राजस्थान

T-105 बाघिन ने एक दिया एक साथ 3 शावकों को जन्म, बढ़ा बाघों के कुनबा

T-105 बाघिन रणथंभौर के सुल्तानपुर इलाके में आगे टपकन के नाले वन क्षेत्र में तीन शावकों के साथ नजर आई। उनकी फोटो वन विभाग के कैमरों में ट्रैप हुई।

T-105 बाघिन ने एक दिया एक साथ 3 शावकों को जन्म, बढ़ा बाघों के कुनबा

राजस्थान के सवाईमाधोपुर में स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघिन T-105 ने तीन शावकों को जन्म दिया है। बाघिन T-105 रणथंभौर के सुल्तानपुर इलाके में आगे टपकन के नाले वन क्षेत्र में तीन शावकों के साथ नजर आई। उनकी फोटो वन विभाग के कैमरों में ट्रैप हुई।

वन विभाग ने बाघों पर निगरानी रखने के 

लिए कैमरे लगा रखे हैं। वन विभाग की तरफ से T-105 और उसके नन्हें शावकों की लगातार मानिटरिंग की जा रही है। रिजर्व के जोन नंबर एक में पिछले कुछ दिनों से बाघिन की गतिविधियां तो कैमरे में ट्रैप हो रही थीं, लेकिन शावकों के साथ वह बुधवार को नजर आई। बाघिन की उम्र पांच साल है। रणथंभौर बाघ परियोजना क्षेत्र के उप वन संरक्षक महेंद्र शर्मा ने बताया कि चारों की मानिटरिंग बढ़ा दी गई है।

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बाघिन पहली बार ही शावकों के साथ नजर आई है। बाघिन T-105 रणथंभौर की पुरानी बाघिन T-39 की बेटी है। T-39 को नूर के नाम से भी जाना जाता है। नूर की एक बेटी T-106 को कुछ समय पहले ही रणथंभौर से मुकुंदरा शिफ्ट किया गया है। रणथंभौर में अब बाघों का कुनबा बढ़कर 74 हो गया है। अब यहां 20 बाघ, 30 बाघिन औरRanthambore 24 शावक हैं। रणथंभौर से सटे केवलादेव के जंगलों में भी नौ बाघ-बाघिन विचरण कर रहे हैं।

इससे पहले रणथम्भौर में जूनियर मछली के नाम से जानी जाने वाली बाघिन T-84 उर्फ ऐरोहेड के साथ 3 शावक कामलधार इलाके में नजर आये थे. रणथंभौर के फील्ड डायरेक्टर टीसी वर्मा ने बताया कि रणथंभौर में 3 बाघ शावक और बढ़ गए हैं. यहां अभी कई बाघिनों ने नए शावक जन्मे हैं. कई बाघिनों से उम्मीद हैं कि वे भी जल्दी ही शावकों को जन्म देंगी. इसके लिये रणथम्भौर में बाघों और बाघिनों की गहन निगरानी की जा रही है.

गौरतलब है कि राजस्थान में बाघों के संरक्षण को लेकर सरकार वृहत स्तर पर कार्य योजना तैयार करने में जुटी है। इसके लिए वरिष्ठ विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है। यह समिति बाघों का कुनबा बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार करेगी।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने समिति के सदस्यों और वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि यदि जरूरत पड़े तो देश के अन्य विशेषज्ञों का भी इस काम में सहयोग लिया जा सकता है। उन्होंने राज्य में नए टाइगर रिजर्व विकसित करने पर भी जोर दिया है। सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति में विधायक भरत सिंह कुंदनपुर, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के पूर्व सदस्य सचिव डा. राजेश गोपाल, सिमरत कौर संधू, सुनील मेहता, धीरेंद्र गोदा, जैसल सिंह, वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड इंडिया के महासचिव रवि सिंह, भारतीय वन्यजीव बोर्ड देहरादून के प्रतिनिधि और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

बाघिनों की गहन ट्रेकिंग की जा रही हैपिछले कुछ दिन में रणथम्भौर में कई बाघिनों ने शावकों को जन्म दिया है. ऐसे में रणथम्भौर में सुरक्षा के मद्देनजर कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं. बाघिनों के इलाके में निगरानी के लिए अतिरिक्त कैमरा ट्रैप लगा दिए गए हैं. एक विशेष टीम को भी बाघिनों की गहन ट्रेकिंग के लिए लगाया है. प्रदेश के वन बल प्रमुख डॉ. डीएन पांडे ने कहा है कि ये प्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी है. बाघ संरक्षण की दिशा में राजस्थान की ओर से लगातार अच्छा काम किया जा रहा है. इसी वजह से लगातार बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं.

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer