जसवंत सिंह जसोल (Jaswant Singh Jasol) बायोग्राफी: अटल के हनुमान से लेकर बीजेपी के बागी तक का सफर
जसवंत सिंह जसोल (Jaswant Singh Jasol) बायोग्राफी: अटल के हनुमान से लेकर बीजेपी के बागी तक का सफर

जसवंत सिंह जसोल: अटल के हनुमान से लेकर बीजेपी के बागी तक का सफर

- मारवाड़ के रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के हनुमान एवं पूर्व विदेश वित्त एवं रक्षा मंत्री रहे जसवंत सिंह जसोल का आज सुबह 82 साल की उम्र में निधन हो गया। जसवंत सिंह के निधन की खबर मिलते ही मारवाड़ और राजस्थान समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गयी। जसवंत सिंह सिर में चोट लगने के बाद से कोमा में थे। जसवंत ने 82 साल की उम्र में दिल्ली के आर्मी अस्पताल में आखिरी सांस ली।

जसवंत सिंह जसोल के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया। मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, “जसवंत सिंह जसोल को समाज और राजनीति के प्रति एक अलग नजरिया रखने के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। भाजपा को मजबूत करने में उनका अहम योगदान था। मैं उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।“

जसवंत सिंह जसोल ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारियाँ संभाली। जसवंत सिंह अटल सरकार में वित्त, विदेश और रक्षा मंत्री रहे। जसवंत सिंह जसोल ने पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर के एक छोटे से गाँव से निकल कर दिल्ली के सियासी गलियारों में जो सफलता हासिल की उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। जसवंत सिंह जसोल को मारवाड़ में सम्मान के साथ “दाता” कहा जाता हैं।

जसवंत सिंह जसोल का जन्म 3 जनवरी 1938 को बाड़मेर के जसोल गाँव में एक राजपूत परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम ठाकुर सरदार सिंह था। जसवंत सिंह जी ने अजमेर के मेयो कॉलेज से बीए और बीएससी की डिग्री हासिल की। इसके बाद वे बहुत ही कम उम्र में सेना शामिल हुए। जसवंत सिंह जी जोधपुर के पूर्व महाराजा गज सिंह जी की भी करीबी थे।

जसवंत सिंह ने 1966 में राजनीति में कदम रखा, जहां उन्हे राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत का साथ मिला। इसके बाद 1980 में वे पहली बार राज्यसभा सांसद चुने गए। 1996 में अटल सरकार में उन्हें वित्त मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। हालांकि जसवंत सिंह मात्र 15 दिन वित्त मंत्री रहे और फिर वाजपेयी की सरकार गिर गई। इसके ठीक 2 साल बाद फिरसे वाजपेयी की सरकार में मंत्री पद का जिम्मा सौंपा गया, इस बार उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया।

विदेश मंत्री रहते हुए उन्होने भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों को सुधारने के बहुत प्रयास किये। साल 2000 में उन्होने रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला। फिर अगले साल 2001 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवार्ड मिला। फिर साल 2002 में उन्हें यशवंत सिन्हा के स्थान पर वित्त मंत्री बनाया गया, मई 2004 तक वित्त मंत्री पद संभाला।
साल 2009 में उनके द्वारा जिन्ना पर लिखी गई किताब पर बहुत बड़ा विवाद खड़ा हुआ। किताब में नेहरू-पटेल की आलोचना और जिन्ना की तारीफ करने के लिए उन्हें बीजेपी से निकाल दिया गया। हालांकि कुछ दिनों बाद ही लालकृष्ण आडवाणी के प्रयासों से उनकी भाजपा में वापसी हो गई।

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होने बाड़मेर सीट से उन्होने टिकट मांगा, लेकिन पार्टी ने उनके स्थान पर टिकट काँग्रेस से भाजपा में आए कर्नल सोना राम चौधरी को दिया गया। इसके बाद उन्होने इस सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव में उन्हे सफलता हासिल नहीं हुए। इस चुनाव के बाद से पार्टी ने उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगा कर उन्हें पार्टी से छः साल के लिए निष्काषित कर दिया।

क्यों कहे जाते थे अटल के हनुमान?
जसवंत सिंह जसोल को अटल बिहारी वाजपेयी का हनुमान कहा जाता था। ऐसा इसलिए क्योंकि 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण के बाद जब आर्थिक प्रतबंधों की समस्या से घिरा हुआ था, तब वाजपेयी ने दुनियाँ को जवाब देने के लिए जसवंत सिंह जसोल को ही आगे किया था।

कंधार विमान हाइजैक मामले में अहम भूमिका निभाई।
साल 1999 में जब जसवंत सिंह देश के विदेश मंत्री थे, तब नेपाल की राजधानी काठमांडू से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइन्स के विमान को आतंकवादियों ने अगवा कर लिया। आतंकी विमान को अगवा करके अफगानिस्तान के राजधानी कंधार ले गए। इसके बाद आतंकियों ने भारत में जेल में बंद तीन आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर, अहमद उमर सईद शेख और मौलाना मसूद अजहर को छोड़ने की मांग की थी। विमान में सवार यात्रियों को बचाने के लिए जसवंत सिंह ही इन तीनों आतंकवादियों को छोड़ने कंधार गए थे।

जसवंत सिंह जसोल को बीजेपी ने साल 2012 में उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार भी बनाया लेकिन यूपीए के उम्मीदवार हामिद अंसारी के खिलाफ उन्हें सफलता नही मिली। इसके अलावा जोधपुर में एम्स पहुंचाने और थार एक्स्प्रेस शुरू करवाने का श्रेय भी जसवंत सिंह को ही जाता हैं।

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