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अंतर्राष्ट्रीय विरासत दिवस पर पैनलुंगशान लंबी दीवार का रहस्योद्घाटन

बीजिंग, 16 अप्रैल ()। हर वर्ष के 18 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय विरासत दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1982 के ठीक इसी दिन स्मारकों और स्थलों पर अंतर्राष्ट्रीय परिषद ने ट्यूनीशिया में एक अनुसंधान प्रतिष्ठान आयोजित किया। इस दौरान कई प्रतिनिधियों ने अंतर्राष्ट्रीय विरासत दिवस की स्थापना करके विश्व में इस की खुशी मनाने की सलाह दी। फिर अगले वर्ष के नवंबर में आयोजित यूनेस्को की 22वीं महासभा में इसकी अनुमति दी गयी।

सभी लोग यह जानते हैं कि चीन में सबसे प्रसिद्ध विरासत लंबी दीवार है, जैसे भारत का ताज महल। वह प्राचीन चीन में एक सैन्य रक्षा परियोजना थी, जिसे वर्ष 1987 के दिसंबर में विश्व सांस्कृतिक विरासत के रूप में सूचीबद्ध किया गया। दो हजार से अधिक वर्षों तक लंबी दीवार का निर्माण जारी रहा, जो उत्तर व मध्य चीन के विशाल क्षेत्रों में स्थित है। और इसकी कुल लंबाई 20 हजार से अधिक किलोमीटर पहुंची। पैनलुंगशान लंबी दीवार उनमें से एक भाग है।

पैनलुंगशान लंबी दीवार पेइचिंग शहर के मीयुन जि़ले के प्राचीन पेईखो कस्बे में स्थित है। जो पेइचिंग शहर के केंद्र से 100 किलोमीटर दूर है। पर्यटकों के लिए खुली सभी लंबी दीवारों में वह एकमात्र भाग है, जिसकी मरम्मत नहीं की गयी है। उसने अच्छी तरह से अपना मूल स्वरूप बनाए रखा है। चीन के मिंग राजवंश की लंबी दीवार, जिसका निर्माण वर्ष 1368 से वर्ष 1644 तक हुआ था, के साथ पेइचिंग शहर में सबसे पुरानी लंबी दीवार, जिसका निर्माण पेइछी राजवंश में वर्ष 550 से वर्ष 577 तक हुआ था, देखी जा सकती है।

इसके अलावा वहां लोगों को वर्ष 1680 में निर्मित प्राचीन शाही सड़क भी देखने को मिलती है। पैनलुंगशान लंबी दीवार एक खतरनाक भूभाग है और प्राचीन काल से सैन्य रणनीतिकारों के लिए एक युद्ध का मैदान रहा है। पांच किलोमीटर लंबी दीवार पर दुश्मन से बचने के लिए 19 मीनारें स्थित हैं। उनमें एक मीनार पर बाहर देखने के कुल 24 छेद बने हैं, जो लंबी दीवार के स्थापत्य इतिहास में एक दुर्लभ खजाना है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

एएनएम