विहिप ने धर्मांतरण विरोधी कानून को वापस लेने के प्रस्ताव के विरोध में कर्नाटक में किया प्रदर्शन

Sabal SIngh Bhati
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बेंगलुरू, 16 जून ()। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने शुक्रवार को कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और पिछली भाजपा सरकार द्वारा पेश किए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को वापस लेने के हालिया कैबिनेट के फैसले की निंदा की।

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में विरोध प्रदर्शन किया गया जिसमें विहिप के सैकड़ों समर्थकों ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ नारेबाजी की। विहिप ने सभी हिंदुओं से विरोध में भाग लेने का आह्वान किया था।

राज्य भर के सभी जिला मुख्यालयों पर भी शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया गया। विहिप के जिला सचिव जयराम ने कहा कि कांग्रेस को सत्ता संभाले अभी एक महीना भी नहीं हुआ है, लेकिन वह धर्मातरण विरोधी कानून में बदलाव कर रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य में धर्म परिवर्तन और लव जिहाद के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। अगर उन्हें रोका नहीं गया तो यह न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा संकट होगा।

विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष एम.बी. पुराणिक ने कहा कि भारत एक हिंदू देश है और संविधान ने विभिन्न धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अनुमति दी है।

उन्होंने कहा कि अन्य धर्मों के लोग अपने धर्म और रीति-रिवाजों का पालन कर सकते हैं और हम इससे सहमत हैं। हम केवल जबरन धर्मांतरण की निंदा करते हैं। भारत एक हिंदू देश है और कर्नाटक उसका एक हिस्सा है। प्रत्येक हिन्दू को धर्मांतरण से बचाना, हिन्दू धर्म के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य है।

कांग्रेस सरकार को मुख्य रूप से हिंदुओं के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोगों द्वारा सत्ता में लाया गया था। यह अल्पसंख्यक वोटों के कारण सत्ता में नहीं आई थी। कांग्रेस का यह कदम सभी हिंदुओं के साथ एक बड़ा विश्वासघात है। कर्नाटक के हिंदुओं की मांग है कि प्रस्ताव वापस लिया जाना चाहिए।

पुराणिक ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार जनविरोधी फैसले लेना बंद कर देगी जो समाज में शांति भंग कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा पेश किए गए धर्मांतरण विरोधी कानून में संशोधन करने की घोषणा की थी।

राज्य के मंत्री एच.के. पाटिल ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार द्वारा पेश किए गए सभी पहलुओं को हटा दिया जाएगा। जुलाई में होने वाले विधानसभा सत्र में संशोधन के लिए अधिनियम लिया जाएगा।

भाजपा ने धर्मांतरण पर कड़ी शर्तें लगाई थीं और अपराध के लिए सजा भी निर्धारित की थी। पाटिल ने कहा कि सरकार धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार के कर्नाटक संरक्षण विधेयक, 2021 को रद्द कर देगी और इसकी जगह नया विधेयक पेश करेगी।

एफजेड/एकेजे

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