राजनीति

अकबरुद्दीन ओवैसी भड़काऊ भाषण से जुड़े 2 मामलों में बरी (लीड-1)

हैदराबाद, 13 अप्रैल ()। हैदराबाद की एक विशेष अदालत ने बुधवार को एआईएमआईएम विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को बड़ी राहत देते हुए उन्हें कथित भड़काऊ भाषण (हेट स्पीच) से जुड़े दो मामलों में बरी कर दिया।

सांसदों और विधायकों से संबंधित आपराधिक मामलों के ट्रायल के लिए विशेष सत्र न्यायाधीश ने उन्हें 2013 में निर्मल और निजामाबाद में उनके खिलाफ दर्ज दोनों मामलों में सभी आरोपों से बरी कर दिया।

उनके वकील अब्दुल अजीम ने नामपल्ली कोर्ट परिसर के बाहर संवाददाताओं से कहा कि मामला उचित संदेह से परे साबित नहीं हो सका, इसलिए अदालत ने अकबरुद्दीन ओवैसी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

उन्होंने कहा कि अदालत ने पाया कि उसके सामने पेश किए गए भाषणों के वीडियो और कैसेट असली नहीं थे। वकील ने कहा कि सबूत भाषण के टुकड़ों के रूप में प्रस्तुत किए गए थे, न कि निरंतर भाषण के रूप में.. और इसलिए, अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

तेलंगाना विधानसभा में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी, पार्टी अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई हैं।

औवेसी हैदराबाद में चंद्रयानगुट्टा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं और जब न्यायाधीश ने फैसला सुनाया तो वह अदालत में मौजूद थे, लेकिन चुपचाप परिसर से निकल गए।

एक ओर जहां अकबरुद्दीन ओवैसी ने अदालत के फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, वहीं उनके बड़े भाई ने ट्विटर पर अल्लाह का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, अल्हम्दुलिल्लाह अकबरुद्दीन ओवैसी को सांसद/विधायक विशेष अदालत ने उनके खिलाफ कथित घृणास्पद भाषणों के लिए दो आपराधिक मामलों में बरी कर दिया है। उनकी प्रार्थना और समर्थन के लिए सभी का आभार। अधिवक्ता अब्दुल अजीम और वरिष्ठ वकीलों को विशेष धन्यवाद, जिन्होंने अपनी बहुमूल्य सहायता प्रदान की।

अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ आठ और 22 दिसंबर, 2012 को निर्मल और निजामाबाद में उनके कथित घृणास्पद भाषणों के संबंध में आदिलाबाद और निजामाबाद जिलों के दो पुलिस स्टेशनों में दो मामले दर्ज किए गए थे।

सोशल नेटवर्किं ग साइट्स पर उनके भाषण वायरल होने के बाद एमआईएम नेता को 7 जनवरी 2013 को गिरफ्तार किया गया था। 40 दिन जेल में बिताने के बाद अदालत से जमानत मिलने के बाद वह रिहा हो गए थे।

निर्मल मामले में, उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 153-ए (धर्म के आधार पर दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्णकृत्य, जिसका इरादा अपमान करना हो) और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अदालत ने मामले में 33 गवाहों से पूछताछ की। भाषण की ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिग भी फोरेंसिक प्रयोगशाला को भेजी गई थी।

निजामाबाद मामले में, सीआईडी ने उन पर आईपीसी की धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) के अलावा अन्य कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। सीआईडी ने इस मामले में 41 गवाहों से पूछताछ की थी।

2016 में, पुलिस ने अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ आदिलाबाद जिले की एक अदालत में आरोपपत्र दायर किया था, जब राज्य सरकार ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी।

बाद में मामले को सांसदों और विधायकों से संबंधित मामलों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्थापित विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।

चूंकि राज्य के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में एआईएमआईएम नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, इसलिए तेलंगाना उच्च न्यायालय ने पिछले महीने एक ही मामले में कई प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान अकबरुद्दीन ओवैसी के वकील ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं हैं। पिछले हफ्ते कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था।

कोर्ट के फैसले के मद्देनजर पुलिस ने हैदराबाद के पुराना शहर इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।

पिछले साल, अकबरुद्दीन ओवैसी को एक विशेष अदालत ने 2004 में उनके खिलाफ दर्ज एक कथित भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में बरी कर दिया था।

विधायक ने 2004 में चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में कथित तौर पर सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाला भाषण दिया था। एक पुलिस अधिकारी की शिकायत पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

एकेके/एसजीके