जयपुर

रेगिस्तान जैसा अहसास अरावली की पहाड़ियों में, जानिए जयपुर के डेजर्ट पार्क के बारे में

रेगिस्तान थार. पार्क में वनस्पति विकसित करने के लिए जैसलमेर से बीज और रेत लाई गई है। कुल 18 देशी प्रजातियों के पेड़ लगाए गए हैं, ”अधिकारी ने कहा।

रेगिस्तान जैसा अहसास अरावली की पहाड़ियों में, जानिए जयपुर के डेजर्ट पार्क के बारे में

जयपुर. शहर के विद्याधर नगर में स्थित स्वर्ण जयन्ती गार्डन के समीप किशनबाग गांव में नाहरगढ की तलहटी में प्राकृृतिक रूप से बने रेत के टीलों के रूप में अनुपयोगी पड़ी जेडीए की भूमि, जो कि तीन तरफ से कच्ची बस्तियों से भी घिरे होने के कारण अतिक्रमण होती जा रही थी,
जयपुर के अमानीशाह नाला (द्रव्यवती नदी) के स्टार्टिंग पॉइंट के पास खाली पड़ी जमीन पर किशनबाग पार्क बनकर तैयार हो गया है। 4 साल में बनकर तैयार हुए किशनबाग पार्क को जल्द ही लोगों के लिए खोला जाएगा।

यह भी पढ़े, जड़ से काट देने के बावजूद भी जिंदा रहा पेड़, अन्य पेड़ बना उसका सहारा, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा फ़ोटो

विद्याधर नगर और शास्त्री नगर के पास बने इस पार्क को जैसलमेर के डेजर्ट पार्क की थीम पर तैयार किया गया है। नाहरगढ़ की पहाड़ियों और स्वर्ण जयंती पार्क के पास बना यह डेजर्ट पार्क करीब 64 हेक्टेयर जमीन पर बनाया गया है। इस पार्क को अगले महीने से लोगों के लिए खोला जा सकता है। पार्क में आने वालों को कुछ एंट्री चार्ज भी देना पड़ेगा, ये कितना होगा अभी तय नहीं हुआ है।

इस बाग को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य नाहरगढ़ के मौजूद रेतीले टीलों को स्थाई कर वहाँ पर पाये जाने वाले जीव जन्तुओं के प्राकृतिक वास को सुरक्षित कर संधारित करना एवं रेगिस्तान में प्राकृृतिक रूप से पनपने वाली वनस्पती की प्रजातियों को विकसित कर जयपुर में एक सम्पूर्ण रेगिस्थान क्षेत्र का स्वरूप विकसित कर संधारित करना है। किशनबाग परियोजना पर कुल लगभग 1141.21 लाख रूपये व्यय किये जा चुके है।

अरावली की पहाड़ियों के नीचे (नाहरगढ़ के पास) विकसित किए इस डेजर्ट पार्क में जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, बीकानेर और जोधपुर क्षेत्र में उगने वाली घास, पेड़-पौधे लगाए गए हैं। साथ ही यहां बने बड़े-बड़े मिट्‌टी के टीले पर इन वनस्पतियों को उगाया गया है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को जैसलमेर में बने डेजर्ट पार्क का जैसा अहसास हो।

पार्क में 7 प्रजाति की घास लगाई है:

इस पार्क में 7 प्रजाति की घास लगाई गई है, जो राजस्थान के जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर, जालौर क्षेत्र में उगती है। इसमें लापडा, लाम्प, धामण, चिंकी, मकडो, डाब, करड और सेवण है। इसके अलावा खैर, रोंज, कुमठा, अकोल, धोंक, खेजडी, कैर, गूंदा, लसोडा, गूलर, फालसा, रोहिडा, पीपल, अडूसा, आंवल, खींप आदि प्रजाति के पेड़-पौधे लगाए गए हैं।

पशु-पक्षियों के लिए बनाई वॉटर बॉडी:

यह पार्क नाहरगढ़ पहाड़ी की तलहटी क्षेत्र विकसित किया गया है, इस कारण यहां बड़ी संख्या में तीतर, चील, खरगोश जैसे जीव भी आते-जाते हैं। इसे देखते हुए जेडीए ने यहां एक वॉटर बॉडी बनाई है। इस वॉटर बॉडी में पानी पीने के लिए ये पशु-पक्षी जब आएंगे तो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र होगा। यहां आने वाले पर्यटकों के बैठने के लिए सरकंडों की टहनियों से बना छप्पर तैयार किया गया है। साथ ही पार्क में 600 मी. लंबा पत्थर और लकड़ी का वॉक-वे है।

एक वन अधिकारी ने कहा, “पार्क में ढोक आवास, ग्रेनाइट आवास, नर्सरी, चट्टान और जीवाश्म प्रदर्शनी कुछ नाम हैं।”पार्क विद्याधर नगर क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो मुख्य शहर से लगभग 15 किमी दूर है। यह क्षेत्र एक नया मील का पत्थर पाने के लिए पूरी तरह तैयार है क्योंकि यह शहर के पर्यावरण पर्यटन के लिए एक अतिरिक्त सुविधा होगी।

स्थलाकृति को परेशान किए बिना क्षेत्र का विकास किया गया है। पार्क राज्य की राजधानी की परिधि में एक अद्वितीय रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतिनिधित्व करेगा। “ पार्क में प्राकृतिक वनस्पति विकसित की है जैसे” थार रेगिस्तान. पार्क में वनस्पति विकसित करने के लिए जैसलमेर से बीज और रेत लाई गई है। कुल 18 देशी प्रजातियों के पेड़ लगाए गए हैं, ”अधिकारी ने कहा।

एक बार खुलने के बाद, निवासी दूर की यात्रा किए बिना गुलाबी शहर की परिधि में रेगिस्तान की शांति का आनंद ले सकते हैं। शहर की पहली डेजर्ट पार्क परियोजना किशनबाग अगस्त 2016 में शुरू की गई थी।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer