अजमेर

दरगाह की सुरक्षा के लिए तैनात महिला कांस्टेबल बिछड़े बच्चों पर लुटा रही ममता

दरगाह सुरक्षा में ड्यूटी होने के बाद भी उन बिछड़े हुए बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा सम्भाल रही है। हाड़ी रानी बटालियन की महिला जवान है। यह बिछड़े हुए बच्चों पर अपनी ममता लूटकर उन्हें सम्भाल रही है।

दरगाह की सुरक्षा के लिए तैनात महिला कांस्टेबल बिछड़े बच्चों पर लुटा रही ममता

अजमेर. बिछड़े हुए बच्चों को अपने माँ बाप से मिलवाना, ड्यूटी करने के अलावा मानवता का एक अहम पहलू है। दरगाह सुरक्षा में ड्यूटी होने के बाद भी उन बिछड़े हुए बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा सम्भाल रही है। हाड़ी रानी बटालियन की महिला जवान है। यह बिछड़े हुए बच्चों पर अपनी ममता लूटकर उन्हें सम्भाल रही है। कभी चंद घंटों तो कभी 24 घंटे तक बच्चों को संभालना पड़ता है।

दरगाह सुरक्षा में तैनात है हाड़ी रानी:

इस बटालियन की महिला जवान जायरीन व पर्यटक के बच्चों की वे अपने बच्चों की तरह निगरानी करती है साथ ही पुलिस से तालमेल बैठा परिजन को तलाशने में मदद करती है। बीते करीब छह साल से अहम किरदार निभाने वाली हाड़ीरानी महिला बटालियन की टुकड़ी दरगाह के व्यस्ततम समय में दो पारियों की सुरक्षा की कमान बखुबी निभा रही है।

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इस धार्मिक स्थल पर ड्यूटी करने के साथ साथ महिला कॉन्स्टेबल मानवीय सरोकार निभाते हुए Dargah की भीड़ में बिछड़ने वाले बच्चों की भी देख रेख कर रही है। उन्हीं की बदौलत दरगाह में आने वाले जायरीन परिवार को बिछड़े बच्चे सकुशल मिल रहे हैं।

पुलिस के साथ तालमेल:

थानाप्रभारी दलबीरसिंह ने आईजी(अजमेर रेंज) एस. सेंगाथिर के आवाज दो अभियान में बच्चों की सुरक्षा की लिहाज से की भीड़ में बिछडऩे वालों का विशेष ख्याल रखा जाता है। दरगाह थाना पुलिस के साथ तालमेल करते हुए बटालियन की महिला जवान दरगाह कमेटी के सहयोग से ना केवल बच्चों को खाने-पीने का ख्याल रखती है बल्कि परिवार से मिलवाने का प्रयास किया जाता है।

यूं होता है प्रयास:

बिछड़े बच्चों को मिलाने के लिए वाट्सएप ग्रुप बना हुआ है। इसमें आरएसी की हाड़ीरानी बटालियन के साथ में अनुभवी हैडकांस्टेबल भी दरगाह प्रवेशद्वार पर सुरक्षा में तैनात है। वाट्सएप ग्रुप में बटालियन के साथ दरगाह थाना, दरगाह कमेटी, अंजुमन कमेटी और सीएलजी सदस्य शामिल हैं। ग्रुप में मैसेज व फोटो साझा किए जाते हैं। ताकि थाने, अंजुमन कमेटी व दरगाह कमेटी तक परिजन के पहुंचने पर बच्चे की तुरन्त पहचान हो सके। ज्यादा समय लगने पर बच्चों को दरगाह थाने में महिला डेस्क कर्मी रखती है।

दो पारी की जिम्मेदारी:

दरगाह सुरक्षा में तीन पारी में चलती है। इसमें सुबह ८ से शाम ४ बजे पहली व शाम ४ से रात १२ बजे तक दूसरी पारी में सुरक्षा की जिम्मेदारी आरएसी हाड़ीरानी महिला बटालियन के जिम्मे है। दोनों पारी में २५ जवान में से १० से १२ महिला जवान प्रवेशद्वार पर तैनात रहती हैं। इसके बाद रात १२ से सुबह ८ बजे तक पुलिस लाइन का जाप्ता तैनात रहता है।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer