पाली

पानी के संकट को लेकर पाली जिले की जनता का धैर्य टूटा, बोले कब तक तरसेंगे हम

पानी के मुद्दे पर वर्षों से हो रही राजनीति पर आमजन में आक्रोश झलकने लगा है। जनता से बातचीत में पता चला कि पानी की समस्या के लिए जिम्मेदार कौन है। अब यहां के लोग चाहते हैं कि इसका स्थायी समाधान निकले।

पानी के संकट को लेकर पाली जिले की जनता का धैर्य टूटा, बोले कब तक तरसेंगे हम

पाली. पानी के संकट को लेकर अब जिले की जनता का धैर्य टूट रहा है। सालों से किए जा रहे सियासी वादों से भरोसा उठ गया है। दूसरी तरफ, कस्बों और गांवों में पेयजल संकट विकराल रूप ले रहा है। मूक प्राणियों के जीवन पर भी संकट के बादल गहराने लगे हैं। पानी के मुद्दे पर वर्षों से हो रही राजनीति पर आमजन में आक्रोश झलकने लगा है। जनता से बातचीत में पता चला कि पानी की समस्या के लिए जिम्मेदार कौन है। अब यहां के लोग चाहते हैं कि इसका स्थायी समाधान निकले। आमजन से बातचीत में यों सामने आई पीड़ा।

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अजीतसिंह मेड़तिया, चाणोद:

जवाब-सरकार के पास धन की कमी नही, जनप्रतिनिधियों के पास भावनाओं की कमी नहीं। इसके बावजूद जवाईबांध के लिए आज तक कुछ नहीं हो सका। डीपीआर को आज तक स्वीकृति नहीं मिलना सरकार की कमजोरी बताता है।
जवाब- जवाई बांध में सालों से मिट्टी भरी है। नदी व सुरंग के माध्यम से आने वाला पानी अपने साथ हर साल मिट्टी लाता है। सेई की सुरंग को चौड़ा करने से पहले बांध की मिट्टी को साफ कर गहराई को बढ़ाया जा सकता है।

श्रवण राठी, सुमेरपुर:

जवाब- पूर्व में सुमेरपुर क्षेत्र के अलावा केवल पाली को बांध से पेयजल आपूर्ति होती थी। इसके बाद जिले के दूसरे इलाकों को भी जोड़ दिया गया। इसके लिए मुख्य रूप से जनप्रतिनिधि जिम्मेदार है।

जवाब– जिले के माही बांध से नहर के माध्यम से भी जवाईबांध में पानी लाया जा सकता है। इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार को गंभीरता से सोचना होगा। जवाई पुनर्भरणकरने पर ही पानी की समस्या का स्थाई समाधान संभव है।

धर्मेन्द्र व्यास, सोजत:

जवाब – सोजत विधानसभा क्षेत्र में पेयजल समस्या के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि भी जिम्मेदार है। समन्वय एवं इच्छाशक्ति के अभाव में आज तक इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं हो सका।

जवाब : अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों को भी पेयजल संकट की समस्या को गंभीरता से लेकर इस ओर कोई ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। वही प्रधानमंत्री जलजीवन मिशन योजना में भी जिम्मेदारों को सख्ती बरतनी चाहिए।

बाबूलाल मेवाड़ा, सोजत:

जवाब : जनप्रतिनिधि इस तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक, सांसद एवं राजनेताओं को इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों से वार्ता कर समस्या समाधान के लिए प्रयास करने की आवश्यकता है।

जवाब : भू-जल का अविवेकपूर्ण दोहन, परम्परागत पेयजल स्त्रोतो की उपेक्षा एवं प्रकृति के साथ छेड़छाड़ आज हमारे सामने पानी की विकराल समस्या लेकर आई है। परम्परागत स्रोतों का संरक्षण करना चाहिए।

सीता प्रजापति, जैतारण:

जवाब : सरकार व राजनेता दोनों ही जिम्मेदार है। जवाई बांध से जैतारण के 125 गांवों के लिए 600 करोड़ की योजना सरकार ने स्वीकृत करने से पहले यह तय करना था कि बरसात नहीं हुई तो विकल्प क्या होगा।

जवाब : जैतारण क्षेत्र में जो गांव जवाई बांध से नही जुड़ पाए उन्हें जोधपुर केनाल से जोडऩा चाहिए। जैतारण में जवाई बांध का पानी आते ही स्थानीय स्रोत भी बंद कर दिए। उन्हें दोबारा शुरू करना चाहिए।

सुरेश सिंगारिया, जैतारण:

जवाब: जनता ने वोट देकर नेता चुना, उन्हें सरकार से सम्पर्क स्थापित कर पेयजल की दीर्घकालीन योजना बनानी चाहिए। घोषणा के बाद उनकी क्रियान्विती विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है।

जवाब : जैतारण क्षेत्र के गांवों में बने आरओ प्लांट फिर से सरकार को ठीक करवाकर शुरू करने चाहिए। फ्लोराइड युक्त पानी से टीडीएस घटाकर पीने योग्य बनाय जा सकता है। वर्षा जल का संचय पर ध्यान देना चाहिये।

दीपसिंह चौहान, फालना खुड़ाला:

जवाब : पानी की समस्या के लिए सरकार, विभागीय व्यवस्थाएं और जनप्रतिनिधि भी दोषी है। समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए। जवाई बांध पुनर्भरण की कोई व्यवस्था नहीं की गई।

जवाब : प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जाए। जलस्रोतों का पानी शुद्ध कर जनता तक पहुंचाना एकमात्र विकल्प बचा है। इससे भविष्य में भी जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

ब्रिगेडियर करणसिंह, चौहान श्रीसेला:

जवाब : हालात उत्तरदायित्व की कमजोरी से उत्पन्न होते हैं। सभी सामूहिक रूप से दोषी हैं। अधिकारी द्वारा योजनाओं का क्रियान्वयन, सरकार द्वारा वित्तीय स्वीकृति व जनप्रतिनिधियों की सजगता में कमी और आम जनता की उदासीनता से ऐसे हालात पैदा होते हैं।

जवाब: संसाधनों का अधिग्रहण किया जाए। कुएं, ट्यूबवेल और हैंड पंप से पानी एकत्रित किया जाए। खारा पानी को पीने योग्य बनाना होगा। दीर्घकालीन योजनाओं पर काम करना ही श्रेयस्कर रहेगा।

प्रतापराम मालवीय, हेमलियावास खुर्द:

जवाब : वर्तमान में पानी की विकट समस्या के लिए राजस्थान सरकार व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग और जिला प्रशासन जिम्मेदार है।

जवाब : मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में पानी की इस समस्या के समाधान के लिए सिरियारी बांध के पास नए ट्यूबवेल खुदवाकर उससे पानी की सप्लाई की जाए तो मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में इसका समाधान हो सकता है।

मीठालाल तिवारी, मारवाड़ जंक्शन:

जवाब : पानी की समस्या के लिए जनप्रतिनिधी, प्रशासन और जनता स्वयं भी जिम्मेदार है। पानी को लेकर आमजन को भी अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए थी। राजनेताओं और जिला प्रशासन से जवाब मांगना चाहिए।

जवाब : क्षेत्र में जन चेतना की कमी है। जनता को जागरूक किया जाए। पाली जिले को इंदिरा गांधी नहर से जोड़ा जाए। क्षेत्र में कोर कमेटियों का गठन किया जाए ताकि पानी का दुरुपयोग रोका जा सके।

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer