राजस्थान

कोयले की कमी के कारण राजस्थान में बिजली संकट गहराया,दो प्रमुख कालीसिंध और सूरतगढ़ थर्मल प्लांट की सभी यूनिट बंद

कोयले की खरीद का करीब 600 करोड़ रुपए नॉदर्न कोल लिंकेज और साउथ ईस्टर्न कोल लिंकेज को देना बकाया है। इसी तरह निजी कंपनी अडानी पावर लिमिटेड के 3000 करोड़ रुपये देने भी बकाया हैं।

कोयले की कमी के कारण राजस्थान में बिजली संकट गहराया,दो प्रमुख कालीसिंध और सूरतगढ़ थर्मल प्लांट की सभी यूनिट बंद

कोयले की कमी के कारण राजस्थान में बिजली संकट गहरा गया है। राज्य की दो प्रमुख कालीसिंध और सूरतगढ़ थर्मल प्लांट की सभी यूनिट बंद हैं। कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन गड़बड़ा गया है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली की कटौती शुरू की गई है। बिजली की कमी इस हद तक बढ़ गई कि सरकार 18 रुपये प्रति यूनिट तक महंगी बिजली निजी क्षेत्र से खरीद रही है। बिजली संकट के बाद ऊर्जा मंत्री डा. बीडी कल्ला और सचिव दिनेश कुमार दिल्ली पहुंचे हैं। दोनों केंद्रीय कोयला मंत्री और अधिकारियों के साथ मुलाकात करने में जुटे हैं। मुख्य सचिव निरंजन आर्य टेलीफोन के माध्यम से केंद्र सरकार के अधिकारियों के संपर्क में है।

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इसलिए रोकी सप्लाई:

कोयले की खरीद का करीब 600 करोड़ रुपए नॉदर्न कोल लिंकेज और साउथ ईस्टर्न कोल लिंकेज को देना बकाया है। इसी तरह निजी कंपनी अडानी पावर लिमिटेड के 3000 करोड़ रुपये देने भी बकाया हैं। इस तरह 3600 करोड़ रुपए बकाया होने के कारण एक-एक कर सभी यूनिट का उत्पादन बंद करना पड़ गया है। थर्मल में इन 6 इकाइयों के अलावा 2 सुपरक्रिटिकल यूनिट्स भी हैं। सुपर क्रिटीकल इकाइयों में 7वीं यूनिट में ही उत्पादन हो रहा है, 8वीं इकाई में अब तक व्यवसायिक उत्पादन शुरू ही नहीं हुआ है।

छत्तीसगढ़ की कोयला खदान मालिकों का राज्य विद्युत उत्पादन निगम का 350 करोड़ रुपये बकाया है। इस कारण उन्होंने कोयला भेजना बंद कर दिया। इसी तरह सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की इकाई में भी कोयला नहीं मिल रहा है। सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन पर सरकारी कोयला कंपनियों के साथ ही खदान संचालकों का पैसा बकाया होने के कारण उन्होंने भी कोयला भेजना बंद कर दिया। इस कारण पांच दिन से यह इकाई भी बंद है। बिजली संकट के कारण सरकार निजी क्षेत्र से 18 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद रही है।

25 अगस्त से ठप है उत्पादन:

जानकारी के मुताबिक, 25 अगस्त से सभी 6 इकाइयां बंद पड़ी हैं। कोयले की कमी से 250 मेगावाट उत्पादन क्षमता की थर्मल की सभी यूनिट बंद होने से करीब 1500 मेगावाट बिजली यहां भी नहीं बन पा रही है । थर्मल में प्रतिदिन 250 मेगावाट की प्रत्येक इकाई में 3000 मीट्रिक टन कोयला चाहिए, जबकि सुपर क्रिटिकल इकाइयों के लिए करीब 7 हजार मीट्रिक टन कोयले की ज़रूरत है। थर्मल की सभी इकाइयों से पूरा उत्पादन होने के लिए 30 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा कोयले की जरूरत पड़ती है, लेकिन कोल कंपनियों के सप्लाई रोकने से उत्पादन ठप हो गया है।

महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही:

हालात इतने खराब हो चले हैं कि 18 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने के लिए अधिकतम खरीद दर की सीलिंग भी हटानी पड़ी है। इतनी महंगी दरों पर बिजली खरीदने के बावजूद राजस्थान को एक्सचेंज से मांग की केवल 20 फीसदी ही बिजली मिल पा रही है। पूर्व में 6.50 रुपए प्रति यूनिट तक की सीलिंग थी। कुछ महीने पहले 4 रुपए के करीब ही प्रति यूनिट बिजली की खरीद हो रही थी। कई गुना महंगी दरों पर बिजली खरीदना प्रदेश में और आर्थिक परेशानी बढ़ाने वाली स्थिति है।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer