आईएएनएस रिव्यू: दर्शकों का दिल जीतने में नाकाम रही आदिपुरुष, कृति सेनन की एक्टिंग रही फीकी

Kheem Singh Bhati
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फिल्म: आदिपुरुष

फिल्म की अवधि: 179 मिनट

निर्देशक: ओम राउत

कास्ट: प्रभास, कृति सेनन, सैफ अली खान, देवदत्त नाग और संजीव सिंह

सिनेमाटोग्राफी: कार्तिक पलानी

म्यूजिक: संचित बलहारा, अंकित बलहारा

सॉन्ग्स: अजय-अतुल, सचेत-परंपरा

रेटिंग: 2 स्टार

जब डिस्क्लेमर परंपरागत तीन लाइनों से बड़ा हो और जरूरी तथ्यों को शामिल करने या हटाने को सही ठहराया जाए, तो समझ लेना चाहिए कि फिल्म निर्माता कुछ छिपाने या समझाने की कोशिश कर रहे हैं, या संभवत: उस प्रतिक्रिया से डर रहे हैं, जिसका परिणाम बर्बादी हो सकती है।

डिस्क्लेमर में कहा गया है कि पात्रों के मूल नाम बदल दिए गए हैं। और क्या कोई इतनी भव्य फिल्म बिना किसी छोटे-मोटे विवाद के बन सकती है?

जो भी हो, फिल्म को लेकर थोड़ा बहुत शोर-शराबा उसके बारे में सकारात्मक चर्चा की शुरुआत करता है। भारतीय पौराणिक महाकाव्य रामायण पर बनी अनेक फिल्मों में से एक आदिपुरुष का पटकथा लेखन और निर्देशन ओम राउत ने किया है। यह टी-सीरीज और रेट्रोफाइल्स द्वारा निर्मित है। इसे हिंदी और तेलुगु में एक साथ शूट किया गया। इसे आधुनिक पृष्ठभूमि में बनाया गया है लेकिन सौभाग्यवश महाकाव्य की कहानी से ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की गई है। तीन घंटे से एक मिनट कम की इस फिल्म में कंप्यूटर जनरेटिड ग्राफिक्स का भरपूर इस्तेमाल किया गया है जो कहानी में व्यवधान भी डालती है, लेकिन यह इसकी एक मात्र गलती नहीं है।

फिल्म राजकुमार राम के पिता राजा दशरथ से उनकी सौतेली मां कैकेयी के द्वारा मांगें जाने वाले 14 साल के वनवास पर शुरू होती है। कहानी, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ जंगलों में उनकी यात्रा पर केंद्रित है।

जल्द ही, लंका के राजा रावण द्वारा सीता के अपहरण का सीन आ जाता है, और इसके बाद राम और रावण के बीच युद्ध होता है।

कई पौराणिक कहानियों के ढेर सारे वर्जन बने हैं, जिन्हें जोश के साथ बताया गया है, हर एक का लक्ष्य नया ²ष्टिकोण है और यही कारण है कि नए परिप्रेक्ष्य में ये कहानियां ज्यादातर हिट हो जाती हैं। निर्माता और निर्देशक जानते हैं कि उन्हें एक सटीक रूपांतर करना है।

रामायण के इस वर्जन में कुछ हद तक दोष नहीं ढूंढ़ा जा सकता है, क्योंकि न तो यह मिथिकल थीम है और न ही कोई करेक्टर वास्तविक है। राम का किरदार निभाने वाले प्रभास की एक्टिंग जबरदस्त रही। बाकी काल्पनिक भूमिकाएं या तो हाइपर-सेंसिटिव या डेडपैन एक्सप्रेशन के साथ थीं।

सैफ अली खान रावण के भूमिका में नजर आए। टेक्नोलॉजी की मदद से, उन्हें पांच फीट के बड़े फ्रेम से बड़ा दिखाने की कोशिश की गई, जिससे उनके रावण के किरदार को सभी पात्रों से ऊपर उठाया जा सके।

उत्तर भारतीय हिंदी भाषी दर्शकों को लुभाने के लिए राम की आवाज को शरद केलकर ने डब किया है, जो कि परफॉर्मेंस का आधा हिस्सा है।

फिल्म में जानकी के किरदार में कृति सेनन को देखकर ऐसा लगा कि वह इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए; उसका लंबा कद और भावहीन चेहरा ध्यान भटकाने वाला है। यह वही कृति हैं जो पिछले साल मिमी में इतनी प्रभावशाली थीं।

इस तरह की फिल्मों में जिस दिव्यता की तलाश की जाती है, वह गायब है। हैरान और डराने के प्रभाव को बढ़ाने के लिए कई बड़े विजुअल्स पर काम किया गया, लेकिन द:ुख की बात है कि कोई भी इस बनावटी चमक से भयभीत नहीं हुआ।

सिनेमाटोग्राफर कार्तिक पलानी ने फिल्म में बहुत सारे रंगों, खासकर काले और नीले रंग का इस्तेमाल अधिक किया, ताकि फिल्म को देखने वाले दर्शकों में चकाचौंध और हैरत की भावना बनी रहे।

अजय-अतुल और सचेत-परंपरा के गाने, और संचित और अंकित बलहारा का बैकग्राउंड स्कोर अपेक्षित रूप से लाउड है, इतना तेज की संगीत की जगह ध्वनि प्रदूषण लगता है।

/एकेजे

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