दर्शन

कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा है यह अद्भुत संयोग, जानिए अपनी राशि के अनुसार पूजन विधि

कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त गण पूरा दिन उपवास करते हैं. रात के 12 बजे तक भगवान श्री कृष्ण जी का जागरण, भजन, पूजन-अर्चना करते हैं.

कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा है यह अद्भुत संयोग, जानिए अपनी राशि के अनुसार पूजन विधि

जिस तरह से श्रावण मास में भगवान शिव की भक्ति होती है, उसी तरह से भाद्रपद मास में श्रीकृष्ण की आराधना का महत्व है. कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त गण पूरा दिन उपवास करते हैं. रात के 12 बजे तक भगवान श्री कृष्ण जी का जागरण, भजन, पूजन-अर्चना करते हैं. इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5247वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मथुरा के ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का अवतरण 3228 ईसवी वर्ष पूर्व हुआ था. 3102 ईसवी वर्ष पूर्व कान्हा ने इस लोक को छोड़ भी दिया. विक्रम संवत के अनुसार, कलयुग में उनकी आयु 2078 वर्ष हो चुकी है.

अर्थात भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी लोक पर 125 साल, छह महीने और छह दिन तक रहे. उसके बाद स्वधाम चले गए. पंचांग के अनुसार, भाद्रमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 29 अगस्त को रविवार को रात 11 बजकर 25 मिनट पर होगा. अष्टमी तिथि 30 अगस्त को रात में 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगी. इस हिसाब से व्रत के लिए उदया तिथि को मानते हुए 30 अगस्त को जन्माष्टमी होगी.

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विशेष संयोग में होगी जन्माष्टमी:

इस बार जन्माष्टमी पर विशेष संयोग बन रहा है. श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, तो इस बार भी जन्माष्टमी पर कृष्ण जी के जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी. इसके अलावा वृष राशि में चंद्रमा रहेगा. ऐसा दुर्लभ संयोग होने से इस जन्माष्टमी का महत्व कहीं ज्यादा बढ़ गया है. ज्योतिषाचार्य का कहना है कि इस समय में जो भी भक्त भगवान की सच्चे दिल से प्रेमपूर्वक पूजा अर्चना करेगा, उसकी मनोकामना कान्हा जरूर पूरी करेंगे.

मेष– इस दिन गाय को मीठी वस्तुएं खिलाकर श्रीकृष्ण भगवान का पूजन करें.
वृष– इस राशि वाले लोग दूध व दही से श्रीकृष्णजी का भोग लगाएं. रसगुल्ले का भोग भी चढ़ाएं.
मिथुन– गाय को हरी घास या पालक खिलाएं और मिश्री का भोग लगाकर श्रीकृष्णजी का पूजन करें.
कर्क– जन्म अष्टमी के दिन माखन मिश्री मिलाकर लड्डू गोपाल को भोग लगाकर प्रसाद का वितरण करें.
सिंह– जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण भगवान को पंच मेवा का भोग लगाकर पूजन करें. बेल का फल भी अर्पित कर सकते हैं.
कन्या– इस राशि के लोग केसर मिश्रित दूध का भोग लगाकर श्रीकृष्णजी को अर्पित करें और गाय को रोटी खिलाएं.
तुला– भगवान श्रीकृष्ण को फलों का भोग लगाकर पूजन करें.और कलाकंद मिठाई का भोग लगाएं.
वृश्चिक– इस राशि के लोग मिश्री और  मावा भरकर गाय को खिलाएं और केसरिया चावलों का भगवान को भोग लगाएं.
धनु– जन्माष्टमी के दिन बादाम के  हलवे से केसर मिलाकर  वासुदेव को भोग लगाकर पूजन करें.
मकर– खसकस के दानों से मिलाकर धनियाब की पंजीरी श्री कृष्णजी का भोग लगाकर पूजन व अर्चना करें.
कुंभ– कृष्ण जी के पास  गुलाब की धूप जलाएं. बर्फी का भोग चढ़ाएं.
मीन– मीन राशि वाले प्रभु श्रीकृष्ण को जलेबी या केले का भोग लगाएं, हर समस्या दूर हो जाएगी.

मथुरा में सजाई जा रही है कृष्ण जन्मस्थली:

उत्तर प्रदेश के मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली, जन्माष्टमी के लिए पूरी तरह से सज चुकी है. इस बार की जन्माष्टमी को यादगार बनाने के लिए मथुरा नगरी को सजाया जा रहा है. जन्माष्टमी के पर्व पर मथुरा नगरी जगमग होगी. कोरोना काल के बाद यह पहली बार होगा जब मथुरा नगरी  की सजावट इतनी भव्य होगी.

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा समिति उत्सव को यादगार बनाने के लिए गर्भ गृह को प्राचीन कारागार की तरह से सजाया जा रहा है. मंदिर प्रशासन चाह रहा है कि जैसे द्वापर में कारागार में भगवान का जन्म हुआ था, वैसा ही नजारा उन्हें कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर मथुरा में नजर आए

कामधेनु की प्रतिमा से होगा नंदलला का अभिषेक:

भागवत भवन में कृष्ण जन्मोत्सव का यह उत्सव मानाया जाएगा. वेणु मंजिरिका पुष्प बंगले में भगवान विराजमान होंगे. वहीं मोर-छल आसन में उनका अभिषेक किया जाएगा. भगवान का प्रकटोत्सव रजत कमल पुष्प में होगा. चांदी से बनाई गई कामधेनु की प्रतिमा से कृष्णलला का अभिषेक किया जाएगा.

मंदिर में गूंजेगा भव्य संगीत:

जन्मस्थली के बाहर शहनाई, नगाड़े और अन्य वाद्य यंत्रों से मंदिर का माहौल भक्तिमय बनाया जाएगा. भक्त भगवान की मंगल आरती का दर्शन भी कर सकेंगे. यही वजह है कि पूरे मंदिर को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है. मंदिर में उत्सव का मुख्य कार्यक्रम रात 11 बजे से शुरू होगा, फिर 12 बजे जन्माभिषेक होगा.

1.30 बजे तक दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु:

ढोल, नगाड़े, झांझ, मंजीरा और मृदंग बजाए जाएंगे. हरिबोल कीर्तन भी 12 बजे से शुरू हो जाएगा. मंदिर के प्रवेश द्वार पर बिना मास्क आने वाले भक्तों को मास्क दिया जाएगा. मंदिर में कोरोना नियमों का पूरी तरह से पालन अनिवार्य होगा. रात 1 बजकर 30 मिनट तक मंदिर खुला रहेगा. भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे.

श्रद्धालुओं के लिए बनाए जा रहे सामानघर:

दर्शन के लिए मंदिर आने से पहले उन्हें अपना मोबाइल फोन, रिमोट की, रिंग, थैला, माचिस, सिगरेट, चाकू और ब्लेड जैसे उपकरणों को बाहर रखना होगा. मंदिर प्रशासन में इसे लेकर एंट्री नहीं मिलेगी. मंदिर में भक्तों को असुविधा न हो इसके लिए सामान रखने के लिए सामानघर की की भी व्यवस्था कराई गई है.

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer