राजस्थान

जसोल धाम आस्था के समंदर में जयकारों पर भक्तों के हिलोरें

त्रयोदशी पर मांजीसा के दर्शन के लिए देश के कौने-कौने से पहुंचे हजारों श्रद्धालु

कोरोना संकट काल के बाद जसोल धाम में माघ मास की शुक्ल त्रयोदशी को जसोल माता राणी भटियाणी के दर्शन के लिए देश के कौने-कौने से  हजारों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं को घंटों प्रतीक्षा के बाद आई बारी पर मां के दरबार में शीश नवा, कुंकुम, चुंदड़ी प्रसाद मन्दिर के बाहर द्वार पर चढ़ाकर परिवार में खुशहाली की कामना की।
जसोल धामदिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही से मेले सा माहौल नजर आया। गुरुवार सवेरे से ही मंदिर में दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला प्रारंभ हो गया, जो कि दिन चढऩे के साथ बढ़ता ही गया। जसोल धाम में श्रद्धालुओं ने माजीसा के दर्शनों के साथ मंदिर परिसर स्थित सवाईसिंहजी राठौड़, लालसिंहजी , बायोसा मंदिर में दर्शन कर खुशहाली की कामना की।
श्रद्धालुओं के लगाए जाने वाले जयकारों गाए जाने वाले भजनों से माहौल धर्ममय बना गया। दिनभर श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही से यहां मेला-सा माहौल नजर आया।

श्रद्धालुओं ने दिए मन्दिर के बाहर राति जोगा

कोरोना के चलते 9 माह तक मन्दिर के बन्द रहने के बाद माता राणी के प्रति आस्था और मन्नतें पूरी होने पर बहुत से श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर के बाहर राति जोगा दिया। जिसमें महिलाओं ने भजन कीर्तन किए। त्रयोदशी को ब्रह्म मुहूर्त में निज मंदिर के दरवाजे खुलते ही यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
श्रद्धालुओं ने मां की मंगल आरती कर, शीश नवाकर प्रसाद चढ़ा परिवार में जोली भर खुशहाली की कामना की। त्रयोदशी को लेकर मां की प्रतिमा का गहनों, कपड़ों फूल-मालाओं से विशेष श्रृंगार किया गया। दिन निकलने के साथ बालोतरा सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालुओं माजीसा के भजन गाते जयकारे लगाते मंदिर द्वार पहुंचे।

मन्दिर ट्रस्ट की और से सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त

कोरोना काल के चलते सरकारी गाइडलाइंस की पालना को लेकर मंदिर ट्रस्ट की ओर से इंतजाम किए गए। माता के दर्शन करने वाले भक्तों को बिना मास्क मन्दिर में प्रवेश नही दिया गया। वही यात्रियों को मन्दिर में ठहरने के कोई व्यवस्था नही की गई ।
मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेरीकेट्स की व्यवस्था जिसमे दर्शन करने के बाद मन्दिर के बाहर तक आने के लिए व मन्दिर में विराजमान अन्य देवताओं की सुचारू रूप से दर्शन के लिए व्यवस्था की गई। साथ ही सेनेटाइजर का उपयोग भी किया गया।

बड़ी संख्या में पहुंचे पैदल जत्थे

त्रयोदशी को दर्शन करने के लिए बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, जालोर, सांचोर, सिरोही, पाली, जैसलमेर आदि जिलों से सैकड़ों किमी की दूरी तय कर इस दिन दर्जनों की संख्या में पैदल जत्थे मंदिर पहुंचे। वही मेले में बालोतरा, समदड़ी, सिणधरी, मोकलसर, सराणा, जोधपुर, बाड़मेर, पाली, शिव, जालोर, सिरोही के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी एमपी से भी श्रद्धालु मां के दर्शनार्थ जसोलधाम पहुंचे।
डीजे साउंड पर बजते माजीसा के भजनों पर झूमते नाचते मंदिर पहुुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंच माजीसा के समक्ष शीश नवाया। मंदिर में मां के दर्शनार्थ आए नव विवाहित जोड़ों ने मंदिर की परिक्रमा लगाकर अपने सुखी दांपत्य जीवन की कामना की।

Sabal Singh Bhati

The Writer and Journalist.

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