गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार मिलने का विरोध राष्ट्र के अपमान का प्रतीक : विहिप

Sabal SIngh Bhati
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नई दिल्ली, 19 जून ()। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार मिलने का विरोध कर रही कांग्रेस की आलोचना करते कहा है कि यह कांग्रेस की हताशा और राष्ट्रीय अपमान का प्रतीक है। विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कांग्रेस के विरोध की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें दुख है कि कांग्रेस अभी तक अपनी कोलोनियल मानसिकता से मुक्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह कितना घटिया बयान है कि यह कहा जाए कि ये सम्मान सावरकर व गोडसे का आदर है।

विहिप नेता ने कहा कि सावरकर का आदर तो सबसे बड़ा है ही, क्योंकि अमेरिका में उधम सिंह की हत्या पर निंदा प्रस्ताव का अकेले विरोध करने वाले, ऐसा भाषण लिखने वाले कि जज ने कहा कि इससे कागज जल क्यों नहीं गया। समुद्र में तैरकर जाने वाले और जब उनको 2 उम्रकैद मिली तो उनसे पूछा गया कि सावरकर तुम बाहर आने के लिए जिंदा रहोगे? तो उन्होंने उत्तर दिया था कि क्या मुझे 52 साल जेल में रखने के लिए आपका राज चलेगा! जेल में उन्होंने कितने कष्ट सहे। इसलिए, सावरकर का अपमान करना, देश का अपमान करना है।

आलोक कुमार ने कहा कि कांग्रेस द्वारा इसकी गोडसे से तुलना करना पूरे भारतीय आध्यात्मिक वांग्मय का अपमान करने के समान है। कांग्रेस आखिर कौन-सी मानसिकता से ग्रस्त हैं? चर्च की या मस्जिद की। उन्होंने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने के लिए सरकार को साधुवाद देते हुए कांग्रेस के बयान को देश के लिए हताशा और अपमानजनक बयान करार दिया।

आलोक कुमार ने कहा कि 100 वर्षो से गीता प्रेस ने नि:स्स्वार्थ व निष्ठा भाव से भारतीय सद-साहित्य, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक साहित्य बहुत साधारण मूल्यों पर जन सामान्य को उपलब्ध कराया है। भाषा, व्याकरण व शब्दावली की उत्कृष्टता, छपाई की उत्तमता, बिना विज्ञापन लिए पुस्तक व पत्र-पत्रिकाओं को जन जन तक पहुंचाने का काम उन्होंने किया है। उनको गांधी शांति पुरस्कार मिलना हनुमान प्रसाद पोद्दार व जयदयाल गोयनका जैसे लोगों की साधना की स्वीकार्यता ही है।

एसटीपी/

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