राजस्थान

संजीवनी सोसायटी जालसाजी : जब्ती के डर से फरार आरोपी बेच रहे है चल सम्पति

संजीवनी जालसाजी मामले में फरार आरोपियों ने एक माह में 46 भूखंड, फ्लैट और दुकानें दूसरे लोगों को बेचीं

जयपुर. संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी जालसाजी मामले में फरार आरोपी संपति जब्त होने के डर से चल संपति को दुसरे लोगों को बेच रहे है.

फर्जीवाड़े के शिकार निवेशकों ने एसओजी को रिपोर्ट देकर आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार ने निवेशकों को उनकी रकम लौटाने के लिए द बेनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम एक्ट 2019 को मंजूरी दे जांच कमेटी का गठन किया गया है.

लेकिन कानून के तहत कार्रवाई कमेटी के कार्रवाई से पहले ही सोसायटी के फरार पदाधिकारी सक्रिय हो गए हैं और इन संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने का खेल भी शुरू हो गया है,

सोसायटी के पीडि़त निवेशकों ने रजिस्ट्रार नीरज के पवन को इस संबंध में शिकायत के साथ 46 भूखंड, फ्लैट और दुकानों की सूची भी दी है, जिनको गत एक माह में जोधपुर में बेचान कर दिया है.

बेचीं गई सम्पति में से 31 भूखंड, फ्लैट और दुकानें की एक ही व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री हुई है, जबकि दो भूखंड एक व्यक्ति ने और अन्य ने एक-एक सम्पत्ति की रजिस्ट्री करवाई है..

पीडि़त निवेशकों ने बताया कि रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने उक्त बेचीं गई सम्पत्तियों की जांच करवाने का आश्वासन दिया है. उधर, ईडी भी संजीवनी सोसायटी की सम्पत्तियों की जानकारी जुटाने में सक्रिय नजर आ रही है .

फरार पदाधिकारी करवा रहे सौदा

पीडि़त निवेशकों ने एसओजी से मिल कर आरोप लगाया है कि फरार चल रहे पदाधिकारी ही सम्पत्तियों को बेचान कर खुर्द-बुर्द कर रहे हैं.

इसलिए संजीवनी सोसायटी जालसाजी मामले के फरार चल रहे मुख्य आरोपी विक्रम सिंह की पत्नी सहित करीब पांच छह  पदाधिकारियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग भी की है.

एसओजी ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी में कई वर्षों से चल रहे फर्जीवाड़े को उजागर कर इसके संस्थापक विक्रम सिंह सहित पांच पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया था.

वर्ष 2007 में संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की बाड़मेर से शुरुआत हुई थी.राजस्थान में संजीवनी की 211 एवं गुजरात में 26 शाखाएं थी. दोनों राज्यों में कुल 237 शाखाएं खोली गईं.

एसओजी ने 17 सितम्बर 2019 को संजीवनी क्रेडिट काे-ऑपरेटिव सोसायटी लि. में 1100 करोड़ के घोटाले के मामले में मुख्य आरोपी विक्रम सिंह पुत्र छुगसिंह निवासी इंद्रोई रामसर बाड़मेर को गिरफ्तार किया था.

एसओजी ने गिरफ्तारी के साथ आईपीसी की धारा 420, 406, 409, 467, 468, 471, 477ए, 120बी एवं 65 आईटी एक्ट में मामला दर्ज किया था.

कूटरचित हस्ताक्षरों से बांट दिया था ऋण

एसओजी की जांच में सामने आया था कि जिन व्यक्तियों के नाम ऋण स्वीकृत किया गया है, जांच में उन व्यक्तियों के कूट रचित हस्ताक्षर सामने आए थे.

बाड़मेर की पहली क्रेडिट सोसायटी थी संजीवनी

बाड़मेर में पहली क्रेडिट सोसायटी के रूप में संजीवनी वर्ष 2007 में शुरू हुई थी. इसी दौर में बाड़मेर जिले में केयर्न एनर्जी ने तेल-गैस, जिंदल ग्रुप ने राज वेस्ट पावर के लिए लिग्नाइट में निवेश किया था.

तेल-गैस कंपनियों के बाड़मेर में निवेश और केयर्न एनर्जी व् राज वेस्ट पॉवर लिमिटेड द्वारा की  कई भूमि अवाप्ति से गरीब किसानों के पास भी करोड़ों रुपए आए थे.

इस सोसायटी ने लोगों को लुभावने वादों के साथ झांसे में लिया और कम समय में दुगुना-तिगुनी राशि करने का झांसा देकर हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपए की पूंजी जमा कर ली.

निवेशकों की पूंजी पर आलीशान दफ्तर, गाडिया और फ्लैट खरीद लिए. ऐश-मौज की जिंदगी के साथ ही जोधपुर में तीन मंजिला प्रधान कार्यालय खोल दिया.

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