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कृषि कानूनों की वापसी मोदी सरकार के घमण्ड की हार लोकतंत्र की जीत :मुख्यमंत्री गहलोत

प्रदेश के मुखिया ने कहा कि तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा लोकतंत्र की जीत और मोदी सरकार के घमण्ड की हार है।

जयपुर।  प्रधानमंत्री ने शुक्रवार सुबह देश के नाम संबोधन में एलान किया कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेगी। संसद के सत्र में इन कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। पीएम के एलान पर  के सीएम ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा लोकतंत्र की जीत और मोदी सरकार के अहंकार की हार है। यह पिछले एक साल से आंदोलनरत किसानों के धैर्य की जीत है। देश कभी नहीं भूल सकता कि मोदी सरकार की अदूरदर्शिता एवं अभिमान के कारण सैकड़ों किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। मैं किसान आंदोलन में शहादत देने वाले सभी किसानों को नमन करता हूं। यह उनके बलिदान की जीत है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा की है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा शून्य बजट खेती पर सिफारिश के लिए बहुपक्षीय समिति बनाने का भी एलान किया है। मोदी ने देव दीपावली और गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि वह नेक नीयत से किसानों की भलाई के लिए ये तीनों कृषि कानून लाए थे। इसके लिए लंबे समय से मांग हो रही थी। उन्होंने कहा कि कुछ किसान, भले ही उनकी संख्या कम हो, उन्होंने इसका विरोध किया। संभवत: यह हमारी तपस्या की कमी थी कि हम उन्हें इन तीनों कानूनों के बारे में समझा नहीं सके।

मोदी ने कहा कि इन तीनों कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया संसद के इसी सत्र में की जाएगी। संसद का सत्र 29 नवंबर से शुरू हो रहा है। उन्होंने किसानों से आंदोलन छोड़कर अपने-अपने घर वापस जाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि एमएसपी पर चुनाव के लिए समिति में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा राज्य सरकारों, किसान संगठनों, कृषि विशेषज्ञ तथा कृषि अर्थशास्त्री रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं किसानों और ग्रामीण लोगों के लिए पहले से अधिक मेहनत के साथ काम करता रहूंगा। गौरतलब है कि कृषि मंडी व्यवस्था में सुधार, अनुबंध की खेती में किसानों के हितों की रक्षा के उपाय पर केंद्रीय तीनों कृषि कानूनों को लेकर कई किसान संगठन विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।