जयपुर

Dengue: डेंगू के प्रकोप ने जयपुर में तोड़ा रिकॉर्ड, अगस्त माह में मिले 100 से ज्यादा केस

Dengue: चिकित्सा एवं विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले डेंगू (Dengue) के आंकड़ों में एक भी मौत नहीं है, जबकि एसएमएस में अब तक डेंगू से चार मौतें हो चुकी हैं।

Dengue: डेंगू के प्रकोप ने जयपुर में तोड़ा रिकॉर्ड, अगस्त माह में मिले 100 से ज्यादा केस

जयपुर. डेंगू (Dengue) ने चिकित्सा विभाग की नींद उड़ा दी है। जयपुर में सिर्फ अगस्त में ही डेंगू (Dengue) के 110 मामले मिले हैं, जो इस साल सबसे ज्यादा है। पिछले साल इसी माह में एडीज एजिप्टाई मच्छर के काटने से फैलने वाले डेंगू के मात्र 41 केस पाए गए थे। चिकित्सा एवं विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले डेंगू (Dengue) के आंकड़ों में एक भी मौत नहीं है, जबकि एसएमएस में अब तक डेंगू से चार मौतें हो चुकी हैं।

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ऐसे में साफ जाहिर है कि विभाग मौत के आंकड़ों को छिपाने में लगा है। चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त निदेशक (ग्रामीण स्वास्थ्य) डॉ. रवि प्रकाश शर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार एलाइजा जांच को ही कन्फर्म माना जाता है। हमारे यहां पर अस्पतालों से आने वाले प्रत्येक केस की रिपोर्टिंग की जाती है। प्रदेश में डेंगू से अब तक का आंकड़ा एक हजार के पार हो गया है।

जयपुर पहले नंबर पर : डेंगू के 412 मामले मिले

कहां-कहां है जांच सुविधा:

शहर में एसएमएस अस्पताल, कावंटिया, सेटेलाइट सेठी कॉलोनी, सेटेलाइट बनीपार्क, जेके लोन, जयपुरिया, आरयूएचएस अस्पताल में डेंगू की जांच के लिए एलाइजा जांच सुविधा उपलब्ध है

एक्सपर्ट का कहना है:

एसएमएस अस्पताल के मेडिसन के सीनियर प्रोफेसर डॉ. पुनीत सक्सेना और आरयूएचएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अजीत सिंह का कहना है कि अचानक से डेंगू (Dengue) का ग्राफ बढ़ने का पहला कारण बारिश का फ्रेश वाटर कलेक्शन जिसमें एडीज एजिप्टाई का लार्वा पनपकर मच्छर बनने पर किसी व्यक्ति को काटने पर डेंगू फैला सकता है। दूसरा कूलर, गमले, टायर और जालियों में पानी के एकत्र होने तथा तीसरा कारण डेंगू वायरस के चार प्रकार जो उसकी रोग के फैलने की क्षमता और तीव्रता पर निर्भर करता है।

वायरल फीवर भी अलग तरह का, खतरनाक भी:

डॉक्टरों के अनुसार बदलते मौसम का असर दिख रहा है और वायरल फीवर खतरनाक भी होने लगा है। तीन से चार दिन तक चलने वाला फीवर अब ज्यादा दिन का हो गया है। गले में खरास, खांसी जैले लक्षण भी दिख रहे हैं। ये ही नहीं मरीजों को ठीक होने में ज्यादा समय लग रहा है। अगस्त में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा थी।

डॉक्टरर्स के अनुसार:

कोरोना के साथ-साथ मौसमी बीमारियों का भी सर्वे करवाया जा रहा है। मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए टेमीफोस टैबलेट डाली जा रही है। एसएमएस अस्पताल वालों की ओर से हमें डेंगू से होने वाली मौत की जानकारी नहीं मिली है।

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer