नई दिल्ली। पीएम मोदी ने जोहान्सबर्ग में जी 20 समिट के दौरान दुनिया के 20 ग्लोबल लीडर्स से मुलाकात की। इनमें इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय नेता शामिल रहे। मोदी ने समिट के तीसरे सेशन में एआई के गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया को बड़ा नुकसान हो सकता है, इसलिए सभी देशों को मिलकर इसके लिए मजबूत नियम-कानून बनाने चाहिए। मोदी ने कहा कि एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट होना जरूरी है, जिसमें निगरानी, सुरक्षा और पारदर्शिता शामिल हों।
उन्होंने डीपफेक वीडियो-ऑडियो, अपराध और आतंकवाद में एआई के इस्तेमाल को खतरनाक बताया। मोदी ने कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो एआई का गलत इस्तेमाल समाज के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। इसलिए समय रहते पूरी दुनिया को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने जी-20 सम्मेलन में प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के तरीके में बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग वित्त-केंद्रित के बजाय मानव-केंद्रित, राष्ट्रीय के बजाय वैश्विक और विशेषाधिकार-आधारित मॉडल के बजाय मुक्त स्रोत पर आधारित होने चाहिए।
उन्होंने बताया कि मानव केंद्रित दृष्टिकोण को भारत के प्रौद्योगिकी तंत्र में समाहित किया गया है, जिससे अंतरिक्ष अनुप्रयोगों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता या डिजिटल भुगतान में बड़े लाभ हुए हैं। पीएम ने एआई के लिए मानवीय निगरानी, सुरक्षा और दुरुपयोग को रोकने के सिद्धांतों पर आधारित वैश्विक समझौते की अपील की। उन्होंने कहा कि इंडिया-एआई मिशन के तहत, सुलभ उच्च-प्रदर्शन क्षमता तैयार की जा रही है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई के लाभ सभी तक पहुँचे। उन्होंने जोर दिया कि एआई को दुनिया की भलाई में परिवर्तित होना चाहिए और अंतिम निर्णय मनुष्य को ही करना चाहिए।
पीएम ने फरवरी 2026 में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय थीम के साथ एआई प्रभाव सम्मेलन की मेजबानी करने की बात कही और सभी जी-20 देशों को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि एआई के युग में, हमें अपने नजरिए को आज की नौकरियों से कल की क्षमताओं की ओर तेजी से मोड़ने की आवश्यकता है। जी-20 सम्मेलन में प्रतिभा गतिशीलता पर हुई प्रगति को याद करते हुए, उन्होंने प्रस्ताव दिया कि समूह को आने वाले वर्षों में प्रतिभा गतिशीलता के लिए एक वैश्विक ढाँचा तैयार करना चाहिए।
पीएम ने भारत के संदेश और प्रतिबद्धता को दोहराते हुए अपनी बात समाप्त की, जिसमें टिकाऊ विकास, भरोसेमंद व्यापार, उचित वित्त और ऐसी प्रगति शामिल है जिसमें सबकी प्रगति हो। पीएम मोदी ने जी-20 समिट के मौके पर जोहान्सबर्ग में साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। उन्होंने भारत-साउथ अफ्रीका संबंधों को मजबूत करने वाले ऐतिहासिक संबंधों की समीक्षा की और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

