भारत

फसलों पर अकाल का संकट, राज्य के अधिकांश क्षेत्र में बरसात नहीं,नलों में पानी तक नहीं आ रहा, किसान परेशान

फसलों पर अकाल का संकट मानसून मेहरबान नहीं होने से सबसे ज्यादा असर मारवाड़ की खेती पर पड़ रहा है। राज्य के अधिकांश क्षेत्र में बरसात नहीं है। मौसम

फसलों पर अकाल का संकट, राज्य के अधिकांश क्षेत्र में बरसात नहीं,नलों में पानी तक नहीं आ रहा, किसान परेशान

मानसून मेहरबान नहीं होने से सबसे ज्यादा असर मारवाड़ की खेती पर पड़ रहा है। राज्य के अधिकांश क्षेत्र में बरसात नहीं है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के हिसाब से सितम्बर के पहले सप्ताह तक बारिश के आसार नहीं है, इसके कुछ दिन बाद मानसून राजस्थान से विदा ले लेगा। ऐसे में पश्चिमी राजस्थान में अकाल के हालात बन गए है। ऐसे में कृषि विभाग की ओर से तय लक्ष्य के अनुरूप बुवाई नहीं हो पाई और अब शेष लक्ष्य पूरा होना भी मुश्किल नजर आ रहा है।पूर्वी राजस्थान में अच्छी बारिश के बावजूद बुआई का लक्ष्य सौ परसेंट तक नहीं पहुंच पाया है। सिर्फ छह जिलों में ही बुआई का लक्ष्य पूरा हो पाया है। शेष 27 जिलों में स्थिति खराब है। जहां अच्छी बुआई हुई है, वहां बाढ़ और अत्याधिक बारिश के कारण फसल खराब हुई है।

विभाग के अनुसार, बुवाई लक्ष्य 12.55 लाख हैक्टेयर के मुकाबले जिले में 11.44 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई है । वहीं क्षेत्र के किसानों के अनुसार करीब 10 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई है। जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर जिलों में 50 से 70 प्रतिशत बुवाई हुई थी लेकिन बारिश नहीं आने से अधिकांश फसलें जल गई है। वहीं दो दिन पूर्व क्षेत्र में हुई बारिश से शेष बची फसलों को आंशिक राहत मिली है। इनमें भी कुछ फ सलों के पूरी तरह नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।

बुआई का लक्ष्य

इस बार राजस्थान के 33 में से 27 जिलों में बुआई का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया है। सिर्फ नागौर, अलवर, करौली, बारां, उदयपुर व प्रतापगढ़ में ही बुआई का लक्ष्य पूरा हो पाया है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 27 जिलों में 17 अगस्त तक बुआई का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। आमतौर पर इस सीजन में किसान खेत में मोठ बाजरा, ग्वार, मूंग, मूंगफली और कपास की बुआई करते हैं। इस बार भी जुलाई में बुआई का सिलसिला शुरू हो गया था, जो महीने के अंत तक चला। राजस्थान के कई हिस्सों में हुई अच्छी बारिश के बाद किसान को बीकानेर में मानसून के बरसने की उम्मीद थी। प्रति बीघा करीब दो हजार रुपए खर्च करके किसानों ने बुआई कर दी, लेकिन फल के रूप में कुछ नहीं मिला। कई किसानों ने पच्चीस बीघा तक की बुआई कर दी। यानी करीब पचास हजार रुपए खर्च कर दिए, लेकिन मिला कुछ नहीं।

यह भी पढ़े: 75 लाख रुपये के बिटकॉइन लुटे, किया दोस्त का अपहरण, पुलिस ने किया गिरफ्तार

बारानी क्षेत्र में 15 लाख हैक्टेयर में बोई फसलों पर संकट

पश्चिमी राजस्थान के इन जिलों में बारानी क्षेत्र में मुख्यत बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ, तिल की खेती होती है। इन जिलों का खरीफ फ सलों का सामान्य रकबा 48 लाख हैक्टेयर के लगभग होता है। जिसमें से 20 लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र है वहीं शेष 28 लाख हैक्टेयर बारानी क्षेत्र है, जहां वर्षा आधारित खेती होती है। इस बार मानसून कमजोर होने से बारानी क्षेत्र में लगभग 15 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो सकी। इसमें से भी अधिकतर फसलें नष्ट हो गई है और शेष जलने के कगार पर है। सिंचित क्षेत्र की कपास, मूंगफली, अरंडी, मूंग आदि फसलों की स्थिति भी खराब है।

नलकूपों में पानी नहीं

बारिश नहीं होने के कारण सिचिंत क्षेत्र में पानी का लेवल नीचे जाने से नलकुपों (ट्यूबवेल) में पानी की कमी आ गई है। किसान को बिजली कटौती का सामना भी करना पड़ रहा है। ऐसे में अब ट्यूबवेल वाले खेतों में भी हालात खराब हैं।

इन जिलों में भी संकट

बारिश नहीं होने से बीकानेर के अलावा जैसलमेर, बाड़मेर, बांसवाड़ा, जोधपुर में किसान संकट में है। इन सभी एरिया में इस बार अच्छे मानसून की उम्मीद थी। पहले दौर में मानसून ने यहां प्रभावी आगाज किया, लेकिन बाद में बारिश नहीं हुई। यहां तक कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में भी कम बारिश का असर खेतों में नजर आ रहा है।

बुवाई लक्ष्य व प्राप्ति एक नजर में

फसल– लक्ष्य हैक्टेयर में— प्राप्ति हैक्टेयर में
बाजरा– 400000–333400
मूंग– 302000– 279400
मोठ– 90000– 68000
ज्वार– 40000– 39500
तिल– 28000– 23600
अरण्ड़ी– 23000– 20800
मूंगफली– 156000– 158000
कपास– 65000– 70000
ग्वार– 135000– 136000
अन्य– 16000– 16000
—————————
कुल– 1255000– 1144700

बीकानेर के इन गांवों में हालात खराब

बीकानेर के लूणकरणसर के खोखराणा, बीरमाना, कंकरालिया, लालेरा, रेख मेघाणा, भीखनेरा, खिलेरियां, डेलाणा सहित 70 प्रतिशत बारानी गांवों में 100 प्रतिशत फसल खराब हो गई। नहरी क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण लूणकरणसर क्षेत्र में 50 प्रतिशत खराब हो गई है। अगर 10-15 दिन में बारिश नहीं हुई और नहरी क्षेत्र में 10-15 दिनों में नहर से पानी नहीं मिला तो 100 प्रतिशत फसल खराब हो जाएगी। खाजूवाला जैसे सिंचित एरिया के कई गांवों भी फसल बिल्कुल नहीं है। पूगल में भी कमोबेश ऐसे ही हालात हो रहे हैं, जहां पिछले दिनों कुछ पानी मिला है। श्रीकोलायत, नोखा और बीकानेर तहसील के बारानी खेतों में दूर-दूर तक फसल नहीं है।

इनका कहना है

खोखराना गांव के सत्यनारायण गोदारा का कहना है कि एक और बारिश के इंतजार में किसानों की खेती लगभग नष्ट हो गई है। बीज बोया था उसे गरम हवाओं ने पूरी तरह नष्ट कर दिया। तपती धरती बारिश के इंतजार में एक बार फिर बंजर हो गई है। ट्रैक्टर की मंहगी बुआई और बीज के पैसे अकाल की भेंट चढ़ गए हैं। अब किसान के पास कोई चारा नहीं है।

बारिश के आसार नहीं

अरजनसर के लाधुराम थालोड़ का कहना है कि किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। दक्षिणी पश्चिमी हवाओं ने पानी गिरने के आसार ही खत्म कर दिए हैं। हजारों हेक्टेयर जमीन में अकाल है, किसान का अपना और पशुओं का पेट पालना बहुत मुश्किल है, अब कोई रास्ता नहीं है। वहीं खोखराणा गांव की सरपंच कविता गोदारा का कहना है कि इलाके के काश्तकार खेती बाड़ी से अब परेशान हो गए हैं। लगातार अकाल पड़ रहे हैं। बीज और बुआई के पैसे भी कर्ज करके किसान मरा जा रहा है। केसीसी के लोन से किसानों की फसलों का भारी बीमा कट रहा है और क्लेम के नाम पर कुछ नहीं है।

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer