भारत

दिल्ली दंगों के मामले में जेएनयू का पूर्व छात्र उमर खालिद गिरफ्तार

- दिल्ली हिंसा मामले की जांच कर रही स्पेशल सेल ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद को गिरफ्तार कर लिया है। खालिद को रविवार रात करीब 12 बजे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी की पुष्टि भी दिल्ली पुलिस उच्च अधिकारियों ने की है। लेकिन जांच का हवाला देते हुए इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी देने को तैयार नहीं हैं।

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की स्पेशल सेल ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दिल्ली हिंसा मामले में खालिद समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके तहत खालिद समेत सभी 8 लोगों के खिलाफ देशद्रोह, हत्या, हत्या का प्रयास और दंगा सहित कई संगीन आरोप हैं। इससे पहले खालिद से स्पेशल सेल की टीम दो बार पूछताछ भी कर चुकी है। स्पेशल सेल की टीम ने पूछताछ के बाद खालिद का मोबाइल फोन भी जांच के लिए जब्त किया था।

पहले यह मामला क्राइम ब्रांच ने दर्ज किया था, लेकिन वर्तमान में दिल्ली पुलिस की एंटी टेरर यूनिट- स्पेशल सेल यूएपीए की धारा के तहत मामले की बड़े षड्यंत्र के एंगल से जांच कर रही है। खालिद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा से पहले 2 जगहों पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप हैं। इन दोनों भाषण के बारे में ही उनसे दो राउंड की पूछताछ की गयी हैं। खालिद पर आरोप हैं कि, ट्रम्प की यात्रा के दौरान कथित तौर पर जनता से सड़कों पर आने की अपील की थी।

कितना कड़ा हैं UAPA कानून?
गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत देश और देश के बाहर गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं। यह कानून 1967 में बना था, लेकिन पिछले साल सरकार ने इस कानून में कुछ संशोधन करके इसे कड़ा बना दिया हैं। नक्सलवाद और आतंक से बेहतर ढंग से निपटने के लिए 2019 में एनडीए सरकार ने इस कानून को और कड़ा बनाते हुए कुछ और प्रावधान जोड़े। एक्ट के प्रावधान इस प्रकार हैं-

– कानून पूरे देश में लागू होता है।
– इस कानून के तहत केस में एंटीसिपेटरी बेल  यानी अग्रिम ज़मानत नहीं मिल सकती।
– किसी भी भारतीय या विदेशी के खिलाफ इस कानून के तहत केस चल सकता है. अपराध की लोकेशन या प्रवृत्ति से कोई फर्क नहीं पड़ता
– विदेशी धरती पर अपराध किए जाने के मामले में भी इसके तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है।
– भारत में रजिस्टर जहाज़ या विमान में हुए अपराध के मामलों में भी यह कानून लागू हो सकता है।
– मुख्य तौर पर यह कानून आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए है।
– किसी भी तरह की व्यक्तिगत या सामूहिक गैरकानूनी गतिविधि, जिससे देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता को खतरा हो, इस कानून के दायरे में है।
– यह कानून राष्ट्रीय इनवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को अधिकार देता है कि वो किसी तरह की आतंकी गतिविधि में शामिल संदिग्ध को आतंकी घोषित कर सके।
– इस कानून से पहले समूहों को ही आतंकवादी घोषित किया जा सकता था, लेकिन 2019 में इस संशोधित कानून के बाद किसी व्यक्ति को भी संदिग्ध आतंकी या आतंकवादी घोषित किया जा सकता है।

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