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पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी डीएम सुहास एलवाई ने रचा इतिहास, गोल्ड मेडल करेंगे अपने नाम

पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी व डीएम सुहास एलवाई ने तोक्यो पैरा लिंपिक-2020 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुषों के LS4 वर्ग के एकल में इंडोनेशिया के सेतिवान

पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी डीएम सुहास एलवाई ने रचा इतिहास, गोल्ड मेडल करेंगे अपने नाम

नई दिल्ली. भारतीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी और गौतम बुद्ध नगर के डीएम सुहास एलवाई ने तोक्यो पैरा लिंपिक-2020 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुषों के LS4 वर्ग के एकल में इंडोनेशिया के सेतिवान फ्रेडी को सीधे गेम में 21-19 और 21-15 से मात देकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। वह देश के पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने पैरालिंपिक में मेडल पक्का कर लिया है।

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एसएल4 क्लास में सुहास का सामना शीर्ष वरीयता प्राप्त फ्रांस के लुकास माजूर से होगा। सुहास के अलावा मौजूदा विश्व चैम्पियन प्रमोद भगत भी फाइनल में पहुंच गए, हालांकि मनोज सरकार और तरुण ढिल्लों को सेमीफाइनल में पराजय का सामना करना पड़ा।

सुहास एलवाई ने पुरुषों के LS4 वर्ग के एकल में इंडोनेशिया के सेतिवान फ्रेडी को सीधे गेम में 21-19 और 21-15 से मात देकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है. वह देश के पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने पैरालिंपिक में मेडल पक्का कर लिया है.

वह देश के पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें पैरालिंपिक में हिस्सा लेने का मौका मिला है. सुहास इससे पहले युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनैशनल टूर्नामेंट में कांस्य पदक और तुर्की इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट में पुरुष सिंगल्स का खिताब जीत चुके हैं.

सुहास की जीत पर जश्न का माहौल:

सुहास एलवाई के टोक्यो पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद भारत में तो खुशी का माहौल है ही वहीं खासतौर पर उनके जिले गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में भी जश्न का माहौल है. यथिराज की इस जीत से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. लोगों का कहना है कि ‘सुहास एलवाई जरूर गोल्ड मेडल लेकर आएंगे.’

इससे पहले भी मेडल अपने नाम कर चुके हैं सुहास:

बता दें कि इससे पहले भी डीएम सुहास एलवाई कई मेडल अपने नाम कर चुके हैं. 2016 में बीजिंग में हुए एशियाई पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में वह एक पेशेवर अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय नौकरशाह बने. उस समय वह आजमगढ़ के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने इस टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर पूरी दुनिया में भारत का और अपना नाम किया.

ढिल्लो कांस्य पदक के लिए उतरेंगी:

माजूर ने दूसरी वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ढिल्लों को करीबी मुकाबले में 21-16, 16-21, 21-18 से हराया। हिसार के 27 वर्ष के ढिल्लों का सामना कांस्य पदक के लिए सेतियावान से होगा। वहीं मनोज को दूसरी वरीयता प्राप्त बेथेल ने 21-8, 21-10 से हराया। मनोज अब कांस्य पदक के लिए फुजीहारा से खेलेंगे। इस क्लासीफिकेशन में आधा कोर्ट की इस्तेमाल होता है तो भगत और फुजीहारा ने लंबी रेलियां लगाई। शुरुआत में भगत 2-4 से पीछे थे लेकिन ब्रेक तक 11-8 से बढ़त बना ली।

उसके बाद इस लय को कायम रखते हुए लगातार छह अंक के साथ पहला गेम जीता। दूसरे गेम में उन्होंने विरोधी को कोई मौका ही नहीं दिया। भगत और पलक कोहली मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 सेमीफाइनल भी खेलेंगे। मैच के बाद भगत ने कहा, ‘यह शानदार मैच था। उसने मुझे कुछ अच्छे शॉट्स लगाने के लिए प्रेरित किया। मुझे फाइनल में पहुंचने की खुशी है लेकिन काम अभी पूरा नहीं हुआ है।’

पांच वर्ष की उम्र में पोलियो के कारण उनका बायां पैर विकृत हो गया था। उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में चार स्वर्ण समेत 45 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। बीडब्ल्यूएफ विश्व चैम्पियनशिप में पिछले आठ साल में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत जीते। 2018 पैरा एशियाई खेलों में उन्होंने एक रजत और एक कांस्य जीता।

सुहास के नाम हैं कई पदक:

वह देश के पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें पैरा लिंपिक में हिस्सा लेने का मौका मिला है। सुहास इससे पहले युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनैशनल टूर्नामेंट में कांस्य पदक और तुर्की इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट में पुरुष सिंगल्स का खिताब जीत चुके हैं।

वर्ल्ड रैंकिंग में तीसरे नंबर के शटलर सुहास कई अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक भी जीत चुके हैं। वह जकार्ता पैरा एशियन गेम्स-2018 में कांस्य पदक विजेता पुरुष टीम में शामिल थे। 2017 में टोक्यो में हुए जापान ओपन पैरा बैडमिंटन टूर्नामेंट में उपविजेता रहे थे, जबकि युगल एसएल-4 वर्ग में कांस्य पदक जीता था।

 

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer