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गेंगस्टर राजू फौजी को जोधपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार. बनाड़ क्षेत्र मे पुलिस से हुई थी मुठभेड़.

जोधपुर पुलिस से मुठभेड़ मे घायल हुए राजू फौजी को किया गिरफ्तार. फौजी ने दो कांस्टेबल का मर्डर भी था, और उसके बाद जोधपुर के हिस्ट्रीशीटर कैलाश मांजू की सुपारी ली थी.

जोधपुर । गेंगस्टर राजू फौजी (Gengster Raju Fouji) पुलिस मुठभेड़ मे पकड़ा गया. फौजी ने अपनी दहशत कायम रखने व पुलिस पर अपना दाब दबा बनाए रखने के लिए राजस्थान (Rajasthan) के भीलवाड़ा (Bhilwara) में दो कांस्टेबल का मर्डर (Two Constables Murder) किया था। उसके साथियों ने यह भी खुलासा किया था कि राजू फौजी (Raju Fouji) ने कांस्टेबल की हत्या करने के बाद जोधपुर के हिस्ट्रीशीटर कैलाश मांजू (historisheeter Kailash Manju) की सुपारी ली थी. इसके बाद राजू फौजी (Raju Fauji) की तलाश में राज्य की पुलिस ने जगह जगह तलाश करती रही, आज सुबह पुलिस को राजू फौजी (Raju Fouji) के जोधपुर मे छिपे होने की जानकारी मिली थी.

राजू फौजी मोबाइल फोन नही रखता है और ना ही कोई भी डिजिटल गैजेट का प्रयोग करता है. उसे किसी से बात भी करनी होती है तो वह अपने किसी परिचित का फोन लेकर कॉल करता है.

CRPF में नौकरी लगी तो छोड़ आया, दो साल सब्जी का थैला भी लगाया।

राजू विश्नोई उर्फ राजू फौजी जोधपुर से सटे बाड़मेर जिले के डोली गांव का है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी मजबूत कद-काठी की बदौलत राजू CRPF (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) में भर्ती हो गया। यहां उसकी पोस्टिंग नक्सलाइज्ड एरिया में हो गई। उन दिनों में राजू फौजी के साथ रहे लोग बताते है कि उसे ये नौकरी पसंद नहीं थी और वो छुट्टियां लेकर गांव आ गया और CRPF कैंप नहीं गया। थोड़े दिन तो वो गांव में ही रहा लेकिन बाद में बेरोजगारी दूर करने के लिए जोधपुर चला आया और यहां भगत की कोठी एरिया में सब्जी का ठेला लगा लिया। लेकिन CRPF में की गई नौकरी के चलते राजू को तब तक फौजी सरनेम मिल गया था।

भाभी के प्रेमी के दिनदहाड़े नाक-कान काटकर शुरू की दहशत।

पुलिस रिकॉर्ड से मिली जानकारी के अनुसार साल 2012 में फौजी की भाभी एक ट्रक ड्राइवर के साथ भाग गई थी। इससे वो नाराज था। उसने गुस्से में आकर बिलाड़ा में भावी फाटक पर जाकर दिनदहाड़े भाभी के प्रेमी की जमकर पिटाई कर दी और उसके नाक-कान काट दिए। इससे इलाके में राजू फौजी की दहशत शुरू हो गई। हांलाकि इससे पहले भी उस पर छोटी-मोटी मारपीट के मामले दर्ज थे। इस कांड के बाद राजू फौजी ने भाई के ससुराल पक्ष के लोगों का अपहरण और उनकी संगीन पिटाई जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया।

हथियारों के दम पर डोली टोल नाके को लुटा।

राजू फौजी ने 19 मई 2018 को बाड़मेर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में तकरीबन 35 बदमाशों के साथ हथियारों के दम पर डोली टोल नाके को लुटा था। इस दौरान वहां खौफ का ये आलम था कि टोल नाके के कर्मचारी इससे डरकर पैदल ही भाग छूटे थे। धीरे-धीरे उसकी दहशत ऐसी फैली की उसने बाड़मेर इलाके में कई व्यापारियों और कंपनियों को डरा-धमकाकर वसूली शुरू कर दी। इसी दौरान उसका सम्पर्क कुख्यात तस्कर खरताराम से हो गया और वो खरताराम की गैंग से तस्करी की दुनिया में भी आ गया।

खरताराम के सुसाइड के बाद बना तस्करी गैंग का सुप्रीमो।

तकरीबन 3 साल पहले पाली के भीमाणा गांव की पहाड़ियों में पुलिस कार्रवाई के दौरान खरताराम चारों तरफ से घिर गया था। उसके और पुलिस के बीच जमकर मुठभेड़ भी हुई। पुलिस ने घेराबंदी की और बचने का कोई रास्ता नहीं मिला तो खरताराम ने खुद को गोली मार ली। खरताराम की मौत के बाद राजू फौजी ने उसकी तस्कर गैंग का टेक ओवर कर लिया। धीरे-धीरे उसने गैंग का विस्तार बाड़मेर से बाहर जोधपुर, नागौर बीकानेर, पाली, जैसलमेर, चित्तौड़, भीलवाड़ा, जालोर और सिरोही तक कर लिया। स्मैक और अफीम की तस्करी के दौरान फौजी ने सैंकड़ों बार हथियारों के दम पर पुलिस नाकाबंदी तोड़ी। हाल ऐसे रहे कि ज्यादातर तो बदनामी के डर से मामले ही दर्ज नहीं हुए।

दो कॉन्स्टेबल की हत्या के बाद साथियों से बोला- मरेंगे या मारेंगे।

अब तक पकडे गए फौजी के साथियों से हुई पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि भीलवाड़ा में दो पुलिसकर्मियों के हत्या के बाद उसे जरा भी अफ़सोस नहीं था। उसने तो बाकायदा सभी साथियों से कहा था कि अब मरेंगे या मारेंगे। उसका ये एटीट्यूड देखकर गैंग के कई साथी डर भी गए और चुपके से उसे छोड़कर सरेंडर के रास्ते देखने लग गए। अब तक उसकी गैंग के तकरीबन 12 कुख्यात बदमाश पुलिस की पकड़ में आ चुके है।

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