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आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यूफियस लनिर्ंग ने वर्थना के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली, 13 जनवरी ()। पिछले कुछ महीनों के दौरान इस मसले पर व्यापक चर्चा हुई है कि स्कूलों को पारंपरिक स्कूली शिक्षा की ओर लौटना चाहिए या फिर हाइब्रिड मॉडल को अपनाना चाहिए। कई स्कूलों के लिए जहां हाइब्रिड शिक्षा मॉडल को लागू करके बदलते समय के साथ खुद को ढालना आसान है, वहीं कई अन्य स्कूलों के लिए पारंपरिक स्कूली शिक्षा वाले मॉडल पर लौटने के अलावा कोई और विकल्प ही नहीं है, क्योंकि ऐसे स्कूलों के पास पर्याप्त धन एवं संसाधनों की कमी है।

कोविड-19 के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का प्रकोप बढ़ता ही जा रही है, इसलिए राष्ट्रीय राजधानी सहित कई राज्यों में स्कूलों को बंद करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में हजारों स्कूल अपने सिस्टम में आधुनिक तकनीकों की अनुपस्थिति या कमी के कारण परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए एक स्कूल-केंद्रित ड्रिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म यूफियस लनिर्ंग और शिक्षा-केंद्रित एनबीएफसी वथार्ना फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड ने वित्तपोषण विकल्पों और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ स्कूलों को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यूफियस लनिर्ंग के सह-संस्थापक अमित कपूर ने एक विज्ञप्ति में कहा, हमारी स्थापना के बाद से, हम 21वीं सदी की शिक्षा को सक्षम करके भारतीय शिक्षा प्रणाली को बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वर्थना फाइनेंस के साथ इस समझौता ज्ञापन के साथ, हम स्कूलों को उनकी वित्तीय, परिचालन और शैक्षणिक जरूरतों के लिए वन-स्टॉप सॉल्यूशन के साथ समर्थन और सशक्त बनाने की दिशा में एक और कदम उठा रहे हैं।

एमओयू के तहत उल्लिखित लाभ केवल उन स्कूलों को कवर करेंगे, जो यूफियस लनिर्ंग और वर्थना की छत्रछाया में आते हैं। एमओयू के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता से स्कूलों को अपने बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, शिक्षक प्रशिक्षण में निवेश करने और अपनी कक्षाओं में नई शिक्षण विधियों (न्यू लनिर्ंग मैथड) को पेश करने में मदद मिलेगी।

वर्थना के मुख्य व्यवसाय अधिकारी योगेश गत ने कहा कि इस रणनीतिक साझेदारी से छात्रों के लिए सीखने के परिणामों और शिक्षकों के प्रदर्शन में काफी सुधार होगा।

उन्होंने कहा, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा का समर्थन करने का हमारा विजन यूफियस के साथ अच्छी तरह से मेल खाता है और हमें विश्वास है कि यह साझेदारी अच्छे परिणाम देगी।

भारत की शिक्षा प्रणाली चीन के बाद विश्व स्तर पर सबसे बड़ी है, जिसमें 15 लाख से अधिक स्कूल, लगभग 97 लाख शिक्षक और प्री-प्राइमरी से उच्च माध्यमिक स्तर तक के 26.5 करोड़ से अधिक छात्र हैं।

महामारी के पिछले दो वर्षों में, ड्रॉपआउट (बीच में ही स्कूल छोड़ देना) की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।

सभी खंडों में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट 17 प्रतिशत तक है। निजी दिग्गजों से इस तरह की वित्तीय सहायता स्कूलों को एक आधार प्रदान करेगी, जिससे वे अधिकांश छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के प्रावधान लागू कर सकते हैं।

एकेके/आरजेएस