जयपुर

बिजली प्रबंधन में फेल हुए ऊर्जा महकमे के मुखिया ऊर्जा मंत्री ने बिजली संकट का ठीकरा राजे सरकार पर फोड़ा

बिजली प्रबंधन में फेल हुए ऊर्जा महकमे के मुखिया ऊर्जा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने बिजली संकट का ठीकरा पिछली भाजपा सरकार पर फोड़ दिया है।

बिजली प्रबंधन में फेल हुए ऊर्जा महकमे के मुखिया ऊर्जा मंत्री ने बिजली संकट का ठीकरा राजे सरकार पर फोड़ा

जयपुर. राज्य में बिजली प्रबंधन में फेल हुए ऊर्जा महकमे के मुखिया ऊर्जा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने बिजली संकट का ठीकरा पिछली भाजपा सरकार पर फोड़ दिया है। उन्होंने बयान जारी कर कहा है कि पिछली भाजपा सरकार के विद्युत कुप्रबंधन और उस समय ऊर्जा विभाग की उदासीन कार्यप्रणाली का नतीजा सामने आ रहा है। इसके बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बिजली संकट के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बताया था।

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हालांकि, इस बीच लंबे समय से बंद पड़े कालीसिंध प्लांट की 600 मेगावाट एक यूनिट और छबड़ा थर्मल प्लांट की 250 मेगावाट की पहली यूनिट और 660 मेगावाट की पांचवीं इकाई से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया।

विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने ट्वीट किया, “कालीसिंध व सूरतगढ़ थर्मल प्लांट की यूनिटें बंद होने से 4 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. सरकार कोयला संकट को दूर कर बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार लाएं अन्यथा जनाक्रोश के लिए तैयार रहे.”

बिजली संकट पर ऊर्जा मंत्री बोले:

प्रदेश में उपजे बिजली संकट को लेकर ऊर्जा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने रविवार को कहा कि यह पिछली भाजपा सरकार के विद्युत कुप्रबंधन और उस समय ऊर्जा विभाग की उदासीन कार्यप्रणाली का नतीजा है। हालांकि इस बीच प्रदेश में छबड़ा परियोजना की 250 मेगावाट की प्रथम इकाई और 660 मेगावाट की पांचवीं इकाई से बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। इसके साथ ही कालीसिंध परियोजना की 600 मेगावॉट की एक इकाई से भी विद्युत उत्पादन शुरू कर दिया गया है।

डॉ.कल्ला कहा कि पूर्व सरकार के समय में ऊर्जा विभाग की ओर से प्रदेश में निर्माणाधीन छबड़ा एवं सूरतगढ़ सुपरक्रिटीकल (2 गुना 660 मेगावॉट प्रत्येक) की दो इकाईयों की समयबद्ध कमीशनिंग पर ध्यान नहीं दिया गया, इसकी वजह से इन इकाईयों के काम में अनावश्यक देरी हुई।

छबड़ा एवं सूरतगढ़ की दोनों इकाईयों से वर्ष 2016 में विद्युत उत्पादन प्रारंभ होना था, जो धीमी गति के कारण समय पर आरम्भ नहीं हो सका। केवल छबड़ा स्थित 660 मेगावॉट की एक इकाई का कार्य ही 2018 में जाकर शुरू हो सका। पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में 2 गुना 660 की सुपर क्रिटीकल की दोनों परियोजनाओं (कुल 2640 मेगावाट) पर कोई ध्यान नहीं दिया।

कई गांव- कस्बों में अघौषित कटौती

उल्लेखनीय है कि कोयले की कमी से चलते पूर्ण रूप से बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है। वहीं इसी के चलते अब स्थिति यह आ गई है कि प्रदेश के 4 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन प्रभावित हो गया है। वहीं इसी बजह से जिला मुख्यालयोंं को छोड़कर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में अघोषित कटौती लगातार जारी है। कई जिलों के गांव और छोटे कस्बों में 12 घंटे से भी ज्यादा बिजली की कटौती हो रही है।

इस वजह से उत्पन्न हुआ बिजली संकट:

मीडिया रिपोटर्स के अनुसार प्रदेश के तीनों डिस्कॉम जयपुर, अजमेर और जोधपुर कोल इंडिया और पीकेसीएल से कोयला तो ले रहे हैं। लेकिन पूरा भुगतान नहीं कर रहे हैं। लिहाजा कोयला सप्लाई भी बाधित होना जारी है। मिली जानकारी के अनुसार विद्युत उत्पादन निगम को दोनों कंपनियां को 1800 करोड़ रुपए का भुगतान करना है। वहीं यह भी बताया गया है कि बिजली खपत और डिमांड बढ़ने का असर भी बिजली संकट उत्पन्न किए हुए हैं।

उधारी चुकाने में फेल, यही बताना भूली सरकार:

कोयला कमी से उपजे बिजली संकट के पीछे कोयला सप्लाई कंपनियों की करोड़ों रुपए की बकाया राशि नहीं चुकाना भी मुख्य कारण है। ऊर्जा मंत्री ने अपने बयान में इसका जिक्र ही नहीं किया। 2700 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि का समय पर भुगतान नहीं किया, जिसके बाद सप्लाई कंपनियों ने राज्य उत्पादन निगम और ऊर्जा महकमे को आंख दिखाई। ऊर्जा विकास निगम ने दो दिन पहले ही कोल इंडिया और पीकेसीएल को करीब 900 करोड़ रुपए का भुगतान किया। इसके बावजूद अब भी 800 करोड़ से ज्यादा रोकड़ बकाया है।

सौर व पवन ऊर्जा पर निर्भरता:

ऊर्जा विभाग ने 1430 मेगावॉट की सौर ऊर्जा 2.50 रुपए प्रति यूनिट तथा 1070 मेगावॉट की सौर ऊर्जा 2 रुपए प्रति यूनिट और 1200 मेगावॉट पवन ऊर्जा 2.77 रुपए प्रति यूनिट में अनुबन्ध किया गया है। इसके अतिरिक्त 1785 मेगावॉट सौर ऊर्जा की निविदा एस.ई.सी.आई के माध्यम से प्रक्रियाधीन है तथा 12 से 18 माह में विद्युत आपूर्ति प्राप्त हो जाएगी।

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer