भारत

Eid-al-Adha 2021: ईद उल अजहा आज, जानिए ईद पर कुर्बानी और हज की कहानी..

Eid-Al-Adha:हज़रत इब्राहीम के कुर्बानी के इस जस्बे से खुश होकर अल्लाह ने उसके बच्चे की जान बक्श दी और उसकी जगह बकरे की कुर्बानी को कुबूल किया गया।

Eid-al-Adha 2021:

Eid-Al-Adha. भारत. 21 जुलाई 2021 को पूरे भारत मे ईद उल अजहा मनाई जाएगी। ईद-उल-अजहा (Eid al-Adha 2020) को बकरीद भी कहा जाता है. बकरीद मुसलमानों का दूसरा अहम त्योहार है. बकरा ईद, बकरीद, ईद-उल-अजहा (Eid Al Adha) या फिर ईद-उल जुहा इस साल देशभर में 21 जुलाई को मनाई जाएगी. इस्लामिंक कैलेंडर के अनुसार 12वें महीने की 10 तारीख को बकरीद मनाई जाती है. यह रमजान महीने के खत्म होने के बाद तकरीबन 70 दिनों के बाद आता है. इस साल बकरीद 21 जुलाई 2021 को मनाई जाएगी है. असल में बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग बकरे की बलि देते हैं. बली के बाद इसके मांस को बांट या दान कर दिया जाता है.

यह भी पढ़े, Eid-ul-Adha 2021:आज पाकिस्तान समेत इन देशों में मनाई जा रही ईद उल अजहा, भारत मे मनाई जाएगी कल

बकरा ईद मनाने के पीछे का इतिहास:

खुदा ने हजरत इब्राहीम का इम्तिहान लेने के लिए उन्हें यह आदेश दिया कि वे तब ही प्रसन्न होंगे, जब हज़रत अपने बेइंतहा अज़ीज़ को अल्लाह के सामने कुर्बान करेंगे. तब हज़रत इब्राहीम ने कुछ देर सोच कर निर्णय लिया और अपने अज़ीज़ को कुर्बान करने का तय किया. सबने यह जानना चाहा कि वो क्या चीज़ हैं जो हज़रत इब्राहीम को सबसे चहेती हैं जिसे वो आज कुर्बान करने वाले हैं. तब उन्हें पता चला कि वो अनमोल चीज़ उनका बेटा हजरत इस्माइल हैं जिसे वो आज अल्लाह के लिए कुर्बान करने जा रहे हैं. यह जानकर सभी भौंचके से रह गये. कुर्बानी का समय करीब आ गया. बेटे को इसके लिए तैयार किया गया, लेकिन इतना आसान न था| इस कुर्बानी को अदा करना इसलिए हज़रत इब्राहीम ने अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली और अपने बेटे की कुर्बानी दी. जब उन्होंने आँखों पर से पट्टी हटाई तब अपने बेटे को सुरक्षित देखा. उसकी जगह इब्राहीम के अज़ीज़ बकरे की कुर्बानी अल्लाह ने कुबूल की. हज़रत इब्राहीम के कुर्बानी के इस जस्बे से खुश होकर अल्लाह ने उसके बच्चे की जान बक्श दी और उसकी जगह बकरे की कुर्बानी को कुबूल किया गया।

तब ही से कुर्बानी का यह मंज़र चला आ रहा हैं जिसे बकरीद ईद-उल-जुहा के नाम से दुनियाँ जानती हैं.

हज के पीछे का इतिहास:

Eid-al-Adha 2021: ईद उल अजहा पर कुर्बानी की कहानी और हज की दास्तान जानिए..
Eid-al-Adha 2021: ईद उल अजहा पर कुर्बानी की कहानी और हज की दास्तान जानिए..

कुरान के अनुसार, हज की कहानी अब्राहम से शुरू होती है, जिन्हें अल्लाह की तरफ से अपनी पत्नी हाजरा और बेटे इस्माइल को प्राचीन मक्का के रेगिस्तान में छोड़ने का आदेश मिला था. क्योंकि अल्लाह उनके विश्वास की परीक्षा लेना चाहते थे. जब अब्राहम ने अल्लाह का कहा मान लिया और हाजरा और इस्माइल को छोड़ दिया तो प्यासे बच्चे के लिए हाजरा ने पानी की तलाश में मक्का की सफा और मरवाह की पहाड़ियों के बीच सात चक्कर लगाए. लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला. इसी दौरान प्यास से तड़पते बच्चे के पैर के थाप से वहां ताजे पानी के चश्मा (सोता) निकल आया. उसी पानी को आबे ज़मज़म के नाम से जाना जाता है, जिसे मुस्लिम काफी पवित्र मानते हैं.

यह भी पढ़े, मक्का शरीफ लाइव (makkah live) : क्यों दुनिया के सभी मुसलमान मक्का जाना चाहते हैं? जानें सबकुछ

अब्राहम ने आगे चलकर वहीं पास की जगह पर काबा का निर्माण किया. काले पत्थर की एक छोटी सी इमारत जो कि बड़ी सी मस्जिद के केंद्र में है. जिसका हाजरीन घड़ी की सुई की उल्टी दिशा में सात बार चक्कर लगाते हैं. इस दौरान वे लगातार अपने मन में अल्लाह पर विश्वास की बात बनाए रखते हैं. इस प्रक्रिया को ‘तवाफ’ कहा जाता है.

Eid-al-Adha 2021: ईद उल अजहा पर कुर्बानी की कहानी और हज की दास्तान जानिए..
Eid-al-Adha 2021: ईद उल अजहा पर कुर्बानी की कहानी और हज की दास्तान जानिए..

काबा के चारों ओर चक्कर लगाने के अलावा हाजी हजरत अब्राहम के स्थान पर दो रक्कत नमाज़ भी अता करते हैं. वे सफा और मारवाह पहाड़ियों के बीच में हाजरा की पानी की खोज में जैसे भटकी वैसे घूमते हैं. फिर आबे जमजम पीते हैं. अराफात की पहाड़ी और मुज़दालिफा के मैदान पर रात में प्रार्थना करते हैं और शैतान का प्रतीक माने जाने वाले तीन खंभों पर पत्थर मारते हैं. ताकि वे शैतान को दिखा सकें कि वे उससे डरते नहीं हैं।

ईद उल अजहा के मौके पर तमाम मुस्लिम भाइयों व बहनों और तमाम हाजरिनो को तहे दिल से ईद उल अजहा मुबारक!

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker