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आतंकी हमले में मारे गये सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए,अमेरिका समेत 30 नाटो देशों ने आधे झंडे झुकाए

आतंकी हमले में मारे गये अमेरिकी सैनिकों के सम्मान में 30 नाटो देशों ने अपना आधा झंडा झुका दिया। नाटो प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने इस हमले की निंदा की है। नाटो

आतंकी हमले में मारे गये सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए,अमेरिका समेत 30 नाटो देशों ने आधे झंडे झुकाए

काबुल एयरपोर्ट पर हुए आतंकी हमले में मारे गये अमेरिकी सैनिकों के सम्मान में 30 नाटो देशों ने अपना आधा झंडा झुका दिया। नाटो प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने इस हमले की निंदा की है। नाटो मुख्यालय से जो तस्वीरें सामने आईं हैं उसमें नजर आ रहा है कि कई देशों के झंडे आधे झुके हुए हैं। नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले को लेकर  कहा कि ‘सभी पीड़ितों के प्रति हमारी संवेदना है। दूसरों की रक्षा करने में जान गंवाने वाले वाले यूएस सैनिकों का  हम सम्मान करते हैं।’
अफगानिस्तान में गुरुवार की शाम काबुल हवाई अड्डे के बाहर हुए दो विस्‍फोटों में 13 अमरीकी सैनिकों सहित 90 से ज्यादा नागरिकों मौत हो गई थी। खूंखार आतंकवादी संगठन आईएसआईएस खोरासान ने इन हमलों की जिम्‍मेदारी ली है। ये दोनों विस्फोट हवाई अड्डे के बाहर उस स्‍थान पर हुए, जहां से बडी संख्‍या में अफगानी नागरिक हवाई अड्डे में घुसने का प्रयास कर रहे थे। जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने बृहस्पतिवार को हुए हमले के बाद ट्वीट किया था कि ‘मैं काबुल हवाई के बाहर हुए भयानक आतंक हमले की कड़ी निंदा करता हूं। जो लोग इससे प्रभावित हुए हैं उनके साथ मेरी संवेदनाएं हैं। हमारी प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा लोगों को जल्द से जल्द निकालने की है।’

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आपको बता दें कि नाटो 30 देशों की सेनाओं का संगठन है। इसमें एक देश की सेना को दूसरे देश में भेजा जाता है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण दिया जाता है। नाटो की स्थापना 4 अप्रैल 1949 को हुई थी। इसे उत्तर अटलांटिक एलांयस के नाम से भी जाना जाता है। इस संगठन में अमेरिका के अलावा फ्रांस, बेल्जियम, लक्जमर्ग, ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा, डेनमार्क, इटली, नार्वे, पुर्तगाल समेत अन्य देश शामिल हैं। अमेरिका और नाटो देश के सैनिक पिछले करीब 20 सालों से अफगानिस्तान में तैनात थे।
कुछ दिनों पहले अमेरिका ने अपने सैनिकों को अफगानिस्तान से वापस बुलाने का ऐलान किया था। अमेरिका के इस ऐलान के महज 2 हफ्तों के अंदर ही तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर अपना कब्जा जमा लिया। जिसके बाद अफगानिस्तान से निकलने के लिए काबुल एयरपोर्ट पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। इस एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी सैनिक संभाल रहे थे। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने काबुल एयरपोर्ट पर धमाके की आशंका जताई थी और कहा था कि आईएसआईएस के आतंकवादी अमेरिकियों को अपना निशाना बना सकते हैं। जिसके बाद गुरुवार को काबुल में एयरपोर्ट पर ताबड़तोड़ धमाके किये गये। इस धमाके में बड़ा नुकसान हुआ। इस धमाके की कई देशों ने निंदा भी की।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने साफ किया है कि अमेरिकी सैनिकों की इस मौत को पूरा देश भूलेगा नहीं। उन्होंने आतंकवादियों को गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें इसका अंजाम भुगतना होगा। भारत ने भी काबुल में हुए बम विस्फोट में मारे गए लोगों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस हमले की तीखी आलोचना की है। भारत ने कहा है कि काबुल हमले से दुनिया को आतंकवाद और उन सभी लोगों के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत को बल मिला है जो आतंकवादियों को पनाह देते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने इस आतंकी हमले की निंदा की है और हताहत हुए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि काबुल की स्थिति लगातार खराब हो रही है और उनका देश अमेरिका के साथ वहां से लोगों को सुरक्षित निकालने के अभियान में पूरा सहयोग कर रहा है।

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer