दुकान की आड़ में सरहद की जासूसी! पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजता था सेना की मूवमेंट, जैसलमेर का युवक गिरफ्तार
दो साल से पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क के संपर्क में होने का आरोप; जयपुर की अदालत ने 22 जून तक रिमांड पर भेजा
जैसलमेर। राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान समर्थित जासूसी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सीआईडी इंटेलिजेंस ने जैसलमेर जिले के नाचना क्षेत्र से एक युवक को गिरफ्तार किया है। युवक पर सीमा क्षेत्र में दुकान चलाने की आड़ में भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल की गतिविधियों पर नजर रखने तथा उनसे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुंचाने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान नाचना थाना क्षेत्र के हिंगोल गांव निवासी 26 वर्षीय मुस्ताक अली पुत्र नबी बख्श के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद उसे जयपुर लाया गया, जहां बुधवार को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे 22 जून तक पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
फिलहाल सीआईडी इंटेलिजेंस सहित विभिन्न सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां आरोपी से संयुक्त रूप से पूछताछ कर रही हैं। एजेंसियां उसके संपर्कों, आर्थिक लेन-देन और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
संदिग्ध गतिविधियों पर लंबे समय से थी नजर
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, इंटेलिजेंस प्रफुल्ल कुमार के अनुसार, राजस्थान में पाकिस्तान समर्थित जासूसी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। इसी दौरान मुस्ताक अली की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं।
तकनीकी निगरानी और अन्य सूचनाओं के आधार पर सीआईडी इंटेलिजेंस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक जांच और उसके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल डाटा के आधार पर एजेंसियों को उसके पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में होने के संकेत मिले।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से पिछले करीब दो वर्षों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में था।
प्रमुख मार्ग पर दुकान खोलकर रखता था सुरक्षा बलों पर नजर
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मुस्ताक अली को सीमा क्षेत्र की ओर जाने वाले एक प्रमुख मार्ग पर दुकान संचालित करने के लिए कहा था। आरोप है कि दुकान खोलने का उद्देश्य वहां से गुजरने वाली सेना और बीएसएफ की गाड़ियों तथा जवानों की गतिविधियों पर निगरानी रखना था।
आरोपी कथित रूप से सुरक्षा बलों की आवाजाही से संबंधित तस्वीरें और वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुंचाता था। एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसने अब तक किन-किन सैन्य गतिविधियों और स्थानों से जुड़ी सूचनाएं साझा कीं।
पैसे के बदले संवेदनशील सूचनाएं भेजने का आरोप
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी को सूचनाएं उपलब्ध कराने के बदले पाकिस्तानी हैंडलर्स से पैसे भी मिलते थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि उसने सेना और बीएसएफ की आवाजाही के अलावा सामरिक महत्व की दूसरी जानकारियां भी विदेशी खुफिया नेटवर्क तक पहुंचाई हो सकती हैं।
आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया खातों, बैंक खातों और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है। संदिग्ध लेन-देन और ऑनलाइन संपर्कों का भी सत्यापन कराया जा रहा है।
शासकीय गुप्त बात अधिनियम के तहत मामला दर्ज
राजस्थान इंटेलिजेंस ने आरोपी के खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 के तहत मामला दर्ज किया है। उसे 16 जून को गिरफ्तार किया गया था। अब रिमांड अवधि के दौरान सुरक्षा एजेंसियां उससे उसके पाकिस्तानी संपर्कों और स्थानीय नेटवर्क को लेकर पूछताछ करेंगी।
अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या सीमावर्ती क्षेत्र में उसके साथ और लोग भी जुड़े हुए थे।
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