चीन-रूस के बीच रूबल-युआन में व्यापार से कम हुआ डॉलर का प्रभुत्व

Sabal SIngh Bhati
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नई दिल्ली, 6 मई ()। रूस द्वारा अमेरिकी डॉलर का प्रयोग कम करने के साथ ही अब चीनी युआन और रूसी रूबल द्विपक्षीय व्यापार में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मुद्राएं बन गई हैं। दो साल पहले तक यह अकल्पनीय था।

चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी डॉलर सिंहासन से नीचे उतर चुका है और अब लोग इसे ज्यादा स्पष्ट देख सकते हैं।

रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने कहा, अगर हम चीन और रूस के बीच व्यापार की संरचना को देखें तो 70 प्रतिशत से अधिक द्विपक्षीय व्यापार युआन या रूबल में तय होता है।

यह पूछे जाने पर कि क्या रूबल या युआन अमेरिकी डॉलर की जगह ले सकता है, उन्होंने जवाब दिया, यह दिख रहा है।

ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि चीनी सीमा शुल्क के आंकड़ों से पता चलता है कि पहली तिमाही में चीन और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 53.8 अरब डॉलर है जबकि चीन और अमेरिका के बीच का आंकड़ा 161.6 अरब डॉलर है। इसका मतलब है कि रूस के साथ चीन का व्यापार अमेरिका के साथ उसके व्यापार के लगभग 30 प्रतिशत के बराबर है। यह महत्वपूर्ण डेटा लोगों को डॉलर का राज समाप्त होने और मुद्रा विविधता की मौजूदा प्रवृत्ति की अधिक सहज समझ प्रदान कर सकता है।

रॉबर्ट सेमनसेन ने द यूरोपियन कंजर्वेटिव के लिए लिखा कि 2022 की शुरूआत से, रूबल-युआन व्यापार आठ गुना बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त, यह बताया गया है कि रूस और ईरान एक स्वर्ण आधारित क्रिप्टोकरंसी बनाने पर काम कर रहे हैं, इस विचार के साथ कि गोल्ड-समर्थित स्थिर मुद्रा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भुगतानों में अमेरिकी डॉलर की जगह ले सकती है।

सेमनसेन ने लिखा है कि अमेरिका के वैश्विक आर्थिक आधिपत्य के सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी चीन और लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ब्राजील ने व्यापार और वित्तीय लेनदेन में माध्यम मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर को छोड़ने के लिए समझौता किया है। दो आर्थिक दिग्गज अब अपनी मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार करेंगे, युआन और रियाल का आदान-प्रदान करेंगे जिससे युआन का और अंतर्राष्ट्रीयकरण होगा।

बीजिंग के रूस, तुर्की, पाकिस्तान और कई अन्य देशों के साथ इसी तरह के मुद्रा सौदे हैं – तथा इस सूची में और देश जुड़ रहे हैं। चीन के नेतृत्व वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य – चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान – फरवरी 2022 में आपसी व्यापार में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

सेमनसेन ने लेख में लिखा कि मार्च के अंतिम सप्ताह में अमेरिकी डॉलर के वैश्विक आधिपत्य का झटका देते हुए चीन ने पहली बार युआन में ऊर्जा समझौता किया। उसने संयुक्त अरब अमीरात के साथ 65 हजार टन एलएनजी का सौदा किया।

सोशल मीडिया एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म के अनुसार, डॉलर का राज समाप्त करने का विषय हाल ही में लोकप्रिय हो गया है। इस साल जनवरी-मार्च की पहली तिमाही में ट्विटर और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्मों पर सोशल मीडिया पर डी-डॉलराइजेशन शब्द का इस्तेमाल बढ़ या है। पिछले तीन महीनों की तुलना में 600 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस प्रवृत्ति के लिए अमेरिकी डॉलर से परे विकल्प तलाश रहे देशों की बढ़ती संख्या को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

व्हाइट हाउस के एक पूर्व सलाहकार ने कहा है कि ब्रिक्स मुद्रा डॉलर के प्रभुत्व को डिगा सकती है।

ट्रम्प प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस काउंसिल ऑफ इकोनॉमिक एडवाइजर्स के पूर्व विशेष सलाहकार और स्टाफ अर्थशास्त्री जोसेफ सुलिवन ने फॉरेन पॉलिसी में लिखा है कि संभव है कि डी-डॉलराइजेशन का समय आ गया है।

डी-डॉलराइजेशन की बात चल रही है। पिछले महीने नई दिल्ली में रूस के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर बाबाकोव ने कहा कि रूस अब एक नई मुद्रा के विकास की अगुआई कर रहा है। सुलिवान ने लिखा, ब्रिक्स देशों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका द्वारा सीमा पार व्यापार के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना है।

एकेजे

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