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हरभजन सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास (लीड-1)

नई दिल्ली, 24 दिसम्बर ()। भारत के अनुभवी ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने शुक्रवार को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की, जिससे उनके 23 साल के शानदार करियर का अंत हो गया।

41 वर्षीय खिलाड़ी ने 103 टेस्ट, 236 वनडे और 28 टी20 खेले। इन मैचों में उन्होंने 417, 269 और 25 विकेट झटके। कुल विकेटों के मामले में अनिल कुंबले के 953 विकेट के बाद भारत के लिए 707 अंतर्राष्ट्रीय विकेट लेने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं। उन्होंने बल्ले से भी टीम के लिए योगदान दिया, जिसमें दो शतक और नौ अर्धशतक के साथ 3,569 रन बनाए।

हरभजन 2001 में ईडन गार्डन्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय बने थे। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से संन्यास की घोषणा की।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, आखिर में सभी अच्छी चीजें खत्म हो जाती हैं और आज जब मैं उस खेल को अलविदा कह रहा हूं, जिसने मुझे जीवन में सब कुछ दिया है। इसके लिए मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने इस 23 साल की लंबी यात्रा को सुंदर और यादगार बनाया। मैं दिल से उनका आभारी हूं।

हरभजन ने 1998 में बैंगलोर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था और ग्रेग ब्लेवेट उनके पहले टेस्ट विकेट बने थे। उसी वर्ष, जब भारत ने अप्रैल में शारजाह में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला तो उन्होंने वनडे में भी डेब्यू किया था। मैट हॉर्न उनका पहला वनडे विकेट था।

हरभजन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, मैं सार्वजनिक रूप से घोषणा करने के लिए पिछले कुछ सालों से इंतजार कर रहा था। मैं दिमाग से पहले ही संन्यास ले चुका था, लेकिन मैं आज घोषणा कर रहा हूं। जालंधर की सड़कों से टीम इंडिया के लिए टर्नबेटर बनने का मेरा सफर खूबसूरत रहा है। मेरे लिए जीवन में भारत की जर्सी पहनकर मैदान पर कदम रखने से बड़ी कोई और प्रेरणा नहीं है।

41 वर्षीय खिलाड़ी ने 2007 में भारत की ऐतिहासिक टी20 विश्व कप में जीत और 2011 में वनडे विश्व कप की जीत में हिस्सा थे। महान ऑफ स्पिनर ने आखिरी बार 03 मार्च 2016 को टी20 विश्व कप में यूएई के खिलाफ भारत के लिए मैच खेला था।

हालांकि, वह लगातार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कई फ्रेंचाइजी का हिस्सा थे और पिछले सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए खेले थे।

उन्होंने आगे कहा, हर भारतीय क्रिकेटर की तरह, मैं भी भारत की जर्सी में अलविदा कहना चाहता था, लेकिन भाग्य में मेरे लिए कुछ और था। चाहे जिस टीम के लिए मैंने प्रतिनिधित्व किया हो, मैंने हमेशा अपनी टीम को जिताने के लिए 100 दिया है।

आरजे/आरजेएस

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