे आंखों में पानी, गले में खराश, सीने में खिंचाव की समस्या आती है।

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