जयपुर

बांधो में नही आया पर्याप्त जल, पिछले साल से कमजोर पड़ा मानसून

बांधों में जरूरत के मुताबिक पानी की आवक नहीं होती है तो निश्चित तौर पर राशनिंग (कटौती) करनी पड़ सकती है।मानसून ने पहला ब्रेक जुलाई में और दूसरा अगस्त के पहले पखवाड़े में लिया।

बांधो में नही आया पर्याप्त जल, पिछले साल से कमजोर पड़ा मानसून

जयपुर. इस साल कई राज्‍यों में अभी तक उतनी भरपूर बारिश नहीं हुई है जितनी कि जरूरत है। कुछ क्षेत्रों में अभी तक अतिवृष्टि हुई है तो कहीं अभी भी सामान्‍य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है।

देश भर में मानसून सामान्य से कम ही रहेगा। अगस्त समाप्त होने को है और सितंबर में भी अधिक बारिश के आसार नहीं हैं। स्काईमेट वेदर के नए आकलन के अनुसार इसके 94 फीसद ही रहने की संभावना है।

दिल्ली-एनसीआर में मानसून की बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है। मानसून ने पहला ब्रेक जुलाई में और दूसरा अगस्त के पहले पखवाड़े में लिया। मानसून की कमजोर स्थिति के कारण देश में सीजनल बारिश की कमी अगस्त के मध्य तक नौ फीसद हो गई।

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प्रदेश के जोधपुर संभाग की हालत लगातार खराब हो रही है, यहां बांधो में मात्र 4.7 प्रतिशत पानी की बचा है। उधर, पेयजल आपूर्ति से जुड़े बांधों में जरूरत के मुताबिक पानी की आवक नहीं होती है तो निश्चित तौर पर राशनिंग (कटौती) करनी पड़ सकती है।

प्रदेश में पहले दौर के मानसून ने झमाझम की थी और लग रहा था कि दो साल से सूखे पड़े बांधो में भी पानी की आवक होकर लबालब हो जाएंगे। कुछ हद तक ऐसा हुआ भी, लेकिन उन्हीं बांधो में पानी की आवक लगातार बढ़ती गई, जिनमें पहले से पानी था।

पहला दौर निकला तो जल संसाधन विभाग ने जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर संभाग के आंकड़े जारी किए, जिनमें केवल जोधपुर ही पिछले मानसून से पीछे चल रहा था और माना जाता रहा कि दूसरे दौर की बारिश में वह भी आगे निकल जाएगा।

लेकिन दूसरा दौर खत्म हो चुका है और अब जोधपुर और उदयपुर पीछे हो गए, जबकि जयपुर संभाग के बांधों में अब तक हुई बारिश पिछले साल के मुकाबले बराबरी पर आ खड़ी हुई है। आगे बारिश नहीं होगी तो जयपुर संभाग के बांधों का जलस्तर भी लगातार घटता चला जाएगा।

तो घटानी पड़ेगी बीसलपुर से जलापूर्ति:

जयपुर और अजमेर की जलापूर्ति बीसलपुर बांध पर टीकी हुई है और इस मानसून अभी तक बांध में पानी की आवक धीमी गति से हो रही है। जलदाय विभाग 10 सितंबर तक बांध में पानी की स्थिति का आंकलन करने के बाद पानी की राशनिंग करने की योजना बनाएगा।

बताया जा रहा है कि बांध में पानी की आवक नहीं बढ़ती है तो सर्दियों में 30 से 40 प्रतिशत यानि अक्टूबर से मार्च तक जमकर कटौती की जाएगी। मार्च के बाद 20 प्रतिशत तक कटौती कर जलापूर्ति की जाएगी।

हालाकि पिछले साल भी बांध में अक्टूबर तक पानी की आवक हुई थी और इस साल भी उम्मीद है कि सितंबर में पानी की आवक होगी। जलदाय विभाग की माने तो बांध का जलस्तर वर्तमान में 310.74 आरएल मीटर है, जो इस मानसून 310.82 मीटर तक पहुंचा था।

राजस्थान के बड़े बांधो की वर्तमान स्थिति
प्रदेश के बड़े बांधों की बात की जाए तो कुल भराव क्षमता 12626.32 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमक्यूएम) है।

जबकि वर्तमान जलस्तर 7305.98 एमक्यूएम है, जो कुल भराव का 57.86 प्रतिशत है। पिछले साल अब तक की बारिश की बात की जाए तो कुल भराव क्षमता के मुकाबले 7445.44 एमक्यूएम था जो कुल भराव क्षमता का 58.97 प्रतिशत था।

एक पखवाड़े में बदला आंकड़ा:

राजस्थान में इस मानसून की बात की जाए तो 9 अगस्त तक प्रदेश के बड़े बांधों में पिछले साल के मुकाबले 12.73 प्रतिशत पानी ज्यादा था। उस दौरान प्रदेश के बड़े बांधों में कुल भराव का 54.83 प्रतिशत पानी था,

जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 42.10 प्रतिशत पर था। एक पखवाड़े के दौरान की आंकड़ा बदल गया और 24 अगस्त को जलस्तर की स्थिति 1.11 प्रतिशत कम हो गया है।

अब तक खाली हैं 279 बांध:

राजस्थान में हुई झमाझम बारिश के बाद प्रदेश में सूखे पड़े करीब 150 बांधों में पानी की आवक हुई है। लेकिन अफसोस इस बात का भी है कि अब तक 297 बांध सूखे पड़े हैं। कुल बांधों की बात करें तो प्रदेश में 4.25 एमक्यूएम से अधिक और कम क्षमता के कुल 727 बांध हैं।

अब आगे यह है संभावना:

अब अगर मानसून के भौगोलिक प्रभाव पर नजर डालें तो गुजरात, राजस्थान, ओडिशा, केरल और पूर्वोत्तर भारत में कम बारिश होने की संभावना है। गुजरात और पश्चिमी राजस्थान में अभी भी सूखे की आशंका बनी हुई है।

हालांकि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर के वर्षा आधारित क्षेत्रों में बारिश का आंकड़ा पर्याप्त रहा है। इन्हीं सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्काईमेट ने मानसून 2021 के पूर्वानुमान को संशोधित कर एलपीए को 94 फीसद कर दिया है।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer