उत्तर प्रदेश

दारुल उलूम: कुरान व हदीस के साथ बच्चों को पढ़ाई जा रही रामायण-गीता, मनुस्मृति व सिखों के धार्मिक ग्रन्थ

दारुल उलूम की कुछ तस्वीरें ऐसे ही किस्से बयां करती हैं। आइए एक-एक करके तस्वीरों के जरिए इसकी पूरी कहानी समझने की कोशिश करते हैं।

दारुल उलूम: उत्तर प्रदेश. सोचिये, यदि आप किसी मदरसे में जाते हैं, वहां मुसलमानों की पवित्र किताब कुरान और हदीस के बीच रामायण और गीता रखी मिलती है और मनुस्मृति और सिखों के धार्मिक ग्रंथ विराजमान होते हैं, इसके अलावा बच्चे चौपाई और श्लोक पढ़ रहे होते हैं, और आंगन में तुलसी लहलहा रही हैं। तो कैसा लगता है।
किसी कल्पना जैसा लगता है लेकिम यह कोई कल्पना नही हकीकत है, जी हां आपको थोड़ी हैरानी हो सकती है।

दरअसल यह मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का है, जहां स्थित इस्लामी शिक्षा के केंद्र दारुल उलूम की कुछ तस्वीरें ऐसे ही किस्से बयां करती हैं।

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जैसा कि आप फोटो में देख सकते है, यहां इस्लामिक किताबों के बीच रामचरित मानस और वाल्मीकि रामायण जैसे हिंदुओं के ग्रंथ मौजूद हैं। यहां के कर्मचारी कहते हैं कि ये दोनों किताबें सिर्फ हिंदुओं के नहीं बल्कि हिंदुस्तान के पवित्र ग्रंथ हैं।

उर्दू में लिखी ऋग्वेद की किताब मुस्लिम धर्मग्रंथों के बीच रखी है। इसके ऊपर संस्कृत भाषा में लिखी गीता रखी है। यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स इन पुस्तकों का अध्ययन करते हैं।

यहां की लाइब्रेरी में सिखों के पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को भी जगह मिली है। यह किताब अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। रिसर्च के लिए इसका इस्तेमाल यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स करते हैं।

दारुल उलूम के मेहमानखाने में तुलसी के कई पौधे लगे हैं। मौलवी और यहां रहने वाले लोग इसकी पत्तियों से चाय बनाकर भी पीते हैं।

दारुल उलूम के मदरसे में पढ़ाई करने के लिए जाते हुए स्टूडेंट्स। यहां पढ़ने वालों को सभी प्रकार की खालिस मजहबी तालीम दी जाती है

दारुल उलूम में चलने वाली क्लास। स्टूडेंट्स यहीं पर मजहबी शिक्षा हासिल करते हैं। पढ़ाई के दौरान तस्वीर नहीं ली जा सकती है, इसकी सख्त मनाही है।

दारुल उलूम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद शहर में स्थित है। यह एक इस्लामिक स्कूल है जहां देवबंदी इस्लामिक आंदोलन की शुरुआत हुई थी।

मुस्लिमों की नायाब किताबों के बीच मनुस्मृति को भी जगह मिली है। मनुस्मृति में शादी-ब्याह, राजा-प्रजा दोनों के कर्तव्य लिखे हैं।

यह तस्वीर फतवा ऑफिस की है। उर्दू में इसे दारुल इफ्ता कहते हैं। दारुल उलूम फतवों के लिए जाना जाता है। फतवे का मतलब इस्लाम से जुड़े सवालों का जवाब देना होता है।

Tina Chouhan

Author, Editor, Web content writer, Article writer and Ghost writer